04 मई 2013

फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता हुआ शहर -- संजय भास्कर


( चित्र - गूगल से साभार )

फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता 
हुआ शहर
यह वह शहर नहीं रहा अब
जिस शहर में 

'' मैं कई वर्षो पहले आया था ''
अब तो यह शहर हर समय भागता 

नजर आता है !
कच्ची सड़के ,कच्चे मकानों
और साधन के नाम पर
पर साईकल पर चलने 

वाले लोग 
रहते है अब आलिशान घरों में
और दौड़ते है तेजी से कारों में
नए आसमान की तलाश में
फ्लाईओवर के आर- पार
मोटरसाइकल कारों पर
तेजी से दौड़ता 

हुआ शहर
पहुच गया है नई सदी में
मोबाइल और इन्टरनेट के जमाने में
बहुत तेजी से बदल रहा है
..........छोटा सा शहर  !!!




@ संजय भास्कर  


54 टिप्‍पणियां:

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

इतने बदलाव के बाद ये शहर छोटा कहाँ रहा ?

पर ये बदलाव का दौर सुखद रहा :)

विभा रानी श्रीवास्तव ने कहा…

कल मैं भी यही सोच रही थी
सार्थक अभिव्यक्ति
हार्दिक शुभकामनायें

Jyoti khare ने कहा…

पहुच गया है नई सदी में
मोबाइल और इन्टरनेट के जमाने में
बहुत तेजी से बदल रहा है
..........छोटा सा शहर !!!-----
वर्तमान का शहर
आज का सच व्यक्त करती रचना
वाह गजब
बधाई



ashokkhachar56@gmail.com ने कहा…

waaaah wah

सदा ने कहा…

पहुच गया है नई सदी में
मोबाइल और इन्टरनेट के जमाने में
बहुत तेजी से बदल रहा है
..........छोटा सा शहर !!!
बिल्‍कुल सच कहा आपने ... बदल ही तो रहा है छोटा सा शहर

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

रफ़्तार बहुत तेज है अबतो मोनो रेल आने वाला है
डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
lateast post मैं कौन हूँ ?
latest post परम्परा

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत तेजी से बदल रहा है छोटा सा शहर!!!आगे बढ़ने के लिए ये बदलाव जरूरी है,,

RECENT POST: दीदार होता है,

Asha Lata Saxena ने कहा…

परिवर्तन तो हर जगह हो रहे हैं |जहां कुछ वर्ष पहले रहे थी आज सब नया सा दीखता हाँ |अच्छी रचना |
आशा

virendra sharma ने कहा…


भले तेज़ी से दौड़ रहा है फ्लाई ओवर .लेकिन वह रिख्शे वाला (निहाल भाई ,निहाल सिंह )आज भी वही रिक्शा खींचता है जिनसे मेरे बच्चों को स्कूल ले जाता था .

बढ़िया प्रस्तुति .

virendra sharma ने कहा…


भले तेज़ी से दौड़ रहा है फ्लाई ओवर .लेकिन वह रिख्शे वाला (निहाल भाई ,निहाल सिंह )आज भी वही रिक्शा खींचता है जिनसे मेरे बच्चों को स्कूल ले जाता था .उन बच्चों में से एक बच्चा आज कमांडर है इंडियन नेवी में ,बेटी ग्रुप लीडर है क़ुइकिन लांस में विदेश में ,निहाल वहीँ है .एक छोटा सा मकान छोटी सी छत ज़रूर है उसके सर पे .

Maheshwari kaneri ने कहा…

परिवर्तन तो प्रकृति का नियम है..सुन्दर रचना..शुभकामनाएं संजय

अरुन अनन्त ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (05-05-2013) के चर्चा मंच 1235 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

संध्या शर्मा ने कहा…

बहुत बदल गया है, संवेदना शून्य होकर न जाने किस ओर भाग रहा है... बेहतरीन रचना

Neeraj Neer ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना . वर्तमान भागती दौडती शहरी जिंदगी को सुंदरता से प्रकट किया है.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

चौराहा दो रास्तों का निपटारा न कर पाया, फ्लाईओवर बना गया।

sriram ने कहा…

पूरा का पूरा नक्शा ही बदल दिया .....

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

आज की ब्लॉग बुलेटिन एक की ख़ुशी से दूसरा परेशान - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

sab kuchh bhag raha hai siraf insaan ki insaniyat kahin kho si gai hai .....bahut acchhi abhwayakti ...sanjay jee ....

Ranjana verma ने कहा…

परिवर्तन ही तो जिन्दगी है बहुत सुंदर रचना !!

Ranjana verma ने कहा…

परिवर्तन ही तो जिन्दगी है बहुत सुंदर रचना !!

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

अब तो छोटे शहरों में मेट्रो का बच्चा पल रहा है.

रामराम.

shalini rastogi ने कहा…

संजय जी , आपकी कवित पढ़ कर अरुण कमल जी की कविता 'नए इलाके में' याद आ गई ... बहुत खूब!

VenuS "ज़ोया" ने कहा…

बहुत तेजी से बदल रहा है
..........छोटा सा शहर

hmmmmm...sab ki zindgii ka hisaa he aapki ye kavitaaa...hr koi..aisii bhaawnaaa se guzraa hi hogaa...aur aapne bahut achi trha se bhaawnaa ko shbdon ka roop diyaa..........

bahut bahut dhnaywaad..mere blog tak aane aur likhe ko sraahne ke liye............

सुन्दर प्रस्तुति बड़े दिनों की अधीर प्रतीक्षा के बाद आज आपका आगमन हुआ है!....aapki ye lines pr ke man ko sukhd ehsaas huya.....dhanywaad......

yun blog tak aate rahen..aur honslaa bdhaate rahen

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

shahar ki raftaar ham sabke shabdo se bhi tej ho gayee hai ...

रचना दीक्षित ने कहा…

गांवों के शहरीकरण की तस्वीर.

राहुल ने कहा…

परिवर्तन को स्वीकार करना होगा...
बेहतरीन रचना संजयजी ..

ओंकारनाथ मिश्र ने कहा…

समय का काम है बदल देना. सुन्दर अभिव्यक्ति.

रश्मि शर्मा ने कहा…

गांव...कस्‍बे...छोटे शहर....सब बदल रहे हैं अब....

Manav Mehta 'मन' ने कहा…

waah ..bahut badhiya

Satish Saxena ने कहा…

सुंदर रचना ...
बधाई !!

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

अपने समय को अभिव्यक्त करती अच्छी कविता |

Sneha Rahul Choudhary ने कहा…

परिवर्तन अखरता तो है लेकिन संसार का नियम भी है. सुन्दर रचना.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

शहर तो बदल गया है ... लोग भी बदल गए हैं ..

बेनामी ने कहा…

Apki kavitayein aur rachnaayein padhi maine... bahut hi aakarshak lagi.... kripya mere blog "aditishukla.blogspot.in" par jakar apne vicharon se mera maargdarshan karein...

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

क्या चित्र बनाया है शब्दों से ..आपकी यह रचना तो मन को भा गयी ..ढेरों सारी बधाई के साथ

Prashant Suhano ने कहा…

यथार्थ के पास है यह कविता.. दिल को छू गयी..
आभार....

Smart Indian ने कहा…

सच, समय के साथ सब कुछ बहुत तेजी से बदल रहा है

मन्टू कुमार ने कहा…

Sarthak Prastuti...

Dr. Vandana Singh ने कहा…

शहरीकरण की एक बेहतरीन प्रस्तुति....

Suresh kumar ने कहा…

Pahle wale insaan bhi kaha rahe ab Sanjay bhai..sachhai ko bayan karti sundar rachna.....

Ravi Rajbhar ने कहा…

sach much badal gaya hai sab kux...

Unknown ने कहा…

YE BADA SHAHR SANJAY JI, AUR HUM GAOU KE LOG... AZINB LAGTA HAIN HAMESHA SE HI...

ACCHI RACHNA..

OM KASHYAP ने कहा…

gurudev parnam . ab to sab hi kuch badal raha hai guru ji . hadso ke sahar mai

JAGDISH BALI ने कहा…

Change is law of nature !

OM KASHYAP ने कहा…

guru ji pls call me

Tamasha-E-Zindagi ने कहा…

बहुत खूब लाजवाब रचना |

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

कुमार गौरव अजीतेन्दु ने कहा…

बहुत भावना से लिखा है आपने। बदलती दुनिया कई बार सोचने पर विवश कर देती है।

कविता रावत ने कहा…

फ्लाईओवर को लेकर बहुत ही सुन्दर चिंतन भरी प्रस्तुति ...

Asha Joglekar ने कहा…

सच में बदल गया है ये छोटासा शहर ।

Parul kanani ने कहा…

shabd-chitra anayas hi ubhar diye aapne...!

Vandana Sharma ने कहा…

Bahut hee acchi abhivayakti...


Thanks for your visit on my blog.
I am yet a novice at Hindi poetry.

Dr. Shorya ने कहा…

बहुत सुंदर, सच कहा अब तो हर जगह ये ही नज़र आते है,

Darshan jangra ने कहा…

सुन्दर रचना.

Darshan jangra ने कहा…

यह वह शहर नहीं रहा अब
जिस शहर में
'' मैं कई वर्षो पहले आया था ''