05 मार्च 2020

.... ज़िंदगी का तजुर्बा :)


घर के बड़े - बूढ़े 
जिन्हे नहीं चाहिए ज्यादा कुछ, 
चाहिए तो बस 
थोड़ी इज्जत और सम्मान, 
बदले में ये आपको दे 
सकते है , 
ज़िंदगी जीने का वो तजुर्बा 
जो शायद कही किसी 
किताब में 
लिखा ही नहीं 
ऐसा बिलकुल भी नहीं हैं 
ये कुछ नहीं जानते 
ये सब जानते है , 
नए जमाने की बातें  
पर ये 
उन पेड़ो की तरह
है  
जो हर मौसम और समय 
के हिसाब से 
ढलते रहे है   
तभी तो वे किसी भी परेशानी में , 
जल्दी कराहते नहीं
नई पीढ़ी की तरह 

- संजय भास्कर 

22 टिप्‍पणियां:

Anita saini ने कहा…

बेहतरीन सृजन... समय की समझाईश का अथाह भंडार होता है इनके पास

~Sudha Singh vyaghr ~ ने कहा…

तभी तो वे किसी भी परेशानी में , 

जल्दी कराहते नहीं

नई पीढ़ी की तरह 

बिलकुल सही कहा है संजय जी अनुभवों का खजाना होते हैं बड़े बुजुर्ग.मान सम्मान के अलावा ये कुछ भी तो नहीं चाहते हमसे.
बढ़िया 👌

Anita Laguri "Anu" ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार ( 06 - 03-2020) को "मिट्टी सी निरीह" (चर्चा अंक - 3632) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
*****
अनीता लागुरी"अनु"

Anuradha chauhan ने कहा…

बिल्कुल सही कहा आपने, बहुत सुंदर और सार्थक रचना 👌

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

सार्थक और सोद्देश्य लेखन।

Manav Mehta 'मन' ने कहा…

वाक़ई, बुज़ुर्गों के पास कुछ देर बैठ के देखो... ज्ञान ही ज्ञान मिलेगा...

Kavita Rawat ने कहा…

ज्ञान कोष होते हैं बुजुर्ग
बहुत सुन्दर रचना

मन की वीणा ने कहा…

सही सटीक सार्थक कथन ।
सुंदर सृजन।

Meena Bhardwaj ने कहा…

सकारात्मक भाव लिए उद्देश्यपूर्ण सृजन । सम्मान चाहते हैं वे हम से लेकिन बदले में सनेहाशीष और अनुभव झोली भर देते हैं । बहुत सुन्दर सृजन ।

Anita ने कहा…

सही कहा है आपने, जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान होता है वहां कोई दर्द ज्यादा देर तक टिक नहीं सकता

Sudha devrani ने कहा…

तभी तो वे किसी भी परेशानी में ,
जल्दी कराहते नहीं
नई पीढ़ी की तरह
सटीक सार्थक एवं लाजवाब कृति
वाह!!!

VenuS "ज़ोया" ने कहा…

उन पेड़ो की तरह
है
जो हर मौसम और समय
के हिसाब से
ढलते रहे है


bahut gehari aah liye hai ye rchnaa...aajkal priwaaon ka haal dekh ke dukh hi hota he ..

hmm
bdhaayi rchna ke liye

Asha Lata Saxena ने कहा…

सुप्रभात
संजय बहुत ही शानदार रचना जय मन को छू गई |

Dr Raj Kumar Kochar ने कहा…

मैंने अभी आपका ब्लॉग पढ़ा है, यह बहुत ही ज्ञानवर्धक और मददगार है।

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Jyoti Dehliwal ने कहा…

संजय भाई, हमारे बुजुर्गों के पास अनुभव का भंडार हैं। आवश्यकता इस बात की हैं कि युवा पीढ़ी उसका सही उपयोग करे।

rinkiraut13 ने कहा…

बहुत अच्छी रचना है। आपका लेखन शैली बहुत उन्दा है।

Kamini Sinha ने कहा…

तभी तो वे किसी भी परेशानी में ,
जल्दी कराहते नहीं
नई पीढ़ी की तरह
बिलकुल सत्य कहा आपने ,बुजुर्ग वो बरगद की छाँव हैं जिसके करीब बैठने से सिर्फ लाभ ही मिलेगा।
बेहतरीन सृजन ,संजय जी ,सादर

Dr. Raj Kumar Kochar ने कहा…

Bahut khoob
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Dr. Raj Kumar Kochar ने कहा…

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दिगंबर नासवा ने कहा…

एक बरगद होते हैं घर के बुजुर्ग ... जिनकी छाया में साँस लेते हैं हम ... उन्हें बस प्रेम और इज़्ज़त चाहिए ... सब कुछ दे देते हैं ये ...
शूट भावपूर्ण संजय जी ...

Sharad Gupta ने कहा…

आपकी पोस्ट दिल को छूने वाली है।

Rohitas ghorela ने कहा…

बुजुर्गों के पास अनुभव है
सहन करने का भी
और उभरने का भी।
और ये यही अनुभव साझा भी कर सकते हैं बदले में सम्मान चाहिए होता है।
बहुत खूबसूरत रचना।
नई रचना- सर्वोपरि?