17 सितंबर 2010

उदासी छाई है मन में कारण मैं खुद नहीं जानता..........!!!!!


 उदासी छाई  है मन में 
कारण मै खुद नहीं जानता
जो रूठा है अपना वो मनाने  पर भी नहीं मानता
दर्द मिले है हमें  जो ,
उनका घाव भरना भी नहीं जानता |
दुखाया है शायद दिल किसी का मैंने
मुझे शायद वो भी नहीं जानता |
प्यार तो कर सकता हूँ मैं भी ,
पर कोई है जो प्यार निभाना नहीं जानता |
जिस प्यार की होती है पूजा
वो पूजा शायद करना ही नहीं जानता
उदासी  छाई है मन में
कारण मैं खुद  नहीं जानता |


.....संजय कुमार भास्कर

14 सितंबर 2010

क्यूँ बुझ रहा है... ये मन..........!!!!!

 क्यूँ बुझ रहा है
मन
क्यों उड़ रहा है
मन
चैन भी नहीं है
उमंग भी नहीं
दूर भी नहीं है
संग भी नहीं
ये मन
आज क्यूँ बुझ रहा है
मन
ना अपना सा लगता है
ना पराया सा
शांत भी नहीं
ना घबराया सा
ये मन
क्यों बुझ सा रहा है...
अजीब से सवाल हैं
इनके जवाब नहीं
क्या खोया क्या पाया
कुछ तो हिसाब नहीं
ये मन
पंछी उदासा सा
बादल प्यासा सा
रोशनी को मोहताज
बेचारा तमाशा सा
ये मन
मेरा मन......

-मलखान सिंह आमीन

12 सितंबर 2010

मौत तू एक कविता है...............!!!

प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !
कैसे है आप सब ? लीजिये एक बार फिर हाज़िर हूँ
काफी अंतराल के बाद आज फिर आपकी ख़िदमत में उपस्थित हूं |
दोस्तों,
आप सभी के लिए १९७० की मशहूर फिल्म आनंद की ये दिल को छू लेनेवाली कविता पेश करता हूँ। 

मौत तू एक कविता है,
मुझसे एक कविता का वादा है, मिलेगी मुझको।
डूबती नफ्जों में, जब नींद आने लगे।
ज़र्द सा चेहरा लिए, चाँद उफ़क तक पहुंचे।
दिन अभी पाने में हो, रात किनारे के क़रीब.
ना अँधेरा ना उजाला हो, ना आधी रात ना दिन।
जिस्म जब ख़त्म हो, और रूह को जब साँस आये।
मुझसे एक कविता का वादा है, मिलेगी मुझको।

05 सितंबर 2010

जन्मदिन मुबारक संजय भास्कर


मेरे दोस्तों की सूची में बहुत कम नाम शामिल हैं। उस सूची में संजय भास्कर का नाम सबसे उपर है और इस बात का मुझे गर्व है। संजय को मेरी तरफ से जन्मदिन की बधाई। उनके लिए मेरी ओर से ये चंद अल्फाज। जानता हूं कम हैं, लेकिन सच्चे दिल से निकला तो एक लफ्ज ही काफी है।

खुशनसीब है वह दिन
जिस दिन आप आए जहां में
खुशनसीब हैं वे मात-पिता
जन्म लिया जिनके अंगना में 
खुशनसीब थी गली, मोहल्ला
खुशनसीब वो शहर
खुशनसीब उन सबसे ज्यादा भी कोई है?
मैं !!!
जिसने पाया एक दोस्त
एक और भाई
सलामती की दुआ मांगता हूं सदा
खुदा करे
उम्र आमीन की भी लग जाए आपको
जन्मदिन मुबारक

-मलखान सिंह आमीन

03 सितंबर 2010

इस जिंदगी की दौड़ में ..........जन्मदिन विशेष

 आदरणीय गुरुजनों और मित्रो
मेरे जन्मदिन के मौके पर आप सभी अपना प्रेम और आशीर्वाद प्रदान करे
इस अवसर पर  एक छोटी सी कविता पेश है ------

 इस जिंदगी की दौड़ में ,
तू सबको पीछे छोड़ दे ,
तू अपनी मंजिल पा ले 
रस्ते खुद बना ले 
तू निकल सबसे आगे ,
सभी तेरे पीछे - पीछे
लेकिन ईमानदारी मत छोड़ना,
किसी का दिल मत तोड़ना |