27 दिसंबर 2013

............. वह सफर ही क्या -- संजय भास्कर

( चित्र - गूगल से साभार )
वह सफर ही क्या
जिसमे उत्साह न हो
वह सफर ही क्या
जिसमे शामिल कुछ दिल
दिलचस्प यादें न हो
आगे बढ़ चल देने
और मंजिल तक पहुँच जाने को
सफ़र नहीं कहते !
सफ़र में अक्सर
जरूरी नहीं एक जगह
से दूसरी जगह का हो
कई बार सफ़र होता है
मन से मन का
प्रेम से प्रेमी का
और न जाने कही का और
कैसा भी हो सकता है !
सफ़र में जो हमारा साथ देते है
वो होते है , कुछ मोड़
कुछ रास्ते
कुछ सुस्त कदम
और लम्बी राहें
ये सब मिलकर निकल पड़ते है
एक तन्हा सफ़र पर..............!!!!


@ संजय भास्कर

38 टिप्‍पणियां:

Anita ने कहा…

मन से मन का सफर ही तो जीवन को रंग और उत्सव से भर देता है..

मेरा मन पंछी सा ने कहा…

सफ़र कि शुरुवात ही तनहा होती है जिस सफ़र में उत्साह ना हो मंजिल पाने के बाद भी सफ़र नीरस सा लगता है। मन के भाव कि सुन्दरतम अभिव्यक्ति...
:-)

राज चौहान ने कहा…

भास्कर जी....सुंदर प्रस्तुति।।

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : रंग और हमारी मानसिकता

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (28-12-2013) "जिन पे असर नहीं होता" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1475 पर होगी.
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
सादर...!

Manjusha negi ने कहा…

वाह...बहुत खूब बयान किया है तनहा सफ़र ..संजय जी..

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुंदर !

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति।।भास्कर

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

अपने मन की भावों को बड़ी ख़ूबसूरती से प्रस्तुति किया, सुंदर रचना...!
Recent post -: सूनापन कितना खलता है.

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन मिर्ज़ा गालिब की २१६ वीं जयंती पर विशेष ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Sriram ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति।

Rewa Tibrewal ने कहा…

wah bahut sundar prastuti.....sach mey jeevan kay is safar ko janam aur mrityu kay beech....bharpur jeena hai...

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

मन की भावनाओं का बहुत सुन्दर सफर !
नई पोस्ट मेरे सपनो के रामराज्य (भाग तीन -अन्तिम भाग)
नई पोस्ट ईशु का जन्म !

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

क्या बात वाह! अति सुन्दर

तीन संजीदा एहसास

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना

Kavita Rawat ने कहा…

अच्छा साथ मिल जाता है तो कोई भी राह बहुत आसान हो जाती हैं ...
बहुत बढ़िया

ब्लॉग - चिट्ठा ने कहा…

आपकी इस ब्लॉग-प्रस्तुति को हिंदी ब्लॉगजगत की सर्वश्रेष्ठ कड़ियाँ (27 दिसंबर, 2013) में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,,सादर …. आभार।।

कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

दिगंबर नासवा ने कहा…

इतना सब कुछ होते हुए तन्हाई कहाँ रह पाती है सफर में ... खुद ही जब खुद का साथ दे तो सफर आसान हो जाता है ...
नव वर्ष की मंगल कामनाएं संजय जी ...

Dr ajay yadav ने कहा…

bahut hi sundar rachna brother,nice!
happy new year 2014

Bharat Bhushan ने कहा…

सुंदर कविता संजय जी.

PBCHATURVEDI प्रसन्नवदन चतुर्वेदी ने कहा…

वाह..वाह...बहुत बढ़िया प्रस्तुति...आप को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

नयी पोस्ट@एक प्यार भरा नग़मा:-तुमसे कोई गिला नहीं है

Unknown ने कहा…

बहुत सुन्दर लिखा है संजय जी...

विभा रानी श्रीवास्तव 'दंतमुक्ता' ने कहा…

नव वर्ष आपके जीवन में उजास ही उजास लेकर आये ...

amit kumar srivastava ने कहा…

नववर्ष की शुभकामनायें ।

Rakesh Kumar ने कहा…

सबसे उत्कृष्ट सफर तो दुःख से आनन्द और आनन्द से परमानन्द की ओर का ही होता है.

सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार संजय भाई.
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

सुन्दर रचना...

Swapnil Shukla ने कहा…

वाह ! बहुत बढ़िया प्रस्तुति . आभार . नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं .

कृ्प्या विसिट करें : http://swapniljewels.blogspot.in/2014/01/blog-post_5.html

http://swapniljewels.blogspot.in/2013/12/blog-post.html

निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति......

Rishabh Shukla ने कहा…

Extremely well written and well presented .. kudos to u

plz visit :
http://swapnilsaundaryaezine.blogspot.in/2014/01/vol-01-issue-04-jan-feb-2014.html

Jass warwal ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार संजय भाई

Suman ने कहा…

सफ़र अपने अपने लक्ष्य पर
निर्भर करता है !

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

yahi to safar ki jaan hai ...veri nice ...

Himkar Shyam ने कहा…

सुंदर, भावपूर्ण अभिव्यक्ति ...गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ...
http://himkarshyam.blogspot.in

prritiy----sneh ने कहा…

कई बार सफ़र होता है
मन से मन का
प्रेम से प्रेमी का

man bhaya rachna padhna.


shubhkamnayen

राज चौहान ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार संजय भाई

Unknown ने कहा…

सफर तो शफर होता हैं मंजिल हो न हो----

Unknown ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार संजय भाई

Meena Bhardwaj ने कहा…

बहुत सुन्दर विश्लेषण .....,