25 मई 2011

..........बदलते हालात........संजय भास्कर


कपडे हो गए छोटे 
     शर्म कहाँ रह गई आज !
गर्भ में कर देते है भ्रूण हत्या 
     ममता कहाँ रह गई आज  !
अनाज हो गया मिलावटी 
     तो स्वाद कहा रह गया आज !
फूल हो गए प्लास्टिक के 
      खुशबू कहाँ रह गई आज !
छात्रों के हाथ में हो गए मोबाइल 
      शिक्षा कहाँ रह गई आज !
इंसान हो गया लालची धन का 
      दया भावना कहाँ रह गई आज !
युवा वर्ग हो रहा है अशलीलता का शिकार 
     देश भक्ति भक्ति कहाँ गई आज  !

-- संजय भास्कर 

 

132 टिप्‍पणियां:

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

सत्य को कहती बेहतरीन रचना..आज यही तो हो रहा है...लाजवाब।

Neelam ने कहा…

कपडे हो गए छोटे
शर्म कहाँ रह गई आज !
गर्भ में कर देते है भ्रूण हत्या
ममता कहाँ रह गई आज !

इंसान हो गया लालची धन का
दया भावना कहाँ रह गई आज !
Saarthak rachna..sach ko byaan karti hue. behadd achhi rachna hai. badhai..God bless u.

(कुंदन) ने कहा…

सही कहा बिलकुल आपने एक एक शब्द सही

Bharat Bhushan ने कहा…

हम आज में जो ढूँढते हैं कई बार वह वास्तव में पुराना हो चुका होता है. लेकिन आपने कुछ शाश्वत मानव-मूल्यों की बात की है. बहुत सुंदर लगा.

केवल राम ने कहा…

वर्तमान हालातों को बखूबी अभिव्यक्त किया है आपने ..!

www.navincchaturvedi.blogspot.com ने कहा…

वर्तमान हालातों पर आप का चिंतन जायज़ है

vandan gupta ने कहा…

आज के हालात का सटीक चित्रण किया है।

Shalini kaushik ने कहा…

bahut sahi kaha sanjay ji aaj ke to yahi halat hain.

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

यथार्थ का जीवंत चित्रण !
सुन्दर प्रस्तुति !

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

सत्य को कहती बेहतरीन रचना

Unknown ने कहा…

चीजें तो सब हैं पर उनके मायने बदल गए हैं.

Rajiv ने कहा…

सच को समझने और कहने का आपका अंदाज निराला है.बेहतरीन रचना.

संध्या शर्मा ने कहा…

बिलकुल सही लिखा है आपने सब कुछ जैसे ख़त्म सा हो रहा है...
ना जाने ये सब कहाँ जाकर थमेगा या थमेगा ही नहीं.........

Kailash Sharma ने कहा…

आज के हालात की बहुत सार्थक प्रस्तुति..

kavita verma ने कहा…

aaj ke halat...aur unke dushparinam..sunder rachna..

Unknown ने कहा…

कपडे हो गए छोटे
शर्म कहाँ रह गई आज !
गर्भ में कर देते है भ्रूण हत्या
ममता कहाँ रह गई आज !
सत्य को कहती बेहतरीन रचना....

Unknown ने कहा…

पता मेरा बता देना, जो आज भी यह सब पूछे तो, शानदार

Shikha Kaushik ने कहा…

yatharth ki bhavmayi prastuti .badhai

Rakesh Kumar ने कहा…

सुन्दर सार्थक प्रस्तुति.
सोचने का स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है.
आप तो 'भास्कर' है, आपसे ही रोशनी की आशा है.

सदा ने कहा…

बिल्‍कुल सच कहा है आपने इस अभिव्‍यक्ति में ...
सार्थक प्रस्‍तुति ।

amrendra "amar" ने कहा…

सटीक चित्रण किया है

SAJAN.AAWARA ने कहा…

BILKUL SAHI KAHA HAI SIS AAPNE. SAB CHIJEN LUPT HOTI JA RAHI HAIN.
JAI HIND JAI BHARAT

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सटीक !!

Anita ने कहा…

सही कहा है आज सब कुछ बदल रहा है, लेकिन हर रात के बाद दिन आता है, भूल का अहसास होते ही सुधार की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है आपकी कविता भी उसी का पहला कदम है!

दिगंबर नासवा ने कहा…

सच कहा है संजय जी ... सब कुछ बनावटी हो गया है आज ... आज की दर्शाती लाजवाब रचना ...

दिगंबर नासवा ने कहा…

हालात का सटीक चित्रण ....

अनाम ने कहा…

ekdum true

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

यही चित्र है,
हाल विचित्र है।

रचना दीक्षित ने कहा…

आज के हालात का सही चित्रण.

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

छात्रों के हाथ में हो गए मोबाइल
शिक्षा कहाँ रह गई आज !

iss baat se sahmat nahi hoon..mobile sikshha ko apnane se rokti hai...main nahi manta...!

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

वर्तमान हालात और आम इंसान की सोच को इस रचना में आपने बखूबी पिरोया है और बहुत ही उम्दा प्रस्तुती आपकी

संजय भास्करजी आभार

Unknown ने कहा…

सच कहती रचना...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सचमुच हालात बहुत बदल गए हैं ।
बढ़िया रचना ।
अनाज हो गया मिलावटी
तो सेहत कहाँ रह गई आज ।
शायद यह ज्यादा फिट बैठे ।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Haqiqat ki Tasweer hai yh rachna

कपडे हो गए छोटे
शर्म कहाँ रह गई आज !
गर्भ में कर देते है भ्रूण हत्या
ममता कहाँ रह गई आज !

Udan Tashtari ने कहा…

आज को आईना दिखाती रचना.

Rahul Singh ने कहा…

मोबाइल और शिक्षा पर असहमत. इसी तरह इंसान लालची कब न था और दया भावना आज भी है.

Jyoti Mishra ने कहा…

these lines are exact mirror image of today's world, but i guess still there are some good people(less in no)out in world, and its their impact that we are still called Homo Sapiens i.e wise man !!

आशुतोष की कलम ने कहा…

सत्य रचना ..सुन्दर सार्थक ...

kshama ने कहा…

कपडे हो गए छोटे
शर्म कहाँ रह गई आज !
गर्भ में कर देते है भ्रूण हत्या
ममता कहाँ रह गई आज !
अनाज हो गया मिलावटी
तो स्वाद कहा रह गया आज !
Bilkul sahee kahte ho!

SANDEEP PANWAR ने कहा…

कविता छोटी जरुर है, पर सब कुछ समेट बैठी है,

Kunwar Kusumesh ने कहा…

सही सही सही कहा आपने.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

यथार्थ को कहती अच्छी रचना

रश्मि प्रभा... ने कहा…

sab gum ho chale ....her taraf prashn hai , jane kab sabkuch lautker aaye

Patali-The-Village ने कहा…

आज के हालात का सटीक चित्रण किया है।

एस एम् मासूम ने कहा…

बहुत ही सटीक बात कही है .
इंसान हो गया लालची धन का
दया भावना कहाँ रह गई आज !
.
बहुत खूब

mridula pradhan ने कहा…

wakayee, bahut kam cheezen hi rah gayee aaz.

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

भास्कर जी ,आपकी भावाभिव्यक्ति इतनी सहज और प्राकृतिक है कि लगता है-पर्वत श्रृंखला से अनायास कोई निर्झर फूट गया हो.इस अनायास को अनायास ही रहने दीजिएगा,सायास कभी मत बनाइएगा. किसी शायर ने कहा है-सादगी भी तो क़यामत की अदा होती है.

Sushil Bakliwal ने कहा…

जीवंत व ज्वलंत चित्रण... आभार सहित.

Vivek Jain ने कहा…

बहुत ही बढ़िया एवं सार्थक रचना
- विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Anjana Dayal de Prewitt (Gudia) ने कहा…

baut gehen sawaal uthaae hain aaj aapne... har sawaal par socha jaae to ek kitaab likhi jaa sakti hai aur aapne ek kavita mein keh diya...

Minoo Bhagia ने कहा…

waah sanjay

Urmi ने कहा…

छात्रों के हाथ में हो गए मोबाइल
शिक्षा कहाँ रह गई आज !
इंसान हो गया लालची धन का
दया भावना कहाँ रह गई आज !
बिल्कुल सही कहा है आपने ! सच्चाई को आपने बड़े सुन्दरता से प्रस्तुत किया है! आपकी लेखनी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है! अद्भुत रचना! प्रशंग्सनीय प्रस्तुती! बहुत बहुत बधाई!

Rahul ने कहा…

Sach kah rahe hai aap... badalta samay sab badal deta hai

मीनाक्षी ने कहा…

बदलते युग का नकारात्मक दृश्य तो देख लिया..... आपकी कविता में उस सकारात्म्कता की प्रतीक्षा है जो आज भी कई जगह दिखाई देती है...

Surendra shukla" Bhramar"5 ने कहा…

संजय जी बहुत ही सार्थक रचना सुन्दर सन्देश निम्न बहुत अच्छा लगा

कपडे हो गए छोटे
शर्म कहाँ रह गई आज !
गर्भ में कर देते है भ्रूण हत्या
ममता कहाँ रह गई आज !
शुक्ल भ्रमर ५

Unknown ने कहा…

सौ फीसदी सही बात......बिन लाग लपेट के

Asha Lata Saxena ने कहा…

बहुत सही लिखा है आज कल हालात होते जा रहे
बद से बदतर |
अच्छी रचना
बधाई
आशा

दिलबागसिंह विर्क ने कहा…

steek varnn

पी.एस .भाकुनी ने कहा…

संजय जी ! बिलकुल सही कहा आपने ! कुछ भी शेष नहीं बचा है .सब कुछ आधुनिकता की भेंट चड़ चुका है ,
आभार...........................

mark rai ने कहा…

दया भावना कहाँ रह गई आज !
युवा वर्ग हो रहा है अशलीलता का शिकार ....

बहुत ही बढ़िया........

रेखा ने कहा…

अभी भी बहुत कुछ शेष है...

CS Devendra K Sharma "Man without Brain" ने कहा…

छात्रों के हाथ में हो गए मोबाइल
शिक्षा कहाँ रह गई आज !

sanjay ji ho sake to thoda bacho pe raham karo
aur sabse pahle apna mobile surrender karo...!!!

naresh singh ने कहा…

कविता आज के समाज की सच्चाई को बयाँ करती है |

संजय भास्‍कर ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
संजय भास्‍कर ने कहा…

@ सत्यम जी..
....आज यही तो हो रहा है.
@ नीलम जी..
.....बहुत बहुत आभार
@ कुंदन जी..
...आज का सत्य है ये
@ भूषण जी
.....बहुत बहुत आभार
@ केवल राम जी..
.....वर्तमान हालात है जी
@ नविन चतुर्वेदी जी..
.....बहुत बहुत आभार
@ वंदना जी
.....बहुत बहुत आभार
आपने ब्लॉग पर आकार जो प्रोत्साहन दिया है उसके लिए आभारी हूं

संजय भास्‍कर ने कहा…

@ शालिनी कौशिक जी..
@ ज्ञान चन्द जी..
@ संजय चौरसिया जी..
@ ऍम सिंह जी..
@ राजीव जी..
@ संध्या शर्मा जी..
@ कैलाश शर्मा जी..
.....आप सभी का बहुत बहुत आभार
आपने ब्लॉग पर आकार जो प्रोत्साहन दिया है उसके लिए आभारी हूं

मदन शर्मा ने कहा…

संजय जी नमस्ते !
हाँ आपकी बातें बिलकुल ठीक हैं !
आज जैसे जैसे आधुनिकता आ रही है वैसे वैसे लोगों का ईमान गिरता जा रहा है !
हे राम चन्द्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आयेगा हंस चुगेगा दाना तिनका कौवा मोती खायेगा

मदन शर्मा ने कहा…

संजय जी नमस्ते !
हाँ आपकी बातें बिलकुल ठीक हैं !
आज जैसे जैसे आधुनिकता आ रही है वैसे वैसे लोगों का ईमान गिरता जा रहा है !
हे राम चन्द्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आयेगा हंस चुगेगा दाना तिनका कौवा मोती खायेगा

मदन शर्मा ने कहा…

संजय जी नमस्ते !
हाँ आपकी बातें बिलकुल ठीक हैं !
आज जैसे जैसे आधुनिकता आ रही है वैसे वैसे लोगों का ईमान गिरता जा रहा है !
हे राम चन्द्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आयेगा हंस चुगेगा दाना तिनका कौवा मोती खायेगा

BrijmohanShrivastava ने कहा…

बहुत उत्तम रचना

Sadhana Vaid ने कहा…

कडवे यथार्थ को बयान करती एक वास्तविक रचना ! बहुत बहुत बधाई !

Rewa Tibrewal ने कहा…

sach aur keval sach ko ujagar karti behtarin rachna..........

Suman ने कहा…

sach me jivan bahut badal gaya hai aaj .........

राज भाटिय़ा ने कहा…

आज का सत्य हे आप की इस सुंदर रचना मे, धन्यवाद

पंकज मिश्रा ने कहा…

सच ही लिख रहे हैं आप। आधुनिकता के नाम पर यह सब क्या हो रहा है। साधारण आदमी की समझ से तो परे ही है। इसे समझ पाना बहुत गूढ़ है विद्वानों की बात वैसे अलग है। शानदार रहा

मैं इस ब्लॉग को फालो कर रहा हूं। अगर आप चाहें तो मेरा ब्लॉग फालो कर सकते हैं।

Unknown ने कहा…

कडवे यथार्थ को बयान करती मर्मस्पर्शी रचना|

Coral ने कहा…

सब कुछ आधुनिकता के नाम पर....
बहुत सुन्दर रचना

Khare A ने कहा…

very true !
sundar

pragya ने कहा…

दुनिया को एक दिन खत्म होना है न, बस उसी तरफ बढ़ रहे हैं हम...

महेन्‍द्र वर्मा ने कहा…

यथार्थपरक कविता।
सच्चाई इस रचना में मुखर हो गई है।

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून ने कहा…

समय अनवरत घूमने वाला पहिया है...

balram ने कहा…

Sach hi to likha

ANJAAN ने कहा…

आज के हालात का सटीक चित्रण किया है।.....संजय जी

ANJAAN ने कहा…

गर्भ में कर देते है भ्रूण हत्या
ममता कहाँ रह गई आज !
..........बहुत सही लिखा है आज कल हालात होते जा रहे

Minakshi Pant ने कहा…

aajke halat ko darshati sundar rachna

Apanatva ने कहा…

aaj ke saty ko ujagar kartee sateek rachana.

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

हकीकत बयां करती रचना..... बहुत बढ़िया

Suman Anuragi ने कहा…

its true....

Randhir Singh Suman ने कहा…

nice

Unknown ने कहा…

बिलकुल सही लिखा है

दीपक कुमार मिश्र ने कहा…

वैसे हाथ में मोबाइल होना ये गलत बात नहीं है लेकिन उसका दुरूपयोग होना ये गलत बात है
सच्चाई को अवगत करती हुई बहुत ही खूबसूरत रचना

Maheshwari kaneri ने कहा…

आज के हालात पर बहुत सुन्दर चित्रण किया है।….. धन्यवाद

virendra sharma ने कहा…

बेहतरीन संजय जी ,
संजय भास्कर ,बन तू दैनिक भास्कर .

Sunil Kumar ने कहा…

वर्तमान हालातों को बखूबी अभिव्यक्त किया है,बधाई ...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

छोटी छोटी पंक्तियों में सत्य बात...

Roshani ने कहा…

बेहतरीन...

Unknown ने कहा…

आज ये तो हो रहा है पर कुछ अच्चा भी हो रहा है तभी समाज़ की गाडी चल रही है । समाज की कुप्रवृत्तियों को उठाती हुई सार्थक रचना ।

Unknown ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत लिखा है आपने !
मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है : Blind Devotion

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

सत्य वचन संजय जी ....हम अपनी सभ्यता और संस्कृति से विमुख होते जा रहे हैं

Mridula Harshvardhan ने कहा…

Aapki to baat hi nirali hai Sanjay ji
jab kehte hain, sochne pe majboor kar dete hain

A very thoughtful presentation

Kunwar Kusumesh ने कहा…

लगातार 19 वीं बार टिप्पणियों का शतक बनाकर आपने इतिहास कायम किया है.आपको तो पुरस्कार मिलना चाहिए,संजय जी.कमाल है कमाल.वाह .

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

वाह वाह कमाल की कविता है।
वर्तमान की झांकी ही प्रस्तूत कर दी।

rashmi ravija ने कहा…

हालात का सही चित्रण.

समयचक्र ने कहा…

सटीक बेहतरीन भाव लिए रचना... संजय जी ...बधाई

विष्णु बैरागी ने कहा…

बिलकुल ठीक कहा आपने।

Urmi ने कहा…

आपकी टिप्पणी मिलने पर बेहद ख़ुशी हुई! धन्यवाद!

S P Singh ने कहा…

सुन्दर और बेहतरीन कविता.

S P Singh ने कहा…

आप भी सादर आमंत्रित हैं
एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति का परिचय
ये मेरी पहली पोस्ट है
उम्मीद है पसंद आयेंगी

musafir ने कहा…

टिप्पणियों के शतक के लिये शुभ कामनायें.
कविता बहुत खूबसूरत है.

Richa P Madhwani ने कहा…

http://shayaridays.blogspot.com

Dr Varsha Singh ने कहा…

बेहतरीन कविता के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें ।

ज्योति सिंह ने कहा…

bahut sahi likha hai ,rachna sundar hai .

Manav Mehta 'मन' ने कहा…

sach ko darshati rachna....

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत बढिया

अनाम ने कहा…

Sanjay ji......Vaah....kya baat hai.

Bahut achha likha hai. Apko Bdhaai.

babanpandey ने कहा…

सब कुछ उल्टा हो गया है संजय भाई ..//

Richa P Madhwani ने कहा…

hum bhi apna lakhshaya pura karna chahte hain kya aap sabhi humare blog par comment nhi karenge :)

पूनम श्रीवास्तव ने कहा…

sanjay ji
aaj to aapki rachna padh kar dil se ek hi bat nikli--WAH
kin panktiyon ki tarrif karun ,har pankti hi sachchaai ka aaina dikh rahi hain .
bhaut hi shandar v aaj ki samyikta par karari chot ,
bahut hi chitran
hardik dhanyvaad v
badhai
poonam

ZEAL ने कहा…

सुन्दर सार्थक प्रस्तुति.

Akshitaa (Pakhi) ने कहा…

आपने तो सच्चाई ही कह दी...बधाई.
___________________

'पाखी की दुनिया ' में आपका स्वागत है !!

Urmi ने कहा…

आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया संजय जी!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

सत्य वचन ! सुन्दर रचना !

M VERMA ने कहा…

सामयिक और सत्य

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

यही सत्य है..

priyankaabhilaashi ने कहा…

आज की विषम परिस्तिथि और संकीर्ण मानसिकता पर सशक्त प्रहार..!!!


बहुत सुंदर..!!

http://anusamvedna.blogspot.com ने कहा…

शर्म कहाँ रह गई आज !.....बदलते परिवेश पर करारी चोट की है आप ने ....बहुत खूब

amrendra "amar" ने कहा…

सुन्दर रचना

ANJAAN ने कहा…

बिल्‍कुल सच कहा है आपने इस अभिव्‍यक्ति में ...

ANJAAN ने कहा…

सच्चाई को बखूबी अभिव्यक्त किया है आपने...

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

कपडे हो गए छोटे
शर्म कहाँ रह गई आज !
गर्भ में कर देते है भ्रूण हत्या
ममता कहाँ रह गई आज !

Saarthak rachna..sach ko byaan karti hue. behadd achhi rachna hai. badhai..

Rakesh Kumar ने कहा…

आज स्थिति बहुत बिगड गई है,जो की चिंता का विषय है.आपकी रचना कड़वे यथार्थ का वास्तविक चित्र प्रस्तुत कर रही है.

Manish Kumar Khedawat ने कहा…

जमाने की सच्चाई को अल्फ़ाज़ों में बहुत खूब पिरोया है |
सुंदर अभिव्यक्ति ||