25 मार्च 2010

वादा करो छोडोगी नहीं तुम मेरा साथ.......महफूज़ अली जी की कलम से


तन्हाई में जब मैं अकेला होता हूँ,
तुम पास आकर दबे पाँव चूम कर मेरे गालों को, 
मुझे चौंका देती हो, मैं ठगा सा, तुम्हें निहारता हूँ, 
तुम्हारी बाहों में, मदहोश हो कर खो जाता हूँ. 
सोच रहा हूँ..... कि अब की बार तुम आओगी, 
तो नापूंगा तुम्हारे प्यार की गहराई को.... आखिर कहाँ खो जाता है
मेरा सारा दुःख और गुस्सा ? पाकर साथ तुम्हारा, 
भूल जाता हूँ मैं अपना सारा दर्द देख कर तुम्हारी मुस्कान और बदमाशियां.... मैं जी उठता हूँ, जब तुम, 
लेकर मेरा हाथ अपने हाथों में,
कहती हो....... मेरे बहुत करीब आकर कि रहेंगे हम साथ हरदम...हमेशा....




महफूज़ भाई तो गायब है  चलो हम ही उनकी एक पुरानी रचना  सभी ब्लोगर मित्रो  को पढवाते है 

महफूज़ अली जी की कलम से ये पंक्तिया आप तक 
पहुंचा रहे है 


संजय भास्कर

27 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

क्या बात ..श्रृंगार रस ....का पूरा मिश्रण ....बहुत खूब

कृष्ण मुरारी प्रसाद ने कहा…

इसके लिए धन्यबाद है सर जी......

Randhir Singh Suman ने कहा…

nice

किरण राजपुरोहित नितिला ने कहा…

आखिर कहाँ खो जाता है
मेरा सारा दुःख और गुस्सा ? पाकर साथ तुम्हारा,




yahi to sacche sathi ki pahchaan hai !!!

Ashish (Ashu) ने कहा…

भूल जाता हूँ मैं अपना सारा दर्द देख कर तुम्हारी मुस्कान और बदमाशियां.... मैं जी उठता हूँ, जब तुम,
लेकर मेरा हाथ अपने हाथों में,
कहती हो....... मेरे बहुत करीब आकर कि रहेंगे हम साथ हरदम...हमेशा....
अहा सच मे दिल को छू गई ये लाइने
आपको बहुत बहुत धन्यवाद

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

badhiya chunaav.badhayi.

Unknown ने कहा…

अहा सच मे दिल को छू गई ये लाइने

Unknown ने कहा…

कई रंगों को समेटे एक खूबसूरत भाव दर्शाती बढ़िया कविता...बधाई

Unknown ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

संजय भास्‍कर ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
Unknown ने कहा…

दिल को छू रही है यह कविता .......... सत्य की बेहद करीब है ..........

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) ने कहा…

साहब, हमारे ब्लाग पर आकर हमारी काफ़ी पोस्ट्स को एक दिन मे पढ कर ज़िन्दा वापस जाने के लिये मै आपको धन्यवाद करता हू..

बहुत बहुत शुक्रिया..कविता बहुत अच्छी है..

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत सुंदर.

रामराम.

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत सुंदर...

Urmi ने कहा…

वाह वाह बहुत ख़ूबसूरत! बढ़िया लगा!

M VERMA ने कहा…

मेरा सारा दुःख और गुस्सा ? पाकर साथ तुम्हारा,
बहुत खूब
पर महफूज को ढूढने निकले आपके सारे एजेंट फेल हो गये क्या?

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रेम गाथा । बढ़िया प्रस्तुति।

pragya ने कहा…

'आखिर कहाँ खो जाता है
मेरा सारा दुःख और गुस्सा ? पाकर साथ तुम्हारा'

ख़ूबसूरत...और बिल्कुल सच..

रंजना ने कहा…

भावुक अभिव्यक्ति....

alka mishra ने कहा…

achchhi prastuti

कडुवासच ने कहा…

...मह्फ़ूज मियां कहां चले गये जो आपको जहमत उठानी पड रही है .... सुन्दर प्रस्तुति,बधाई!!!!

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) ने कहा…

theek thaak hi lagi mahfooj bhaayi kee yah rachnaa.....baki apan to unke premi hai naa.....jeeo-jeeo hi kahenge.....!!

Unknown ने कहा…

भाष्कर जी सबसे पहले ध्न्यवाद मेरा हौसला अफजाई ले लिये। मै चाहुगाँ आप मेरा आगे भी हौसला अफजाई करे ।
नजरो से देख कर दिल मे डुबने की आदत है प्यार आप का उसमे डुबने की आदत है।

सुन्दर रचना महफूज़ जी की।

दिगंबर नासवा ने कहा…

महफूज़ भाई की कलाम से निकली .... दिल की आवाज़ ....

Unknown ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

Asha Lata Saxena ने कहा…

बहुत सुंदर भाव और मन को छूने वाली रचना |
आशा

चन्द्र कुमार सोनी ने कहा…

अति-उत्तम.
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