12 मार्च 2010

तेरे लायक नहीं,जानता हूँ

 तेरे लायक नहीं, जानता हूँ

जो कभी नही हुआ
वो आज हो गया
जो मेरे पास था
वो दिल खो गया
तुम जानते हो या न नही, पता नहीं
पर जो खोया है मैंने
वो है तेरे पास कहीं
मिल जाये तो लौटा देना
तेरे लायक नहीं वो
 
जानता  हूँ
ले लूँगा, समझाकर रख लूँगा पास अपने ही 
जानता 


08 मार्च 2010

ख्वाहिशे..........



ख्वाहिशे....

ख़वाहिशो के मोती
इकट्ठा कर
एक ख्वाबो का घर
बना तो दिया था..
मासूम दिल नहीं जानता था
इसकी तासीर रेत के
घरोंदे की तरह है..
जो कुंठाओ के थपेडो से
ढह जायेगा..!
मैं फिर भी
उस मकडी की तरह
अथक प्रयास करती हु
की शायद कभी
इस खवाहिशो के घर को
यथार्थ की धरती
पर टिका पाऊ..
पर ना जाने क्या है..
या तो मेरी चाहत में कमी है
या मेरे सब्र का इम्तिहान...
की हर बार
मायुसिया सर उठा
मुझे और निराशाओ के
गलियारों में खीचती चली जाती है..!!
क्या ये मुनासिब नहीं..,
या फिर मैं झूठी
आशाओ में जीती हु..??
की ये खावाहिशो का घर
यथार्थ का सामना
कर पायेगा..
क्या सच में कभी
ये अपना वजूद
कायम कर पायेगा???

Anamika  ji, aapne bahut khoobsoorat likha
mujhe itna pasand aaya ki apne blog par bhi post kar diya.



 

06 मार्च 2010

हालात बदल जाते है '


वक्त के साथ हालात बदल जाते है '
अपनों तक के ख्यालात  बदल  जाते है|
जब बुरा वक्त आता है ' संजय '
खुद अपने ही जज्बात बदल जाते है'
अपनों तक के ख्यालात बदल जाते है |

03 मार्च 2010

मुझे फिर भी तुम्हारा इंतजार रहता है |



दूर जा चुके हो बहुत तुम हमसे ,
न जाने क्यों ये अहसास रहता है ,
हकीकत मे नहीं हो तुम यहाँ पर ,
पर सपनो में तेरा साया मेरे साथ रहता है ,
बहुत कोशिश की तुम्हे भूल जाने की ,
पर फिर  भी तेरे चेहरा सामने रहता है ,

 न ख़त आया है तुम्हारा ,
कहीं भूल तो नहीं गए ये अहसास रहता है ,
लोग कहते के तुम नहीं आओगे ,
न जाने क्यों मुझे फिर भी तुम्हारा इंतजार रहता है |

01 मार्च 2010

1411 बाघ बचाओ आन्दोलन

 

कैसी बिडंबना है कि पहले लोग बाघों से डरा करते थे और जंगलों में जाने से बचते थे कि कहीं से कोई बाघ न आ जाए॥! और अब आलम यह है कि लोग बन्दूक इत्यादि हथियार लेकर जंगलों का रुख करते हैं..। वो भी बाघों का शिकार करने! वही डर जो पहले इंसानों में बाघों के प्रति हुआ करता था, अब बाघों के जेहन में बैठ गया है। उन्हें लगता है कि क्या जाने कहीं से कोई इंसान आ जाए और अपनी बन्दूक का निशाना बना ले।
एक ज़माना था जब लोग बाघ से बचते थे, और आज का ज़माना है जब लोग बाघ को बचाते हैं।
देश के बाघ संरक्षित क्षेत्रों में इस वर्ष अब तक पांच बाघों की प्राकृतिक या अन्य कारणों के चलते मौत हुई है।
पर्यावरण और वन राज्य मंत्री जयराम रमेश ने लोकसभा में बताया है कि वर्ष 2008 में देश भर में अत्याधुनिक प्रणाली का इस्तेमाल कर हुई बाघों की अनुमानित गणना के मुताबिक भारत में।,411 बाघ [मध्य संख्या] हैं। इस बारे में न्यूनतम संख्या।,165 और अधिकतम संख्या।,657 है।  इसी तरह गणना में है।
  देश के विभिन्न बाघ संरक्षित क्षेत्रों में इस वर्ष कुल पांच बाघों की मौत प्राकृतिक या किन्हीं अन्य कारणों के चलते हुई है। इनमें दो बाघों की मौत उत्तराखंड के कारबेट में, दो की मौत असम के काजीरंगा में और एक मौत मध्य प्रदेश के पेंच राष्ट्रीय उद्यान में हुई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से अब तक काजीरंगा बाघ संरक्षित क्षेत्र में 16, कारबेट में 15 और मध्यप्रदेश के कान्हा में आठ बाघों की मौत हो चुकी है।
बाघ बचाओ,  बाघ बचाओ,  बाघ बचाओ,  बाघ बचाओ ..........................