27 जून 2010

तक़दीर तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते |

 तक़दीर के खेल में निराश नहीं होते ,
जिंदगी में कभी उदास नहीं होते 
हाथो की लकीरों पर यकीन मत करना ,
तक़दीर तो उनकी भी होती है 
जिनके हाथ नहीं होते |

15 जून 2010

छोटे मांगे तो भीख बड़ा मांगे तो चंदा है ........!!

 लोकल बस से उतरते ही 
जैसे 
हमने एक दोस्त से माचिस मांगी ,
हाथ बढ़कर ,
कर देख रहा था एक भिखारी 
उसने भी हाथ पसार दिए 
हमने भाषण झाड़ते हुए कहा
' भीख मांगते हुए शर्म नहीं आती ' ?
वह बोला ....
मगर भिखमंगा तो यहाँ हर एक बंदा है |
 आपको आई थी क्या बाबु जी  ,
माचिस मांगते हुए 
माँगना तो हमारे देश का ,
केरेक्टर है,
जो जितनी सफाई से मांगे ,
वह उतना ही बड़ा 
एक्टर है |
सच तो यह है बाबू जी 
छोटे मांगे तो भीख बड़ा मांगे तो चंदा है ?
भीख माँगना ही आज राजनीतिज्ञों का धंधा है |


12 जून 2010

गरीबी के कारण छोड़ देते हैं 21 फीसदी बच्चे पढ़ाई


 देश के 21 प्रतिशत बच्चों के बीच में पढ़ाई छोड़ देने की मुख्य वजह अब भी उनकी गरीबी है।
तमाम दावों और वादों के प्रचार-प्रसार से देश में पढ़ाई-लिखाई की तस्वीर भले ही गुलाबी लगने लगी हो, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी ज्यादा नहीं बदली है। आलम यह है कि सरकार चाहकर भी सभी बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने में नाकाम रही है। तमाम तरक्की के दावों के बीच देश के 21 प्रतिशत बच्चों के बीच में पढ़ाई छोड़ देने की मुख्य वजह अब भी उनकी गरीबी है।
देश में पढ़ाई की इस बदरंग तस्वीर का खुलासा राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन की ओर से कराए गए सर्वे की बुधवार को यहां जारी रिपोर्ट से हुआ है। भारत में शिक्षा, भागीदारी एवं खर्च पर केंद्रित राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय [एनएसएसओ] की रिपोर्ट बताती है कि 20 प्रतिशत बच्चों में पढ़ाई को लेकर कोई रुचि ही नहीं है। नौ प्रतिशत बच्चों के खुद माता-पिता को ही नहीं लगता कि पढ़ाई में कुछ रखा है। इसी क्रम में दस प्रतिशत महज इसलिए छोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें उनके मन मुताबिक पढ़ने का मौका नहीं मिलता। जबकि दस प्रतिशत ऐसे भी हैं जो पढ़ाई के बोझ या फेल होने के डर के कारण बीच में स्कूल जाना छोड़ देते हैं।
इससे एक सच्चाई यह भी उभरी कि जिसमें 22 प्रतिशत अभिभावकों ने शिक्षा को जरूरी न मानते हुए अपने बच्चों को स्कूलों में दाखिला ही नहीं दिलाया। बच्चों को दाखिले से ही दूर रखने वाले 21 प्रतिशत अभिभावकों ने तो आर्थिक तंगी को मजबूरी बताई, जबकि 33 प्रतिशत मां-बाप की बच्चों को पढ़ाने में खुद की ही रुचि नहीं थी।
 मसलन तकनीकी शिक्षा में ग्रामीण क्षेत्र के एक छात्र का सालाना औसत निजी खर्च जहां 27,177 रुपये है, वहीं नगरीय क्षेत्र के एक छात्र का सालाना औसत निजी खर्च 34822 रुपये है। इसी तरह व्यावसायिक शिक्षा में यह निजी खर्च ग्रामीण छात्र पर जहां 13699 रुपये तक सीमित है, वहीं नगरीय क्षेत्र का छात्र अपने ऊपर सालाना औसतन 17016 रुपए खर्च करता है।
सर्वे बताता है कि कक्षा एक से आठ तक की कक्षाओं में राष्ट्रीय स्तर पर सकल उपस्थिति 80 प्रतिशत है।

09 जून 2010

क्या तुम मुझसे शादी करोगी ?

मुलाकात हुई तुमसे 
केवल इत्तेफाक से
क्या पता था दिल में बस जाओगी 
पहली मुलाकात में 
दूर नहीं जाना अब मुझे छोड़कर ,
वरना क्या मिलेगा तुम्हे 
इक प्यार भरा दिल तोड़ कर 
आँखे बिछाये बैठा हूँ , मैं तेरी 
राहों में 
जाने कब आओगी तुम मेरी बाहों में ,
क्या तुम मुझसे शादी करोगी  ?
  
...Sanjay Bhaskar...



06 जून 2010

बड़े काम की चीज है मोबाइल .....!


मोबाइल फोन हमारी जिदंगी का अहम हिस्सा है। बाजार में आईफोन आने के बाद मीडिया में, वेबसाइटों पर और ब्लॉग्स पर इसकी खूब चर्चा हुई। आईफोन की कीमत काफी ज्यादा है, इसलिए भारत में इसके उपभोक्ता कम है। आम मोबाइल फोन की बात करे तो शायद अहसास होगा कि फोन के बिना जिंदगी में अधूरापन सा है। आज के दौर में मोबाइल के बिना जिंदगी की कल्पना करने पर शायद हम असहज महसूस करने लगेंगे।
भले ही मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का हिस्सा हो, लेकिन कई बार यह परेशानी का सबब बन जाता है। मसलन आप काम में व्यस्त हों और फोन बजने लगे। खैर इसका भी समाधान है कि आप मोबाइल को शांत अवस्था [साइलेंट] में कर लें। इसके अलावा कई सेवा प्रदाता ऐसी सुविधा भी उपलब्ध करा रहे है कि अगर फोन बंद हो तो भी आने वाली कॉल के बारे में पता चल जाएगा। फोन ऑन करते ही पता चल जाएगा कि इस दौरान कितनी कॉल्स आई। ये सभी छूटी हुई कॉल [मिस कॉल] के तहत दर्ज हो जाएंगी।
एक तरीका यह भी है कि आप मोबाइल से बैट्री को अलग कर दें। ऐसी स्थिति में आपका फोन 'पहुंच से बाहर' हो जाएगा और कोई यह शिकायत भी नहीं कर पाएगा कि आपने फोन बंद कर लिया था। मौजूदा समय में भारत में 40 करोड़ से ज्यादा मोबाइल उपभोक्ता है, जिसमें 30 फीसदी ग्रामीण इलाकों में है।
मोबाइल के और भी कई अन्य उपयोग है। मसलन ज्योतिष, समाचार, खेल, शेरो-शायरी जैसी सामग्री को डाउनलोड किया जा सकता है। मोबाइल में कैमरा हो तो कहीं भी और कभी की भी तस्वीर ली जा सकती है। रिकॉर्डिग की सुविधा मोबाइल को बेहद खास बनाती है। अब आईफोन में तो इंटरनेट की भी सुविधा है। ग्रामीण भारत में मोबाइल फोन का प्रसार बहुत तेजी से हुआ है, लेकिन यहां बिजली की आपूर्ति की दिक्कत है। इसलिए यहां बैट्री को चार्ज करना एक बड़ी चुनौती है। ग्रामीण इलाकों में अकसर ऐसी कहानियां सुनने को मिलती है कि लोग अपने मोबाइल की बैट्री को चार्ज करने के लिए 20-20 किलोमीटर दूर तक जाते है, लेकिन यहां भी जुगाड़ काम कर गया है। बैट्री से जुड़े एक विशेष केबल के माध्यम से मोबाइल को चार्ज कर लिया जाता है जाहिर है मोबाइल हमारे लिए आवश्यक बन गया है।

 प्रस्तुतकर्ता .. 
.Sanjay Bhaskar.