18 जून 2013

सुख दुःख इसी का नाम जिंदगी है :)


 ( चित्र - गूगल से साभार )

हर कोई अक्सर कहता है
मैं दुखी हूँ !
पर वो ये नहीं जानता
की दुनिया में बहुत लोग दुखी है !
हर कोई है परेशान
पर सबका अपना - अपना
नसीब है !
ये हर घर की कहानी है
हर किसी की कोई न कोई
परेशानी है !
कोई दुखी है पैसे न आने से
कोई दुखी है !
अपनी औलादों के कारनामो से
पर शायद सुख दुःख
इसी का नाम 

...............जिंदगी है !
इन्ही सब से बनती है !
जिंदगी की कहानी
....जो अलग अलग होती है !

सब की जुबानी.......!!!


@ संजय भास्कर  



03 जून 2013

माँ तुम्हारे लिए हर पंक्ति छोटी है -- संजय भास्कर


चित्र--  गूगल से साभार  

मेरी प्यारी माँ
तुम्हारे बारे में क्या लिखू
तुम मेरा सर्वत्र हो
मेरी दुनिया हो
तुम्हारे लिए हर पंक्ति छोटी है !
हर स्पर्श बहुत छोटा है 

सारी दुनिया न्योछावर कर दू
तुम्हारे चरणों में
लेकिन वह भी जैसे काफी 

नहीं है !
मैं तुम्हारे खून का वह कतरा हूँ !
जिसे तुम इस दुनिया में
लेकर आई 

और बहुत प्यार से पालकर 
बड़ा किया तुम्हारी गोद में
आकर मैंने आँखें खोली
तुम्हारे सहारे ही मैंने दुनिया दारी देखी माँ 

 
आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा सादर नमस्कार काफी दिनों से व्यस्त होने के कारण ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा रहा हूँ  पर अब आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ अपनी एक छोटी कविता के साथ उम्मीद है आप सभी को पसंद आयेगी.......!!

@ संजय भास्कर 


04 मई 2013

फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता हुआ शहर -- संजय भास्कर


( चित्र - गूगल से साभार )

फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता 
हुआ शहर
यह वह शहर नहीं रहा अब
जिस शहर में 

'' मैं कई वर्षो पहले आया था ''
अब तो यह शहर हर समय भागता 

नजर आता है !
कच्ची सड़के ,कच्चे मकानों
और साधन के नाम पर
पर साईकल पर चलने 

वाले लोग 
रहते है अब आलिशान घरों में
और दौड़ते है तेजी से कारों में
नए आसमान की तलाश में
फ्लाईओवर के आर- पार
मोटरसाइकल कारों पर
तेजी से दौड़ता 

हुआ शहर
पहुच गया है नई सदी में
मोबाइल और इन्टरनेट के जमाने में
बहुत तेजी से बदल रहा है
..........छोटा सा शहर  !!!




@ संजय भास्कर  


18 अप्रैल 2013

मैं अकेला चलता हूँ -- संजय भास्कर


मैं अकेला चलता हूँ
चाहे कोई साथ चले 
या न चले
मैं अकेले ही खुश हूँ
कोई साथ हो या न हो
पर मेरी छाया
हमेशा मेरे साथ होती है !
जो हमेशा मेरे पीछे- २ 
अक्सर मेरा पीछा करती है
घर हो या बाज़ार
 हमेशा मेरे साथ ही रहती है
 मेरी छाया से ही मुझे हौसला मिलता है !
क्योंकि नाते रिश्तेदार तो
 समय के साथ ही चलते है
पर धुप हो या छाव
छाया हमेशा साथ रहती है
और मुझे अकेलेपन का अहसास नहीं होने देती
इसलिए मैं अकेला ही चलता हूँ ...............!!!

चित्र - गूगल से साभार
 
@ संजय भास्कर  


04 अप्रैल 2013

दिन में फैली ख़ामोशी -- संजय भास्कर


जब कोई इस दुनिया से
चला जाता है
वह दिन उस इलाके के लिए
बहुत अजीब हो जाता है
चारों दिशओं में जैसे
एक ख़ामोशी सी छा जाती है
दिन में फैली ख़ामोशी
वहां के लोगो को सुन्न कर देती है
क्योंकि कोई शक्श
इस दुनिया से
रुखसत हो चुका होता है ...........!!!!!

 
चित्र - गूगल से साभार

 
@ संजय भास्कर