| हकदार नहीं इस सम्मान का |
| दे दिया जितना तूने |
| पत्थर को जिंदा बतलाकर |
| बड़ा अहसान किया तूने |
| दोस्तों से सिर्फ पहचान मेरी |
| नहीं मुझे कोई आसमां छूने |
| ---मलखान सिंह आमीन |
| (संजय जी द्वारा अपने ब्लॉग पर मेरा परिचय करवाने पर कुछ पंक्तियाँ मेरी तरफ से) |
06 अप्रैल 2010
हकदार नहीं इस सम्मान का
05 अप्रैल 2010
मिलिए हमारे मित्र दफा -512 और दुनाली वाले मलखान सिंह ( आमीन )
आज मैं आप सभी को एक अपने साथी दोस्त से मिलवा रहा हूँ
जिन्होंने मेरा काफी साथ दिया ये मेरा दोस्त मेरा हमसाया है
मिलिए हमारे मित्र
दफा -512 और दुनाली वाले
मलखान सिंह ( आमीन )
Copy Editor
HT Media Limited
Mohali (Punjab)
मलखान सिंह मेरे सबसे करीबी मित्रो में से एक है
बहुत ही नेक दिल इंसान है मलखान सिंह
वो मित्र कम भाई ज्यादा है
मुझे ब्लॉगिंग से जोडऩे का श्रेय मैं अपने मित्र मलखान सिंह (आमीन) को देना चाहूंगा।
......संजय भास्कर.....
04 अप्रैल 2010
इस देश में अतंकवादियो क्या है तुम्हारा
इस देश में अतंकवादियो क्या है तुम्हारा ,
यहाँ से चले जाओ अब ये देश हमारा है |
सुला देंगे हम तुम्हे नींद सुकून की ,
तुम्हे खत्म करना ही हमारा नारा है |
हमारे दिल के भाई को तुम्हारे दिल में बसा देंगे ,
तुम्हे ही क्या हम तुम्हारी हस्ती को मिटा देंगे |
बहुत दिने से सह रहे है यातनाए तुम्हारी ,
इस देश की भूमि पर पाँव रखते ही मिटा देंगे |
तुम्हारे दिए हुए दुखो को हम खुशियो से भुला देंगे ,
अब हम अपने देश के जख्मो पर मरहम लगा देंगे |
उन मासूमो का खून बहाने वालो को हम टोक देंगे ,
हमारे दुस्मानो को हम सरहद के पार ही रूक देंगे |
.......संजय भास्कर........
.......संजय भास्कर........
एक नयी शुरुआत ......
एक नई शुरुआत
मै संजय भास्कर पुरानी यादें बीते हुए पल नाम से नए ब्लॉग की शुरुआत की जा रहा हूँ |
इस ब्लॉग पर हर दिन किसी न किसी ब्लॉग मित्रो की रचनाये प्रकशित करूँगा
जिन्हें हमारी नज़रे नहीं देख पाई और इसी बहाने पुरानी यादें फिर से ताजा होगी
इसके लिए कई ब्लॉग मित्रो से मैंने इजाज़त भी ले ली है | इसके लिए
..आप सभी के आशीर्वाद की ज़ुरूरत है
.बहुत बहुत धन्यवाद
02 अप्रैल 2010
Fire is still alive.....महफूज़ भाई की शानदार उपलब्धि पर उनकी एक पुरानी रचना
कल आप सबने पढ़ा ही होगा खुशदीप जी की पोस्ट थी, जिसमें महफूज़ अली जी की एक बड़ी उपलब्धि की बात कही गई थी,
अमेरिका में महफूज़ भाई के नाम का डंका बजा हुआ है
लखनऊ के स्टार ब्लोगेर ने भारत का नाम दुनिया में रौशन कर दिया....
सबसे पहले महफूज भाई ...........को ढेरों बधाई !
खुशदीप सहगल जी के ब्लॉग से ये पता चला है
महफूज़ की एक अंग्रेजी कविता 'Fire is still alive' अमेरिका के मैडिसन स्टेट के Wisconsin University के Emeritus professor John L. Nancy Diekelmann ने T-Shirt पर प्रकाशित की है... यह टी-शर्ट पूरे अमेरिका व यूरोपियन, भारत समेत एशियन देशों में बेची जाएंगी... इस कविता को Wisconsin University के क्लिनिकल डिपार्टमेंट में सब्जेक्ट में जोड़ लिया गया है...यानि यह कविता अमेरिका के सिलेबस में पढाई जाएगी.
महफूज़ भाई की बुलंद कामयाबी के लिए .........ढेरो शुभ कामनाये...
दुनिया की इस भीड़ में,
खोजता फिरता हूँ अपना मुकाम
हर चीज़ वो मिलती नहीं
जिसकी होती चाहत यहाँ,
क्या खोने के डर से,
मैं भूलूँ,
कुछ पाने की चाह यहाँ?
जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??
खोजता फिरता हूँ अपना मुकाम
हर चीज़ वो मिलती नहीं
जिसकी होती चाहत यहाँ,
क्या खोने के डर से,
मैं भूलूँ,
कुछ पाने की चाह यहाँ?
जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??
तो इसी बात पर हो जाये महफूज़ भाई की कलम से निकली एक पुरानी रचना.........
लेखक ............महफूज़ भाई
salaam mehfooz bhai.............
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