02 दिसंबर 2019

पापा आप हो सबसे ख़ास -2 दिसम्बर जन्मदिन :)

2 दिसम्बर आज मेरे पिता जी का जन्मदिन है सबसे पहले पिता जी को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनायें माँ के बाद अगर कोई हमारे दिल के करीब होता है वो है पिता पिता का प्यार माँ की तरह दिखता नहीं है पर हमे अंदर से बहुत मजबूती देता है पापा अपने प्यार को दिखा नहीं पाते जिस तरह माँ करती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की पापा हमसे कम प्यार करते हैं. बल्कि पापा तो वो हैं जो हमारी जरुरत पूरा करने के लिए और परिवार को खुश रखने के लिए कभी उनके चेहरे पर वो अपनी बाहरी तकलीफ को नहीं दिखाते हैं ..!!


पापा आप कभी प्यार नहीं जताते
कभी पसंद नहीं पूछते फिर भी
हमारी पसंद की हर चीज़
बिन कहे ही ला देते हो जाने कैसे
यही तो खासयित है आपकी
कि मन की सारी बातें फिर भी
जान जाते हो 
आप मेरे जीवन में
अदृश्य रूप से 
अपना अस्तित्व बोध 
करवाते हो  
बेशक माँ नहीं
मगर माँ से कम भी नहीं
मगर आपको 
जिसके कारण मेरा वजूद 
मेरी ज़िन्दगी 
के हर कदम पर
मेरी ऊंगली थामे
आपका स्नेहमय स्पर्श
मेरे साथ होने 
के अहसास को
पुख्ता करता गया
मेरे हर कदम में
हौंसला बढाता गया
मुझे दुनिया से 
लड़ने का जज्बा
देता गया
मुझे पिता में छुपे
दोस्त का जब 
अहसास हुआ 
तब मैंने खुद को

संपूर्ण पाया 

आप अब भी
मेरे लिए 
फिक्रमंद नज़र आते हो
चाहे खुद हर 
तकलीफ झेल जाओ
अब मैं चाहता हूँ
कुछ करूँ 
आपके लिए
मगर आपके
स्नेह,त्याग और समर्पण
के आगे मेरा 
हर कदम तुच्छ 
जान पड़ता है
पर मेरी यही कामना है 
आपके हर कदम पर
आपके साथ खड़ा रहूँ मैं.....

पिताजी को जन्मदिवस की ढेर सारी शुभकामनायें.......!!



-- संजय भास्कर

14 नवंबर 2019

.... चाय के बहाने :(


एहसासों को सहलाती हुई
शक्कर की तरह मीठी
एक कप चाय
जब कोई पूछता है
बड़े प्यार से
तो महज वो
दूध और चायपत्ती
को उबालकर बनी हुई एक कप चाय
नहीं होती
वो एक माध्यम होती है
एहसासों को सहलाने की
क्योंकि चाय के बहाने
साँझा होती है हम सब की
कुछ चीनी सी
मीठी यादें
कुछ चायपत्ती सी कड़वी
बातें.......
अपने कुछ
अनुभव,कुछ आशाएं
कुछ नयी उम्मीदें..?
और कुछ ही समय में
उस एक प्याली
चाय के साथ
बट जाते है
जिंदगी के वो पल
जो अक्सर अनकहे रह जाते है  !!

- संजय भास्कर

02 नवंबर 2019

चिड़िया का हमारे आँगन में आना :)

चिड़िया की चहचहाट में जिंदगी के सपने दर्ज हैं और चिड़िया की उड़ान में सपनों की तस्वीर झिलमिलाती है चिड़िया जब चहचहाती है तो मौसम में एक नई ताजगी और हवाओं में गुनगुनाहट सी आ जाती है चिड़िया का हमारे आँगन में आना हमारी जिंदगी में लय भर देता है। चिड़िया जब दाना चुनती है तो बच्चे इंतज़ार में देर तक माँ को निहारते रहते हैं और घर बड़े बुजुर्ग चिड़ियों को दाना डाल कर एक अलग ही सुकून का अनुभव करते है 
कितना मनमोहक लगता है जब गौरेया एक कोने में जमा पानी के में पंख फड़फड़ाकर नहाती है और पानी उछालती है. इसके अलावा चिड़िया एक कोने में पड़ी मिट्टी में भी लोटपोट करती है ........तभी तो चिड़िया का
हर मनुष्य के साथ एक भावनात्मक रिश्ता है पर आज के समय में चिड़ियों का संसार सिमटता जा रहा है और इस संतुलन को बिगड़ने में जाने-अनजाने मनुष्य का बहुत बड़ा रोल है तथा शहरों में तो ऐसी स्थिति है बन गई गई कि लगता है एक दिन आगन चिड़ियों से सूना हो जाए और चिड़िया की चहचहाट के लिए मौसम तरस जाए, हवाएं तरस जाए और हम सब तरस जाए आज के समय में हो रहे शहरीकरण की मार भी सीधे रुप से इन्हीं पर पड़ी है। जिसकी वजह से घरेलू चिड़ियों की संख्या दिनों-दिन घटती जा रही है और घरेलू चिड़ियों का अस्तित्व लगातार संकट में है। जब से खेती में नई-नई तकनीकें प्रयोग में आई हैं, खेतों में उठने-बैठने वाली घरेलू चिड़ियों पर भी बुरा असर पड़ा है। जिस तेजी से इधर कुछ सालों में घरेलू चिड़ियों की संख्या में कमी आई है, वह चिंताजनक है। प्राय: यह चिड़िया गावों में ज्यादा पाई जाती थीं। लेकिन आजकल गावों में भी घरेलू चिड़िया कम ही नजर आती हैं जो की चिंताजनक है अगर हम सचेत होंगे तो शायद गौरेया को एकदम लुप्त होने से अभी भी बचा पाएंगे. अगर हम प्रयास करेंगे तो आने वाले सालों में शायद दूसरे पंछियों को भी लुप्त होने से बचा पाएंगे..!!

- संजय भास्कर 

17 अक्टूबर 2019

... जिन्दा जड़ें :)

                                            ( चित्र गूगल से साभार  )

पेड़ के मरने पर 
साथ नहीं छोड़ती 
उसकी जड़ें 
वो हमेशा कोशिश में रहती है 
दोबारा उगने की 
बार- बार 
फूटती है कोपलें ठूँठ में  
और ताकत देती है 
तेजी से उठने की पेड़ों को 
पर पेड़ के मरने पर भी 
जिन्दा जड़ों को धरती के गर्भ में 
रहता है  
हमेशा नया तना उगने का 
इंतज़ार  !!

- संजय भास्कर 

28 सितंबर 2019

कल्पना नहीं कर्म :(

एक दिन आफिस से घर लौटते हुए एक कॉफी शॉप पर कुछ युवा मदहोश व नशे में डूबे हुए मदमस्त आधुनिकता कि आड़ में घिरे युवाओं की आज की जिन्दगी का सच देखर कुछ पंक्तियाँ उम्मीद है पसंद आये ........!!

कॉफी हाउस में बैठा
आज का युवा वर्ग
मदहोश,मदमस्त,बेखबर
कर्म छोड़ कल्पना से
संभोग करता हुआ
निराशा को गर्भ में पालता हुआ
मायूसियो को जन्म दे रहा है
तो ऐसे कंधो पर
देश का बोझ
कैसे टिक पायेगा ? 
जो
या तो खोखले हो गये है
या जिनको उचका लिया गया है
पर आज के युवा को विसंगतियों में
भटक जाना स्वाभाविक है
पर ए - दोस्त
अब बाहर निकलो इस संकीर्ण दायरे से
कल्पना को नहीं
कर्म को भोगो
अपने कंधे मजबूत करो
इन्ही कंधो को तो
यह देश यह समाज निहारता है
अपनी आशामयी, धुंधली सी
बूढ़ी आँखों से.........!!

-- संजय भास्कर