15 जनवरी 2019

कुछ मेरी कलम से यशोदा अग्रवाल पढ़ने का जूनून :)

यशोदा अग्रवाल जी ब्लॉगजगत में एक पहचान है यशोदा अग्रवाल जी ( मेरी धरोहर , मुखरित मौन विविधा, पाँच लिंकों का आनन्द ) यशोदा जी कई ब्लॉग की संस्थापक है पढ़ने का शौक और लिखने का जूनून उनके अंदर कूट-कूट कर भरा हुआ है लगभग कई वर्षो से यशोदा दी को ब्लॉग के माध्यम से पढ़ रहा हूँ उनका कई ब्लोगो पर हर दिन दृढ़ता पूर्वक कार्य जारी है अपने कार्यो में कुशल पूर्ण पारिवारिक महिला यशोदा जी अपने कर्तव्यों का दृढ़ता पूर्वक निभा रही हैं समय- समय पर उनकी मर्मस्पर्शी लेखन पढ़ने को मिलता है ब्लॉग के सदस्यों की मेहनत और लगन के कारण हलचल विद पाँच लिंकों का आनन्द वर्तमान में बहुत लोकप्रिय है यशोदा दी लेखन के साथ-साथ अच्छी पाठक भी है जो हमेशा ब्लोगरो की रचनाएँ अपने ब्लॉग पर प्रसारित कर सभी का हौसला बढाती रही है ....लम्बे समय से मैं यशोदा अग्रवाल जी का ब्लॉग पढ़ रहा हूँ पर उनसे मिलने का सौभाग्य नहीं प्राप्त हुआ मैं अक्सर यशोदा जी जी के बारे में कुछ लिखना चाहता था और क्यों न लिखे आखिर उनका ब्लॉगिंग और ब्लोगरो की रचनाएँ अपने ब्लॉग पर प्रसारित कर बहुत ही बढ़िया कार्य कर रही है उनका अंदाज ही ऐसा है कि पाठक अपने आप ही उनके ब्लोगो पर खिंचा चला जाता है उनके इस योगदान ने ब्लॉगजगत को प्रभावित किया है उनके निरंतर योगदान के लिए यशोदा अग्रवाल जी को ढेरों शुभकामनायें यशोदा दीदी के लेखनी से प्रभावित होकर ही उनके बारे में लिख रहा हूँ पर शायद उनके बारे में लिखना मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है यशोदा दी के ब्लॉग से कुछ पंक्तिया साँझा कर रहा हूँ उम्मीद है सभी को पसंद आये ........!!
यशोदा जी की लिखी मेरी पसंदीदा रचना........सात शहीद 
चले गए वो क्यों
क्या दुश्मनी थी उनसे
जो मार दिया छल से
जो चाहते हैं वो
वो होगा जरूर
पर उन्हे... 
देनी होगी तिलाजली
हथियार के रूप में
और सरकार से
विनम्र आग्रह
तलाशें..उन सफेदपोशों
और सरकारी अमले में से
विभीषणों और जयचंदों  को
जो इन आतंकवादियों को 
खबरें मुहैय्या  करवाते हैं
व पनाह भी देते हैं
और तभी..
भारत की जनता
मरते-मरते जीने के
भय से मुक्त होगी !!
मन की उपज

-  यशोदा अग्रवाल 
मेरी और से यशोदा जी को लेखन के लिए लिए को ढेरों शुभकामनाएँ............!!

-- संजय भास्कर 

03 जनवरी 2019

..... अपना घर :)

                         ( चित्र गूगल से साभार  )

जवान बेटी को बाप ने कहा
जाना होगा अब तुम्हे अपने घर ,
बी.ए की करनी वही पढाई
मैंने
ढूंढ़ लिया तेरे लायक वर ,
अब तक तुम हमारी थी
पर अब हमे छोड़ जाना होगा
बसाना होगा
नया घर
बेटी ने बहू बनकर
बी.ए वाली बात दोहरायी
सुनकर उसकी बातें उसकी सास गुर्राई 
अगर आगे ही पढना था
तो पढ़ती 'अपने घर '
बहू है हमारी अब सेवा कर ,
बेटी ने सोचा और समझा
कौन सा है मेरा घर
या फिर
बेटियां दुनिया में होती है
बे घर ....!!

- संजय भास्कर

26 दिसंबर 2018

ज़िन्दगी से लम्हे चुरा बटुए मे रखता रहा -- संजय भास्कर

 ( चित्र गूगल से साभार  )

ज़िन्दगी से लम्हे चुरा बटुए मे रखता रहा ! 
फुरसत से खरचूंगा बस यही सोचता रहा !!

उधड़ती रही जेब करता रहा तुरपाई !
फिसलती रही खुशियाँ करता रहा भरपाई !!

इक दिन फुरसत पायी सोचा खुद को आज रिझाऊं
बरसों से जो जोड़े वो लम्हे खर्च आऊं !!

खोला बटुआ...लम्हे न थे जाने कहाँ रीत गए !
मैंने तो खर्चे नही जाने कैसे बीत गए !!

फुरसत मिली थी सोचा खुद से ही मिल आऊं !
आईने में देखा जो पहचान ही न पाऊँ !!

ध्यान से देखा बालों पे चांदी सा चढ़ा था,
था तो मुझ जैसा पर जाने कौन खड़ा था ..!!

ये पंक्तियाँ मझे SMS में मिली, अच्छी लगी तो ब्लॉग पर आप सब से साँझा कर लीं !!

-- संजय भास्कर