14 मई 2019

आई ऍम सॉरी मैने तुम्हारा दिल तोड़ा कहाँ से आया ये सॉरी :)

सॉरी, मैं लेट हो गया सॉरी मैं वो काम पूरा नहीं कर पाया..... मेरी वजह से तुम्हारी ट्रेन छूट गई, आई एम सॉरी.... मैने तुम्हारा दिल तोड़ा, सॉरी....सॉरी, मैने तुम्हें गलतफहमी में थप्पड़ मार दिया। ये क्या अब क्यों गुस्सा हो रहे हो सॉरी बोल तो दिया। अक्सर ही इस ' सॉरी ' के शिकार हुए लोगों के मुंह से निकल ही जाता है कि 'अंग्रेज चले गये लेकिन ' सॉरी ' छोड़ गए। चाहे कितनी ही बड़ी गलती कर दो बस एक सॉरी बोला और हो गया काम पूरा
वहीं सॉरी कहने वालों की सोच होती है कि अब माफी तो मांग ली अब क्या सिर्फ एक गलती के लिए फांसी दे दोगे। बड़ी से बड़ी गलती हो जाने पर भी ये बस एक सॉरी के सहारे सभी गलतियों कि माफी पाने की तमन्ना रखते हैं। कितना छोटा सा शब्द होता है सॉरी......अंग्रेजी में माफी मांगने के लिए प्रयोग होने वाले इस शब्द को समझो तो इसके मायने कितने गहरे होते हैं। अपनी गलती को मान कर उसे दोबारा न करने और उसके लिए शर्मिदा होने के भाव को व्यक्त करता है। लेकिन कितने लोग ऐसे हैं जो इसके असली भावों से वाकिफ हैं। कई बार लोग इनके इस झूठे शब्दों के जाल में फंस जाते हैं तो कुछ इसकी असलियत को जानते हुए इसकी परवाह ही नहीं करते।
आज कितने ही लोग बचे हैं जो सॉरी कहने के बाद फिर से वो गलती नहीं करते। वे तो बस उस समय बात बिगड़ने के डर से इस सॉरी का सहारा लेते हैं। आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति जल्दी में रहता है और दूसरों को आगे निेकले का प्रयास करता रहा है। इस दौरान ना जाने उसने कितनों को कई बार धक्का दिया होगा, नुकसान पहुंचाया होगा, मगर हर बार वह उसे सॉरी बोलकर और अपनी गलतियों को नजरअंदाज कर आगे निकल जाता है ऐसे लोगो की वजह से सारी शब्द अपने असली मायने खो रहा है......आज जरुरत है हमें भी कुछ ऐसा करने की जिससे पूरा जनसमुदाय इस शब्द के मायने और अर्थ को समझ कर सॉरी बोलने से पहले एक बार सोचें और अपनी जिंदगी में इस तरह के शब्दों का कम से कम प्रयोग करें.......!!

- संजय भास्कर

01 मई 2019

कुछ मेरी कलम से अनीता सैनी, रेणु, अनुराधा चौहान :)

आदरणीय रेणु जी ( ब्लॉग क्षितिज ) अनुराधा चौहान जी ( Poet and Thoughts ) और अनीता सैनी जी ( गूंगी गुड़िया ) काफी समय से तीनो को ब्लॉग के माध्यम से पढ़ रहा हूँ इनकी हर विषय पर एक से बढ़कर एक मर्मस्पर्शी व सटीक रचनाएँ और हाइकु ने सीधे दिल पर दस्तक देते है सभी लेखिकाओं का कम समय में बढ़िया लेखन पढ़ने को मिला तीनो की लेखनी से मैं बहुत ही प्रभावित हूँ होकर ही इनके बारे में लिख रहा हूँ पर शायद किसी के बारे में लिखना मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है तीनो लेखिकाओं के लिए कुछ शब्द साँझा कर रहा हूँ उम्मीद है सभी पसंद आये..........!!

रेणु जी ज़िंदगी पर जिस यथार्थता से रेणु जी की कलम चली है उतनी ही मर्मस्पर्शी व सटीक रचनाएँ लिखी है.... वैसे भी कवि हृदय में प्रेम का एक विशिष्ट स्थान होता है और इसे रेणु जी ने अपने अनुभव से और भी विशिष्ट बना दिया है उनकी कुछ रचनाएँ सच ही मन को भावुक कर जाती हैं रेणु जी की लिखी कुछ मेरी पसंदीदा रचनाये ......
घर से भागी बेटी के नाम, मैं श्रमिक, सुन ओ वेदना, भैया तुम हो अनमोल, स्मृति शेष पिताजी, उदासियों के बियाबान, मेरी पसंदीदा रचनाये !!  मेरी और से  रेणु जी को निरंतर लेखन के लिए को शुभकामनाएँ............!!


अनुराधा चौहान जी की कुछ रचनाये बड़ी सहजता से अपनी व्यथा व्यक्त करती है उनकी कवितायें इस बात को
प्रमाणित भी करती हैं संवेदनशील मन मात्र अपनी ही व्यथा कथा नहीं कहता इनसे जुड़े हर शख़्स की भावनाओं को कवयित्री ने कविता में बुन डाला है उनकी कुछ रचनाएँ सच ही मन को भावुक कर जाती हैं
अनुराधा चौहान की लिखी कुछ मेरी पसंदीदा रचनाये.......
एक गरीब बेचारा, अधूरे ख्वाब, वक़्त के घाव, जीवन का सत्य, मैं ही प्रलय हूँ, ग़रीब की ज़िंदगी, काश न होती यह सरहदें इत्यादि, मेरी और से अनुराधा जी को निरंतर लेखन के लिए को शुभकामनाएँ...........



अनीता सैनी जी से ब्लॉग से परिचय हुआ उनकी कविताये पढ़ने को मिली काफी समय से अनीता जी के लेखन
से मैं बहुत प्रभावित हूँ हमेशा ही उनकी हर पोस्ट में कुछ अलग ही पढ़ने को मिलता है खासकर संवेदन शील विषय पर लिखी हर रचना एक अलग ही छाप छोड़ती है लेखिका के पास लेखन का कई वर्षों अनुभव है इसी कारण उन्होंने लेखन में मन में उपजे विचारों को नए अंदाज में लिखती है अनीता जी की रचनाएँ अपने आप में अनूठी है जो सीधे दिल को छूती है अनीता सैनी की लिखी कुछ मेरी पसंदीदा रचनाये.......
बोलता ताबूत, सत्य अहिंसा का पुजारी, ख़ामोशी तलाशती है शब्द, वेदना प्रकृति की, ख़ामोश होते रिश्तें, मुस्कान अश्कों  की ,

मेरी ओर से निरंतर लेखन के लिए आदरणीय तीनो बड़ी बहनो को ढेरों शुभकामनाएँ........!!

-- संजय भास्कर


24 अप्रैल 2019

Memories Of School Days एक पिता का वात्सल्य गुलाबी चूड़ियाँ :)

जब भी कभी नागार्जुन बाबा का नाम दिमाग में आया सबसे पहले दिमाग में गुलाबी चूड़ियाँ ही याद आई ......कभी कभी पुरानी यादें लौट आती है याद नहीं कौन सा वर्ष रहा होगा पर इतना जरूर याद है स्कूल में हिंदी की क्लास में एक ट्रक ड्राईवर के बारें में ऐसे पिता का वात्सल्य जो परदेस में रह रहा है घर से दूर सड़कों पर महीनों चलते हुए भी उसके दिल से ममत्व खत्म नहीं हुआ जो अपनी बच्ची से बहुत प्यार करता है !............. यह कविता है नागार्जुन बाबा की “गुलाबी चूड़ियाँ”  जिसे उसने अपने ट्रक में टांग रखा है ये चूडियाँ उसे अपनी गुड़िया की याद दिलाती और वो खो जाता है हिलते डुलते गुलाबी चूड़ियाँ की खनक में .........!!

कविता के अंश…...गुलाबी चूड़ियाँ

प्राइवेट बस का ड्राइवर है तो क्या हुआ,
सात साल की बच्ची का पिता तो है!
सामने गियर से उपर
हुक से लटका रक्खी हैं
काँच की चार चूड़ियाँ गुलाबी
बस की रफ़्तार के मुताबिक
हिलती रहती हैं…

झुककर मैंने पूछ लिया
खा गया मानो झटका
अधेड़ उम्र का मुच्छड़ रोबीला चेहरा
आहिस्ते से बोला: हाँ सा’ब
लाख कहता हूँ नहीं मानती मुनिया
टाँगे हुए है कई दिनों से
अपनी अमानत
यहाँ अब्बा की नज़रों के सामने


मैं भी सोचता हूँ
क्या बिगाड़ती हैं चूड़ियाँ
किस ज़ुर्म पे हटा दूँ इनको यहाँ से?
और ड्राइवर ने एक नज़र मुझे देखा
और मैंने एक नज़र उसे देखा
छलक रहा था दूधिया वात्सल्य बड़ी-बड़ी आँखों में
तरलता हावी थी सीधे-साधे प्रश्न पर
और अब वे निगाहें फिर से हो गईं सड़क की ओर
और मैंने झुककर कहा -
हाँ भाई, मैं भी पिता हूँ
वो तो बस यूँ ही पूछ लिया आपसे
वरना किसे नहीं भाँएगी?
नन्हीं कलाइयों की गुलाबी चूड़ियाँ !

-- बाबा नागार्जुन

03 अप्रैल 2019

कुछ मेरी कलम से कामिनी सिन्हा :)

कुछ समय से कामिनी सिन्हा जी के कुछ आलेखों को ( मेरी नज़र से ) ब्लॉग के माध्यम से पढ़ रहा हूँ जीवन का सारा खेल एक नज़र और नज़रिये का ही तो होता है ,किसी को पत्थर में भगवान नजर आते है किसी को भगवान भी पत्थर के नज़र आते है कामिनी जी हिंदी साहित्य मे संमरण आलेखों को काफी गहराई से लिखती है जिंदगी के ढेरों उलझनों से कुछ समय बचाकर कहानी और लेख के माध्यम से साँझा करती है ! जिस तरह हर इंसान का जिंदगी जीने का अपना ही अंदाज़ होता है उसी तरह जीवन को, जीवन की परिस्थितियों को, समाज को और यह तक की व्यक्ति विशेष को देखने का भी उसका अपना एक नज़रिया होता है ,अपना एक दृश्टिकोण होता है. वो अपनी ही नज़रिये से हर परिस्थिति को देखता है, समझता है, संभालता है और सीखता भी है. यूँ कहे कि सारा खेल नज़र और नज़रिये का है ! कुछ दिनों पहले कामिनी जी का एक आलेख एक खत पापा के नाम जो एक दर्द से भीगा हुआ मर्मस्पर्शी बेटी की खत था मन बहुत दुखी हुआ आपकी व्यथा पढ़ कर । दिवंगत पिताजी को समर्पित ये लेख हर उस बेटी के मन की अव्यक्त भावनाओं को शब्द देता है जिन्होंने आपकी ही तरह जीवन में इस स्नेहमयी छाया को खोया है ! एक बेटी और पिता के बीच हमेशा ही स्नेह का अद्भुत नाता रहा है जिसे लिख पाना बिलकुल भी संभव नहीं ! तुमने उन भावनाओं को बहुत ही भावपूर्ण ढंग से लिखा है जो उस समय तुम्हारे भीतर उमड़ी होंगी पापा के अंतिम सफ़र के दृश्य मुझे भी अपने दिवंगत पिताजी के बारे में सुनी बातें याद दिला गये | सखी मैं इतनी भाग्यशाली नहीं थी जो अपने पिताजी के साथ उस समय रहती पर उनके साथ भी दर्दनाक कैंसर का यही अनुभव रहा मन की वेदना के ज्वार को तुमने ज्यों का त्यों लेख में उतार दिया ! शब्द - शब्द पीड़ा बही और सब अनकही कह गई पिता के लिए इतनी गहन अनुभूतियाँ सराहना से परे हैं इनसे तुम्हारे उनके बीच के अद्भुत रिश्ते का पता चलता है  कामिनी सिन्हा जी लेखनी से प्रभावित होकर ही उनके के बारे में लिख रहा हूँ पर शायद किसी के बारे में लिखना मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है पिता के लिए बेटी के प्यार को शब्दों में पिरोता खत सीधे  दिल से दिल तक जाने में सक्षम रहा सच में बाप-बेटी का रिश्ता कितना अनमोल होता हैं...........उसे शब्दों में बयान करना बहुत ही मुश्किल हैं कामिनी के बारे जो कुछ भी लिखा उनकी लेखनी से प्रभावित हो कर लिखा उम्मीद है सभी पसंद आये !!
मेरी और से निरंतर लेखन के लिए को कामिनी जी को ढेरों शुभकामनाएँ.........!!


-- संजय भास्कर

06 मार्च 2019

लिखता हूँ एक नज्म तुम्हारे लिए सालगिरह पर :)

विवाह कहे अनकहे तरीके से ये एहसास दिलाता रहता है तुम्हारे जीवन का एक मूल्य है और उस मूल्य को समझने वाला एक साथी हमेशा तुम्हारे साथ है जब एक दुसरे की न सिर्फ...अच्छाईयां बल्कि बुराइयाँ भी अच्छी लगने लगे...तो समझ लेने चाहिये की प्यार हो गया है...आज हमारी शादी की सालगिरह है आज कुछ शब्द अपनी पत्नी प्रीती के लिए...आज के ही दिन हम हुए थे एक कुछ खट्टी मीठी यादें ढेर सारा प्यार....मुझे हमेशा ही आप सभी का स्नेह और आशीर्वाद मिलता रहा है आज फिर इस अवसर पर आप सभी का प्रेम और आशीर्वाद चाहिए .....!!

                                                                  ( चित्र:- प्रीती भास्कर और मैं )

अक्सर मैं लिखता हूँ 
तुम्हारी आखों को 
अपने शब्दों में,
एक - एक शब्द जोड़कर कर 
लिखता हूँ एक नज्म तुम्हारे लिए 
क्योंकि तुम्हारा मेरी ज़िंदगी में 
होना भी 
एक खूबसूरत नज्म के समान है    
इन शब्दों को पढ़कर 
क्या तुम प्यार करोगी न 
मुझसे,
क्योंकि सारे रिश्ते छूट जाते हैं 
बदलते वक्त के साथ,
पर पति पत्नी का रिश्ता होता है मजबूत,
वक्त के साथ....!!



-- संजय भास्कर