01 अप्रैल 2021

.......वो आकर्षण :)

 


कॉलेज को छोड़े करीब 

नौ साल बीत गये !
मगर आज उसे जब नौ साल बाद 
देखा तो 
देखता ही रह गया !
वो आकर्षण जिसे देख मैं 
हमेशा उसकी और
खिचा चला जाता था !
आज वो पहले से भी ज्यादा 
खूबसूरत लग रही थी 
पर मुझे विश्वास नहीं 
हो रहा था !
की वो मुझे देखते ही 
पहचान लेगी !
पर आज कई सालो बाद 
उसे देखना 
बेहद आत्मीय और 
आकर्षण लगा 
मेरी आत्मा के सबसे करीब .....!!

-- संजय भास्कर  

15 टिप्‍पणियां:

रेणु ने कहा…

बहुत भावपूर्ण प्रिय संजय | मन जिससे प्रगाढ़ता से जुड़ा हो उसे देखने की आकांक्षा बहुधा भीतर समाई रहती है -- ये फलीभूत हो जाए तो उस एहसास को शब्दों में बयां करना मुश्किल हो जाता है | मन के भावों की सहज अभिव्यक्ति जो सादगी से कही गयी है | हार्दिक शुभकामनाएं|

Jigyasa Singh ने कहा…

मन के किसी कोने में दबे सुंदर और कोमल अहसास,बहुत दिनों बाद साकार दिखें तो निश्चित ही मन रोमांचित हो जाता है,सुंदर शब्द चित्र प्रस्तुत करती नायाब रचना।

विकास नैनवाल 'अंजान' ने कहा…

कुछ आकर्षण कभी कम नहीं होते....

अनीता सैनी ने कहा…

जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (०३-०४-२०२१) को ' खून में है गिरोह हो जाना ' (चर्चा अंक-४०२५) पर भी होगी।

आप भी सादर आमंत्रित है।

--
अनीता सैनी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बीती यादों का सुन्दर चित्रण।

आलोक सिन्हा ने कहा…

बहुत बहुत सुन्दर सराहनीय शब्द चित्र । शुभ कामनाएं ।

Meena Bhardwaj ने कहा…

आत्मीयता से बंधा आकर्षण सदैव स्थायी ही होता है । अति सुन्दर भावाभिव्यक्ति ।

जितेन्द्र माथुर ने कहा…

हां संजय जी, जो जज़्बात आपने उकेरे हैं, उन्हें समझा जा सकता है ।

Virendra Singh ने कहा…

वाकई संजय जी..कॉलेज वाली बात ही कुछ और होती है। सुंदर अभिव्यक्ति!

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

उम्दा अभिव्यक्ति

मन की वीणा ने कहा…

एहसासों की अभिव्यक्ति।
सुंदर सुघड़।

Vinbharti blog.spot.in ने कहा…

बहुत बढियां , एहसासों का आकर्षण सदा ही सुन्दर होता है

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

बेहद सुन्दर .....
शब्दों में भावनाओं को व्यक्त कर पाना असंभव सा है।

Dr Varsha Singh ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत कविता..।

Amit Gaur ने कहा…

आप की पोस्ट बहुत अच्छी है आप अपनी रचना यहाँ भी प्राकाशित कर सकते हैं, व महान रचनाकरो की प्रसिद्ध रचना पढ सकते हैं।