06 जुलाई 2018

.... ज़िंदादिल :)

( चित्र गूगल से साभार  )

उस आदमी से मैं रोज़
मिलता हूँ 
उसकी सुनता हूँ अपनी बताता हूँ 
परिवार में सब ठीक है 
और आगे निकल जाता हूँ 
पर यह कभी नहीं जाहिर होने देता वो 
की वह कितना दुखी है 
मकान की मरम्त बाकी है अभी 
बाबा का इलाज जरूरी है 
कमाई का ज़रिया भी कुछ खास नहीं है 
परेशान है 
पर इन सब से लड़ता वह 
हमेशा चेहरे पर रखता है मुस्कराहट
नहीं दिखाता अपना दुःख दूसरों को 
क्योंकि सुख के सब साथी है 
दुःख में कोई नहीं 
और इसीलिए वो हमेशा बना रहता है
ज़िंदादिल !!

- संजय भास्कर   

06 जून 2018

माँ के हाथों की बनी रोटियां :)

( चित्र गूगल से साभार  )

रोजगार की तलाश में 
घर से बहुत दूर बसे लोग 
ऊब जाते है जब 
खाकर होटलो का बना खाना 
तब अक्सर ढूंढते है माँ के हाथों की बनी रोटियां 
पर नहीं मिलती 
लाख चाहने पर भी वो रोटियां 
क्योंकि कुछ समय बाद 
याद आता है की घर तो छोड़ आये 
इन्ही रोटियों के लिए  !!

- संजय भास्कर   

19 मई 2018

देश सबका है :)

                                                               ( चित्र गूगल से साभार  )

बीज बो गए विषमता के 
आज यहाँ सापों की खेती उग आई है
क्यारी को फिर से सँवारो
बीज नए डालो प्यार के हमदर्दी के,
मेड़ें मत बाँधो
लकीर मत बनाओ अपनों के 
बीच में 
मत करो देशका विभाजन 
जातिवाद और धरम के नाम पर 
क्योकि धरती सबकी है 
देश सबका है !!

- संजय भास्कर