19 अक्तूबर 2018

हिंदी सिनेमा की सदाबहार अदाकारा और खूबसूरती की मल्लिका - रेखा

बॉलीवुड का ऐसा नाम जो आज भी सब के जुबां पर रहता है वो है रेखा सदाबहार अभिनेत्री रेखा हिन्दी फिल्म जगत की शान हैं। उनके चेहरे की चमक आज भी अन्य अभिनेत्रियों की शान को फीका कर देती है। अपने हिस्से आए हर किरदार को दमदार बनाने वाली रेखा के आंचल में कई बड़े पुरस्कार आए। वो राजकीय पुरस्कार पद्मश्री से भी सम्मानित हैं। रहस्यमयी रेखा जैसी खूबसूरती पाना आज भी कई अभिनेत्रियों की हसरत है एक बेहतरीन अदाकारा होने के साथ-साथ एक खूबसूरत इंसान है लेकिन वक्त के साथ उनकी खूबसूरती और भी निखरती जा रही है बॉलीवुड के सदाबाहार और बेहतरीन अदाकारा रेखा ने अपनी करियर की शुरुआत महज 13 साल से की रेखा ने दक्षिण भारतीय फिल्मों से शुरुआत करने के बाद हिंदी सिनेमा में अपनी अदाकारी से मील के कई पत्थर स्थापित किए. 50 से ज्यादा बड़ी हिंदी फिल्मों में काम किया है जिनमें से कई फिल्में ब्लॉकबस्टर साबित हुई हैं बॉलीवुड के सदाबाहार और बेहतरीन अदाकारा रेखा जिनकी आंखों के मस्ताने हजारों तो है ही लेकिन इस हजारों की भीड़ में अकेली रेखा की जिंदगी में बहुत सारी अनकही कहानी है जिसे उनकी आंखों में पढ़ा जा सकता है अभी कुछ दिन पहले ही रेखा जी का जन्मदिन था उनके जन्मदिन पर रेखा की जिंदगी की कुछ बातें जानी है अक्सर बढ़ती उम्र में लोगों की खूबसूरती ढल जाती है लेकिन रेखा के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है वह आज भी अपनी खूबसूरती की वजह से चर्चा में बनी रहती है फिल्म मुकद्दर का सिंकंदर में वे एक बार फिर अमिताभ बच्चन के साथ दिखाई दीं। यह फिल्म उस साल की बड़ी हिट रही और रेखा उस समय की सबसे सफल अभिनेत्रियों में शुमार हो गईं
फिल्म की काफी तारीफ हुई और रेखा को सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेत्री का के तौर पर फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया 1981 में आई उनकी उमराव जान। यह फिल्म उनके करियर की बेस्ट फिल्मों ंमें से एक रही और इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया। इसके बाद भी उनकी कई फिल्में आई जो कि काफी हिट हुईं।  रेखा के कैरियर में उमराव जान एक नया मोड़ साबित हुई, जिसमें रेखा ने अदायगी का जादू बिखेरा। इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतना रेखा की अभिनय क्षमता का प्रमाण था। उमराव जान के बाद रेखा के कैरियर में मंदी जरूर आई, लेकिन निजी तौर पर फिल्म-जगत में उनका जादू अब भी बरकरार है। आज भी रेखा की क्षमता और रहस्य हमेशा दिलचस्पी का सबब बना हुआ है और शायद हमेशा बना रहे। अमिताभ के साथ सफलता और प्रेम के रिश्तों ने रेखा की जिंदगी को नई दिशा दी। अब इस खूबसूरत हसीन अदाकारा के बारे में सही शब्द ही है 'संपूर्ण अभिनेत्री'। रेखा की बहुतेरी ऐसी फिल्में हैं, जहा उन की आखों पर फोकस रहा है। रेखा की आखों में मस्ती भी है और भरपूर मादकता भी। तभी तो मुजफ्फर अली को उमराव जान में शहरयार से रेखा की आखों की खातिर एक पूरी गजल ही कहलवानी पडी, 'इन आखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं'......... बात भी सच ही है !!

- संजय भास्कर 

8 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "साप्ताहिक मुखरित मौन में" शनिवार 20 अक्टूबर 2018 को साझा की गई है......... https://mannkepaankhi.blogspot.com/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Meena Bhardwaj ने कहा…

वाकई मेंं "सम्पूर्ण अभिनेत्री" हैं रेखा। बहुत सुन्दर और सारगर्भित लेख ।

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व 'विजयादशमी' - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति सच में रेखा जी बेहतरीन अभिनेत्री हैं

अमित निश्छल ने कहा…

कितनी बारीकी से प्रस्तुत किया आपने इस महान अदाकारा को, आदरणीय संजय जी। प्रशंसनीय काम... शुभकामनाएँ

Asha Joglekar ने कहा…

बहुत सुंदर, संजय जी। सचमुच रेखाजी के चाहने वालै हजारों हैं।

Prateek ने कहा…

बहुत अच्छा लिखा है। ऐसे ही लिखते रहिए। हिंदी में कुछ रोचक ख़बरें पड़ने के लिए आप Top Fibe पर भी विजिट कर सकते हैं

Viraj verma ने कहा…

बेहतरीन अभिनेत्री संजय जी