22 सितंबर 2018

..... माँ की जलती हथेलियाँ :)

                                                                   ( चित्र गूगल से साभार  )


वर्षो से जलती रही हथेलियाँ
माँ की 
सेंकते- सेंकते रोटियां 
मेरे पहले स्कूल से लेकर आखरी कॉलेज तक  
सब याद है मुझे आज तक 
बड़ी सी नौकरी और मिल गया 
बड़ा सा घर 
जिसे पाने के लिए सारी -२ रात लिखे पन्ने 
अनजानी काली स्याही से 
पर सब कुछ होने पर 
नहीं भूलती
माँ की जलती हथेलियाँ....!!

- संजय भास्कर 




19 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 23 सितम्बर 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Meena Bhardwaj ने कहा…

माँँ का त्याग बेमिसाल है इसीलिये तो ईश्वरसम समझी जाती है माँ . हृदयस्पर्शी सृजन संजय जी .

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन दुर्गा खोटे और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

sweta sinha ने कहा…

माँ तो माँ है..बेहद हृदयस्पर्शी रचना संजय जी।

vibha rani Shrivastava ने कहा…

सुंदर लेखन

Anita Saini ने कहा…

सुन्दर रचना

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

माँ जब रोटियां सेकती है तो उनमें घी चुपड़कर उनमें ऊपर से अपनी जान भी छिड़कती है. बहुत सुन्दर संजय भास्कर जी !

नूपुर ने कहा…

माँ की हथेलियों का जलना
कोई कैसे भूल सकता है ?
इन्हीं हथेलियों ने आशीष दिया
जिसके बल पर हमने यश प्राप्त किया

स्मरण दिलाने के लिए हार्दिक आभार,संजय भास्करजी.

Kusum Kothari ने कहा…

मां की हथेलियाँ सिर्फ रोटियों से ही नही जलती बच्चों पर आने वाली सभी विपदाओं को अपनी हथेलियों में समेट लेती हैं ना मां कैसे भुले उसे....
मर्मस्पर्शी रचना।

Sudha Devrani ने कहा…

माँ की जलती हथेलियां.... बहुत सुन्दर रचना हृदयस्पर्शी भावाभिव्यक्ति..

anuradha chauhan ने कहा…

नहीं भूलती
माँ की जलती हथेलियाँ....
बेहद हृदयस्पर्शी रचना आदरणीय

Digamber Naswa ने कहा…

माँ से पूछ के देखो ... ये फूल हैं उसके लिए ...
अपने बचों के लिए वो अंगारे भी उठा लेती है ... सब कुछ कर जाती है ... क्योंकि माँ है ...
बहुत दिल को छूने वाली पंक्तियाँ ...

Arun Roy ने कहा…

भावपूर्ण। माँ को कितनी ही तरह से याद किया जाता है। जैसे भी याद करो दिल को छू जाती है ।

dr.zafar ने कहा…

वाह बहुत ही सुंदर।
माँ जैसा कोई नही दुनिया में।

Anita ने कहा…

माँ को समर्पित सुंदर भावपूर्ण रचना..

Rohitas ghorela ने कहा…

मां वो नहीं है जो फूल बिछाए हमारी राहों में
मां वो है जो बुहार के ले जाती है कांटे अपने ही दामन में और हमे सहज कर दे ।
उम्दा
चित्र भी गजब।

ankit choudhary ने कहा…

वाह! बहुत ही सुंदर...

Sarita Sail ने कहा…

बहुत ही खुबसुरत रचना

Unknown ने कहा…

Good poem