27 दिसंबर 2011

सांपला ब्लोगर मिलन ना भूलने वाले पल......संजय भास्कर

सांपला ब्लोगर मिलन ना भूलने वाले पल
साँपला ब्लोगेर मिलन के कुछ पल ऐसे थे जिन्हें शायद सभी कभी नहीं भूल पाएंगे
पूरे उत्साह के साथ  आखिर ढूंढते -ढूंढते हम भी पहुच ही गए साँपला आखिर ब्लॉगर मिलन में जाना था !

मुख्य द्वार
तारीख...24 दिसंबर 2011
स्थान...रेलवे रोड धर्मशाला, सांपला, हरियाणा
वक्त...दोपहर 12 से शाम 5 बजे
मेज़बान...राज भाटिया जी, अंतर सोहेल, सांपला सांस्कृतिक मंच के सदस्य


सभी खड़े होकर फोटो खिचवाते हुए
उपस्थिति...


राज भाटिया (पराया देश, छोटी छोटी बातें)
इंदु पुरी (उद्धवजी)
अंजु चौधरी (अपनों का साथ)
वंदना गुप्ता (जख्म…जो फूलों ने दिये, एक प्रयास)
खुशदीप सहगल (देशनामा, स्लॉग ओवर)
महफूज अली (लेखनी…, Glimpse of Soul)
यौगेन्द्र मौदगिल (हरियाणा एक्सप्रैस)
अलबेला खत्री (हास्य व्यंग्य, भजन वन्दन, मुक्तक दोहे)
संजय अनेजा (मो सम कौन कुटिल खल…?)
राजीव तनेजा (हँसते रहो, जरा हट के-लाफ्टर के फटके)
संजू तनेजा
जाट देवता (संदीप पवाँर) (जाट देवता का सफर)
संजय भास्कर (आदत…मुस्कुराने की)
कौशल मिश्रा (जय बाबा बनारस)
दीपक डुडेजा (दीपक बाबा की बक बक, मेरी नजर से…)
आशुतोष तिवारी (आशुतोष की कलम से)
मुकेश कुमार सिन्हा (मेरी कविताओं का संग्रह, जिन्दगी की राहें)
पद्मसिंह (पद्मावली)
सुशील गुप्ता (मेरे विचार मेरे ख्याल)
राकेश कुमार (मनसा वाचा कर्मणा)
सर्जना शर्मा (रसबतिया)
शाहनवाज़ (प्रेम रस)
अजय कुमार झा (झा जी कहिन)
कनिष्क कश्यप (ब्लॉग प्रहरी)
केवल राम (चलते-चलते, धर्म और दर्शन)




अंतर सोहेल, मैं ,केवल राम ,जाट देवता राजेश सहरावत जी गन्ने का आनद उठाते हुए


अंतर सोहेल ( मुझे शिकायत है, सांपला सांस्कृतिक मंच )
( जिन सज्जनों के नाम मुझसे छूट गए हो तो माफ़ी  )


  श्रीमती राकेश , सर्जना शर्मा ,केवल राम जी , श्री एवं श्रीमती राज़ भाटिया ,पीछे संजय भास्कर यानी मैं , वंदना गुप्ता जी एवं संजू तनेजा जी 

हिंदी ब्लॉगिंग का सबसे यादगार दिन

 पदम सिंह जी राज भाटिया जी के गले लगते हुए और इंदु बुआ जी

सर्जना शर्मा, वंदना गुप्ता,अलबेला खत्री, कुश्दीप जी 

सांपला ब्लोगर मीट ना भूलने वाले पल 

और सबसे अंत में अगले दिन का सभी का ग्रुप फोटो 


ज्यादा समय न होने कारन ज्यादा नहीं लिख पाया पर आप तस्वीरों को देखर ही अंदाजा लगा ले !
 विस्तृत सपला रिपोर्ट आप सभी जाट देवता ,खुशदीप सहगल जी, अजय झा जी के ब्लॉग पर पढ़ ही चुके है

ब्लॉगर स्नेह मिलन की :-
कुछ फोटोग्राफ्स  जाट देवता (संदीप पवाँर) कुछ अजय कुमार झा जी से साभार 


-- संजय भास्कर 

09 दिसंबर 2011

ये लो हम भी हुए दस हजारी.....संजय भास्कर

 आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा सादर नमस्कार ............कुछ कार्यो में व्यस्त होने के कारण काफी दिनों से ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा रहा हूँ - पर अब एक बढ़िया दिन और बढ़िया खबर के साथ आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ ।

खबर ये है की हम भी हो गए है दस हजारी 
हमरे ब्लॉग पर टिप्पणियों का आंकड़ा दस हजार से ऊपर हो गया है

      कुल  प्रविष्टियाँ - 241
              कुल समर्थक सदस्य - 339
              कुल टिप्पणिया - 10116
              ब्लॉग शुरुवात- 03 सितम्बर 2009
              प्रथम कविता- "याद जताने के लिए नही होती": (03 सितम्बर 2009)
              प्रथम कविता पर टिप्पणियां- 9
              प्रथम टिपण्णी-       nidhitrivedi28 ने कहा…
                  That's true..."याद जताने नही होती"...    few But strong words.  
     लोकप्रिय कवितायेँ-
                           " अहसास "------ 16 मई 2011( 145 टिप्पणियां )
                           " खामोश तू रही "----------29 अप्रैल 2011 ( 160 टिप्पणियां )
                           " आशीर्वाद चाहिए आपका जिंदगी के लिए"-----------23 मार्च 2011(204 टिप्पणियां)
                           "लड़की कि दास्तान" -------------21 फरवरी 2011 (205 टिप्पणियां)
        सर्वाधिक टिप्पणियां------205(लड़की कि दास्तान - 21 फरवरी 2011)    
        दस हजारी  टिपण्णी-------- Sajan Aawara ने कहा…
                                             बहुत खूब लिखा है -कभी विदेश नहीं जाऊंगा आज फिर एक इलज़ाम हमारे सर आया ब्लॉग के तेंदुलकर को दसहजारी बनाया  दस हजार कमेन्ट के ढेर सारी बधाई आपको - जय हिंद जय भारत                                         11/17/2011(विदेश जाने कि इच्छा छोड़ दे भारतीय -( 07 नवम्बर 2011 )
आपके असीम प्यार एवं प्रोत्सन के लिए संजय भास्कर का दस हजारी सलाम,दस हजारी नमन!!!!!
आशा है ये आशीर्वाद सदा मुझपर कायम रहेगा!!!!
दस हजारी धन्यवाद !!!

ब्लॉग जगत के सभी साथियों का तहे दिल से शुक्रिया....!
 
-- संजय भास्कर.... :-)

07 नवंबर 2011

विदेश जाने की इच्छा छोड़ दे भारतीय........ संजय भास्कर


आज के समय में भारत का हर नागरिक विदेश जाने की इच्छा रखता है | जिससे भी पूछो वही यही कहेगा जो सुख विदेश में मिलता है वो भारत में कहाँ | भारत को छोड़कर विदेश जाएं की चाह में आज न जाने
कितने लोग इस ग़लतफहमी में है की विदेश जा कर ही बहुत सारा पैसा कमा सकेंगे विदेश जा कर ही नाम कमा सकेंगे , क्या इस सब चीजो की हमारे देश में कोई कमी है ? क्या भारत देश में रह कर नाम
नहीं कमाया जा सकता |
हमारे देश में भी सब सुख सुविधाए उपलब्ध है जो विदेशो में है , अगर पूरी लगन ,
मेहनत के साथ काम किया जाये तो यहाँ रह कर भी नाम  कमाया जा सकता है | विदेश  जाने वाले ये नहीं सोचते की भारतभूमि ऊनके बारे में क्या सोचेगी , भारत भूमि यही सोचेगी की जिन बच्चो का जन्म भारत भूमि पर हुआ वो उस भूमि को छोड़ कर जा रहे है | क्या बच्चो को अपनी भारतभूमि पर विश्वास नहीं था जो दोस्रो की जमीन पर पैर रखने जा रहे है |
भारत भूमि को छोड़कर विदेश जाने की लालसा दिन प्रतिदिन लोगो में बढती जा रही है | इसका कारण यह है 
विदेशी सभ्यता ने भारतीयों की सोचने समझने के तरीके को ही बदल दिया है , आज के समय में विदेश
जाने के लिए भारतीय नागरिक किसी भी हद तक जा सकता है भारत के नागरिको पर विदेशी माया का भूत इस कदर सवार हो चूका है , कि वो विदेश जाने के चक्कर में अपने घर बार ,जमीन आदि बेचकर जो पैसा इक्कठा करते है और उस पैसे को गलत हाथो में दे देते है , आज के दौर में लोग लाखो रूपये  ट्रेवल एजेंटो को सोप कर चले जाते है और या समझने लगने लगते है शायद विदेश जाएं के रास्ते खुल गये  | आज के समय में भारत में बहुत से ऐसे व्यक्ति और एजेंसिया है जो भोले- भाले लोगो को विदेश भेजने के नाम पर लाखो रूपये ऐठ लेते है |
    ट्रेवल एजेंट लोगो को अपनी चिकनी चुपड़ी बातों  में फसा कर उनका घर उजाड़ देते है  आज तक ना जाने  कितनो  के साथ ऐसा धोखा हो चूका है पर हम लोग फिर भी  सबक नहीं सीखते  है भारतीयों ये समझ लेना चहिये की , जो सुख शांति पैसा रिश्ते नाते रीती रिवाज आपस का भाई चारा  भारत में मौजूद है | वह  विश्व के किसी कोने में नहीं है  भारतीयों में जो अपने पन की भावना है वो कहीं नहीं है ! परन्तु आज भारत देश को 
ऊँचे शिखर तक ले जाने के लिए हमे सच्ची लगन व्  इमानदारी से देश की सेवा करनी होगी |
......सभी भारतीयों  की अपने देश की शान के लिए  अपने जान तक न्योछावर कर देना  चाहिए |
इस बात को भारतीय अच्छी तरह से जान ले की विदेश में भारतीय पैसा तो कमा लेते है पर प्यार और अपनेपन की भावना को खो देते है |
.....इसीलिए भारतीय विदेश जाने की इच्छा न करे क्योकि जो प्यार और अपनेपन की भावना भारत देश 
में है और कहीं भी नहीं है ..............!

-- संजय भास्कर

25 अक्टूबर 2011

जन्मदिन मुबारक ..........संजय भास्कर

आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा सादर नमस्कार ............घरेलु कार्यो में व्यस्त होने के कारण काफी दिनों से ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा रहा हूँ . पर अब एक बढ़िया दिन और बढ़िया खबर के साथ आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ । 

 


आदरणीय गुरुजनों और मित्रों आज हमारी मासी जी यानि ब्लॉग जगत की चर्चित पॉडकास्टर आदरणीय अर्चना चावजी जी का जन्मदिन है !
इसी अवसर पर मासी जी के लिए एक छोटी सी भेंट कविता के रूप मे ---


ममतामयी मूरत हो तुम 
करुणामयी सूरत हो तुम 
आंचल में लिये 
हम सबके लिए असीम प्यार 
मुख पर रहती  है 
सदा मुस्कराहट 
दुःख की हमारे जीवन में 
नहीं आने देती आहट !


दिल से बरसते हैं ढेरो आशीर्वाद 
जो करते हमारा जीवन आबाद 
ना छ्ल कपट है मन में 
बस प्यार ही प्यार है जीवन में .! 
ना तुम करती हो भेदभाव  
हर किसी से है एक सा लगाब 
उज्ज्वल हसमुख हो तुम 
आपका स्नेह पाकर धन्य हुआ जीवन 


                              जन्मदिन मुबारक
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मेरी ओर से मासी जी आपको जन्मदिन की और दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं ! ये रोशनी का त्यौहार आप सब के लिये, इस बार एक फिर से नयी रोशनी लेकर आये, 
ब्लागजगत के सभी मित्रो को दीवाली की ढेरो शुभकामनायें
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-- संजय भास्कर

19 सितंबर 2011

आइये चले मेरे साथ छिंदवाड़ा स्थित श्री बादल भोई जनजातीय संग्रहालय...... संजय भास्कर



इस बार मैंने अपने ननिहाल से जुडी कुछ यादों के बारे लिखा है !
छिंदवाड़ा जिले का सबसे पुराना जनजातीय संग्रहालय जब मैंने इसे पहली बार देखा तो देखता ही रह गया !
पहली बार मुझे 2006 में इसे देखने का मौका मिला .....उसके बाद से जब भी ननिहाल गया संग्रहालय देखने के कोई मौका नहीं मिला लेकिन आज भी संग्रहालय देखने का बहुत मन करता है पर अब समय ही नहीं निकाल पाते जल्दबाजी में गए जल्दबाजी में आ गये इतना समय ही नहीं मिलता की घूमने का मौका मिले हम यह सोच लेते है जितना समय है मामा मामी , भाई बहनों के साथ बिता ले क्योकि रोज रोज तो आया जाता नहीं है ! .... .......कई बार सोचा इन यादें के बारें में लिखू पर कभी लिखने का वक्त नहीं निकाल पाया पर अभी कुछ दिन पहले ही मैं अपने पर्स को चेक कर रहा था की अचानक पर्स की अन्दर की जेब से म्यूजियम प्रवेश का 2 रुपये का शुल्क वाला टिकेट मिला 2 सितम्बर 2006 जिसे मैंने पहली बार म्यूजियम देखने के लिए लिया था जिसे देख कर पुरानी याद तजा हो गई और मैंने उसी दिन उन यादों को लिख डाला !
जब मैं पहली बार संग्रहालय देखने गया था तो संग्रहालय के के कर्मचारी से संग्रहालय के बारे में काफी जानकारी मिली थी | उससे मुझे संग्रहालय के बारे में लिखने में बहुत मदद मिली ........!
छिंदवाड़ा स्थित जनजातीय संग्रहालय की शुरूआत 20 अप्रैल 1954 ई. में हुई थी। 1975 ई. में इस संग्रहालय को राज्य संग्रहालय का नाम दिया गया। लेकिन 8 सितम्बर 1997 ई. को इसका नाम बदल कर श्री बादल भोई जनजातीय संग्रहालय रख दिया गया। श्री बादल भोई इस जिले के क्रांतिकारी जनजातीय नेता थे। उन्हीं के नाम पर इस संग्रहालय का नाम रखा गया। इस जनजातीय संग्रहालय को 15 अगस्त 2003 में सभी पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। यह संग्रहालय पर्यटकों के लिए प्रतिदिन खुला रहता है। इस संग्रहालय में इस जिले में रहने वाले जनजातीय लोगों से जुड़े संरक्षित घरों के भण्डार और अनोखी वस्तुएं देखी जा सकती है। यहां आप घर, कपड़े ,आभूषण, शस्‍त्र, कृषि उपकरण, कला, संगीत, नृत्य, धार्मिक गतिविधियां आदि चीजें देख सकते हैं। इस संग्रहालय में जनजातीय समुदायों की परम्परा और पुरानी संस्कृति की झलकियां भी देखने को मिलती है। इस जिले में गोंड और बेगा प्रमुख जनजातियां है।




इस म्यूजियम में जिले की जनजातियों से सम्भंधित इक़ से इक़ अद्भुत चीजें हैं। इसमें घर, कपडे, जेवरात, हथियार, कृषि के साधन, कला, संगीत, नृत्य, त्यौहार, देवी-देवता, धार्मिक गतिविधियाँ, आयुर्वेदिक संग्रह जैसी वस्तुएं के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है.
यह म्यूजियम जनजातीय संप्रदाय की उन्नत परम्पराओं और प्राचीन संस्कृति पर प्रकाश डालता है. जिले में गौंड और बैगदो प्रमुख जनजातियाँ थीं. इसमें उन लोगों के परिवार के रहने सहने के ढंग का भी वर्णन मिलता है. इसमें यह भी जानकारी मिलती है कि अगरियाजन्जाती के लोग किस तरह लोहे को मोदते थे. इन बातों को अगर इक़ लाइन में कहा जाए तो यह म्यूजियम जिले की जनजातीय के बारे में जानकारी जुटाने का सर्वथा उपयुक्त साधन है...........!
आप सभी भी जाकर देखें मुझे उम्मीद है आप सभी को संग्रहालय बहुत पसंद आएगा !
संग्रहालयके बारे में हमारे मित्र राम कृष्ण जी भी लिख चुके है जो छिंदवाड़ा के ही है!



-- संजय भास्कर