20 दिसंबर 2019

मुमताज़ नाम से ही हिट हो जाती थी फिल्में :)

बॉलीवुड ऐसी दुनिया है जहाँ जब इंसान का सिक्का चलता है तो तमाम बुलंदियां उसके आगे छोटी दिखाई देती है आज हम आपको ऐसी ही एक अभिनेत्री के बारे में  जो कभी अपनी मधुर मुस्कान और नटखट अदाओं के लिए इतनी मशहूर थी की फिल्म में उनका होना यानि फिल्म के हिट होने की गारंटी सत्तर के दशक में अभिनेत्री मुमताज अपनी ख़ूबसूरती से लेकर अभिनय तक के लिए चर्चित रही थीं। उनकी एक झलक पाने को दर्शक बेताब रहा करते थे 70 के दशक की सबसे कामयाब जोड़ी मुमताज और राजेश लोग के इस कद्र दीवाने थे जब राजेश खन्ना ने मुमताज को 
देखकर गुनगुनाया, 'करवटें बदलते रहे सारी रात हम', तो लगा कि हिंदी के सुपरस्टार वाकई में मुमताज की यादों में रात भर करवटें बदलते रहे हों। कुछ हद तक सच भी था क्योंकि 60-70 के दशक में राजेश खन्ना और मुमताज की जोड़ी ने कई हिट फिल्मों में काम किया। इस जोड़ी की साथ में जितनी भी फिल्में रहीं उन सभी ने सफलता के कदम छुए.....ये जोड़ी पर्दे पर जितने करीब नजर आती थी दरअसल वास्तविक जिंदगी में भी ये जोड़ी उतने ही करीब मानी जाती थी। 70 के दशक में फैंस मुमताज और राजेश के ढेरों दीवाने थे,70 के दशक में इन दोनों के इश्क की खबरों ने जमकर सुर्खियां भी 
बटोरीं दोस्तीं एक दौर था जब सब के दिल में राज करने वाली मुमताज जब परदे पर आतीं थी तो दर्शकों के दिल की धड़कनें रुक सी जाती थी.हर कोई उनकी अदाओं और अदाकारी का दीवाना था.लेकिन, साठ और सत्तर के दशक की इस हसीन नायिका को आज भुला दिया गया है. 69 वर्षीय मुमताज बचपन से ही अभिनेत्री बनना चाहती थी मुमताज़ का जन्म 31 जुलाई, 1947 को मुंबई में हुआ था और बचपन से ही उनका सपना एक अभिनेत्री बनने का ही था.उस समय मुमताज की मां नाज और आंटी नीलोफर दोनों ही एक्टिंग की दुनिया में सक्रिय थीं, लेकिन वह महज जूनियर आर्टिस्ट के ही रूप में काम किया करतीं थी. साठ के दशक में मुमताज ने भी फिल्मों में छोटे-मोटे रोल करने शुरू कर दिए थे.
मुमताज़ के साथ राजेश खन्ना पर फिल्माए गाने लोगों को आज भी याद हैं। सावन के महीने में सुने जाने वाले, ‘जय जय शिवशंकर’ की हो, या फिर ‘गोरे रंग पर इतना…’ सबके सब सदाबहार गाने हैं !!

- संजय भास्कर 

02 दिसंबर 2019

पापा आप हो सबसे ख़ास -2 दिसम्बर जन्मदिन :)

2 दिसम्बर आज मेरे पिता जी का जन्मदिन है सबसे पहले पिता जी को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनायें माँ के बाद अगर कोई हमारे दिल के करीब होता है वो है पिता पिता का प्यार माँ की तरह दिखता नहीं है पर हमे अंदर से बहुत मजबूती देता है पापा अपने प्यार को दिखा नहीं पाते जिस तरह माँ करती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की पापा हमसे कम प्यार करते हैं. बल्कि पापा तो वो हैं जो हमारी जरुरत पूरा करने के लिए और परिवार को खुश रखने के लिए कभी उनके चेहरे पर वो अपनी बाहरी तकलीफ को नहीं दिखाते हैं ..!!


पापा आप कभी प्यार नहीं जताते
कभी पसंद नहीं पूछते फिर भी
हमारी पसंद की हर चीज़
बिन कहे ही ला देते हो जाने कैसे
यही तो खासयित है आपकी
कि मन की सारी बातें फिर भी
जान जाते हो 
आप मेरे जीवन में
अदृश्य रूप से 
अपना अस्तित्व बोध 
करवाते हो  
बेशक माँ नहीं
मगर माँ से कम भी नहीं
मगर आपको 
जिसके कारण मेरा वजूद 
मेरी ज़िन्दगी 
के हर कदम पर
मेरी ऊंगली थामे
आपका स्नेहमय स्पर्श
मेरे साथ होने 
के अहसास को
पुख्ता करता गया
मेरे हर कदम में
हौंसला बढाता गया
मुझे दुनिया से 
लड़ने का जज्बा
देता गया
मुझे पिता में छुपे
दोस्त का जब 
अहसास हुआ 
तब मैंने खुद को

संपूर्ण पाया 

आप अब भी
मेरे लिए 
फिक्रमंद नज़र आते हो
चाहे खुद हर 
तकलीफ झेल जाओ
अब मैं चाहता हूँ
कुछ करूँ 
आपके लिए
मगर आपके
स्नेह,त्याग और समर्पण
के आगे मेरा 
हर कदम तुच्छ 
जान पड़ता है
पर मेरी यही कामना है 
आपके हर कदम पर
आपके साथ खड़ा रहूँ मैं.....

पिताजी को जन्मदिवस की ढेर सारी शुभकामनायें.......!!



-- संजय भास्कर

14 नवंबर 2019

.... चाय के बहाने :(


एहसासों को सहलाती हुई
शक्कर की तरह मीठी
एक कप चाय
जब कोई पूछता है
बड़े प्यार से
तो महज वो
दूध और चायपत्ती
को उबालकर बनी हुई एक कप चाय
नहीं होती
वो एक माध्यम होती है
एहसासों को सहलाने की
क्योंकि चाय के बहाने
साँझा होती है हम सब की
कुछ चीनी सी
मीठी यादें
कुछ चायपत्ती सी कड़वी
बातें.......
अपने कुछ
अनुभव,कुछ आशाएं
कुछ नयी उम्मीदें..?
और कुछ ही समय में
उस एक प्याली
चाय के साथ
बट जाते है
जिंदगी के वो पल
जो अक्सर अनकहे रह जाते है  !!

- संजय भास्कर

02 नवंबर 2019

चिड़िया का हमारे आँगन में आना :)

चिड़िया की चहचहाट में जिंदगी के सपने दर्ज हैं और चिड़िया की उड़ान में सपनों की तस्वीर झिलमिलाती है चिड़िया जब चहचहाती है तो मौसम में एक नई ताजगी और हवाओं में गुनगुनाहट सी आ जाती है चिड़िया का हमारे आँगन में आना हमारी जिंदगी में लय भर देता है। चिड़िया जब दाना चुनती है तो बच्चे इंतज़ार में देर तक माँ को निहारते रहते हैं और घर बड़े बुजुर्ग चिड़ियों को दाना डाल कर एक अलग ही सुकून का अनुभव करते है 
कितना मनमोहक लगता है जब गौरेया एक कोने में जमा पानी के में पंख फड़फड़ाकर नहाती है और पानी उछालती है. इसके अलावा चिड़िया एक कोने में पड़ी मिट्टी में भी लोटपोट करती है ........तभी तो चिड़िया का
हर मनुष्य के साथ एक भावनात्मक रिश्ता है पर आज के समय में चिड़ियों का संसार सिमटता जा रहा है और इस संतुलन को बिगड़ने में जाने-अनजाने मनुष्य का बहुत बड़ा रोल है तथा शहरों में तो ऐसी स्थिति है बन गई गई कि लगता है एक दिन आगन चिड़ियों से सूना हो जाए और चिड़िया की चहचहाट के लिए मौसम तरस जाए, हवाएं तरस जाए और हम सब तरस जाए आज के समय में हो रहे शहरीकरण की मार भी सीधे रुप से इन्हीं पर पड़ी है। जिसकी वजह से घरेलू चिड़ियों की संख्या दिनों-दिन घटती जा रही है और घरेलू चिड़ियों का अस्तित्व लगातार संकट में है। जब से खेती में नई-नई तकनीकें प्रयोग में आई हैं, खेतों में उठने-बैठने वाली घरेलू चिड़ियों पर भी बुरा असर पड़ा है। जिस तेजी से इधर कुछ सालों में घरेलू चिड़ियों की संख्या में कमी आई है, वह चिंताजनक है। प्राय: यह चिड़िया गावों में ज्यादा पाई जाती थीं। लेकिन आजकल गावों में भी घरेलू चिड़िया कम ही नजर आती हैं जो की चिंताजनक है अगर हम सचेत होंगे तो शायद गौरेया को एकदम लुप्त होने से अभी भी बचा पाएंगे. अगर हम प्रयास करेंगे तो आने वाले सालों में शायद दूसरे पंछियों को भी लुप्त होने से बचा पाएंगे..!!

- संजय भास्कर 

17 अक्टूबर 2019

... जिन्दा जड़ें :)

                                            ( चित्र गूगल से साभार  )

पेड़ के मरने पर 
साथ नहीं छोड़ती 
उसकी जड़ें 
वो हमेशा कोशिश में रहती है 
दोबारा उगने की 
बार- बार 
फूटती है कोपलें ठूँठ में  
और ताकत देती है 
तेजी से उठने की पेड़ों को 
पर पेड़ के मरने पर भी 
जिन्दा जड़ों को धरती के गर्भ में 
रहता है  
हमेशा नया तना उगने का 
इंतज़ार  !!

- संजय भास्कर