06 अप्रैल 2012

ब्लॉग जगत की बड़ी शख्सियत गुरदेव समीर लाल.....संजय भास्कर

आज कई दिनों बाद ब्लॉग पढने के लिए ओपन किया तो सबसे पहले समीर लाल जी की  रचना  ....बुरा हाल है ये मेरी जिन्दगी का...... उसे पढने के बाद अचनाक गुरदेव समीर जी  की करीब दो साल पुरानी रचना |
की कुछ लाइन याद आ गई जो आपको भी याद होगी शायद....... !!!!


अर्थी उठी तो काँधे कम थे,
मिले न साथ निभाने लोग
बनी मज़ार, भीड़ को देखा,
आ गये फूल चढ़ाने लोग... !


समीर लाल जी ब्‍लॉगजगत की ऐसी शख्सियत हैं जिनकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है इनका लेखन जिस विषय पर भी हो प्रत्‍येक शब्‍द दिल को छूकर गुज़र जाता है चाहे किसी भी विषय पर लिखे शब्द अपने आप बनते चले जाते है जो उनकी ऊर्जावान जीवन शैली का प्रतीक है.........!




 .......... मुझे बहुत ही पसंद आई  आई समीर लाल जी के बारे में लिखना तो बहुत समय से चाहता था पर समय के आभाव के कारण नहीं लिख पाया पर आज इन पंक्तियो के याद आते ही समीर जी के लिए लिखने का समय निकल ही लिया और सोचा आप सभी को इस रचना से दोबारा रूबरू करवा दूं समीर जी की रचनाओ का कायल हूँ मैं और ब्लॉग जगत में शामिल होने के बाद करीब दो सालो से समीर जो पढ़ रहा हूँ उनके लिखने का अंदाज ही अलग है जो हमे बहुत ही भाता है .......समीर जी का ब्लॉग जब भी पढता हूँ तो बस एक ही शब्द ज़बान पर आता है जय हो गुरदेव समीर जी ! मुझे उनकी हर पोस्ट से कुछ न कुछ सिखने को मिलता है मैं हमेशा यही चाहता हूँ की समीर जी हमेशा मेरा मार्गदर्शन करते  रहें ...........!!!




दुनिया दिखावे की :--


अर्थी उठी तो काँधे कम थे,
मिले न साथ निभाने लोग
बनी मज़ार, भीड़ को देखा,
आ गये फूल चढ़ाने लोग...
दुनिया दिखावे की हो चली है. कोई भी कार्य जिसमें नाम न मिले, लोग न जाने- कोई करना ही नहीं चाहता. दिखावा न हो तो बस फिर मैं!!
जिस भी कार्य में मेरा फायदा हो, वो ही मैं करुँगा. संवेदनशीलता मरी. साथ मरी सहनशीलता. अहम उठ खड़ा हुआ दस शीश लेकर. एक कटे और दस और खड़े हो जायें. कोई झुकना ही नहीं चाहता. कोई सहना ही नहीं चाहता.
छोटी छोटी बातें, जो मात्र चुप रह कर टाली जा सकती हैं, वो इसी अहम के चलते इतनी बड़ी हो जाती हैं कि फिर टाले नहीं टलती.
कब और कैसे सब बदला, नहीं जानता मगर बदला तो है.
कुछ दिन पहले किसी बहाव में एक रचना उगी थी:


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दो समांतर रेखायें
साथ चल तो सकती हैं..
अनन्त तक..
लेकिन
मिल नहीं सकती...
मिलने के लिए उन्हें
झुकना ही होगा..
आओ!!
थोड़ा मैं झुकूँ
थोड़ा तुम झुको!!
यूँ तो
तुमसे मिलने की चाह में
मैं पूरा झुक जाऊँ
लेकिन
डर है कि
अधिक झुकने की
इस कोशिश में
टूट न जाऊँ मैं कहीं...
और
तुम्हें तो पता होगा!!
टूटे हुए वृक्ष सूख जाया करते हैं!!
- समीर लाल ’समीर’ 

इसी के साथ समीर जी की एक पुरानी आपको पढवाते है !
...............................समीर की लेखनी से बहुत प्रभावित हूँ समीर जी की लेखनी में बहुत दम है, समीर लाल जी बहुत ही लोकप्रिय लेखक व हर ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाले चर्चित टिप्पणीकार है। उनका स्वंय का जीवन भी किसी उपन्यास से कम नहीं है। उनके बारे में लिखना ही किसी बड़ी उपलब्धि है !
और एक बात हमे अबी तक समीर जी मिलने का सोभाग्य ही प्राप्त नहीं हुआ.....पर यह इच्छा कभी तो पूरी होगी !


-- संजय भास्कर

14 मार्च 2012

कुछ हट के--अग्रोहा धाम की यात्रा के कुछ पल ......संजय भास्कर

**********जय बजरंग बली*************
मेरी अग्रोहा धाम की सैर के कुछ पल
ब्लॉग पर इस बार कुछ हट आप सभी मित्रो के लिए
आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा सादर नमस्कार काफी दिनों से ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा रहा हूँ  पर अब आज अपने छोटे से यात्रा संस्मरण के साथ आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ
घुमने तो अक्सर जाना हो ही जाता है पर पहले कभी इतना विशेष ध्यान नहीं दिया पर इस बार अग्रोहा धाम गया तो  मंदिर को बारीकी से देखा व मंदिर के बारे में काफी जानकारी मिली जिसे आपके सामने चित्रों के साथ प्रस्तुत कर रहा हूँ !
ब्लॉग जगत दो घुमक्कड़ नीरज भाई ( मुसाफिर हूँ यारों )और संदीप भाई ( जाट देवता )जी तस्वीरों के साथ यात्रा संस्मरण लिखने के लिए जाने जाते है जो सभी ब्लॉग मित्रो की पसंद है ये जहाँ भी जाते है चित्रों के साथ पूरा संस्मरण लिखते है ।
इन्ही भाइयो से प्रेरणा पा कर मैं भी आज अपनी अग्रोहा यात्रा का विवरण लिखा है वो भी चित्रों के साथ
मुझे उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगा ............!!
ब्लॉग पर अबकी बार कुछ हट आप सभी मित्रो के लिए
अग्रोहा ( हरियाणा ) देहली रोड पर 190 K.M हिसार जिले में है जिसे महाराजा अग्रसेन जी की राजधानी जाना जाता है अभी कुछ दिन पहले अग्रोहा घुमने जाना हुआ ...............अग्रोहा है हमारे शहर से केवल 25 km ही पर कभी समय नहीं मिला जाने का पर इस शिवरात्रि को छुट्टी होने के कारण वहाँ जाने का मन बना ही लिया
....................आइये आपको भी अग्रोहा धाम की  सैर करवाते है!

 मंदिर का मुख्य द्वार 

मंदिर  के द्वार  पर बनी हाथी बड़ी मूर्ति जो आकर्षण का केंद्र है
मंदिर के उपरी भाग पर कृष्ण अर्जुन की मूर्ति बहुत ही आकर्षक है

मंदिर के बायीं और बनी शिव जी विशाल प्रतिमा 

अग्रोहा धाम प्राचीन कल से ही अनेको कथाये जुडी हुई है यहाँ का नवनिर्मित मंदिर पर्यटकों के लिए दर्शनीय स्थल  है यहाँ हमेशा पर्यटकों का आना जाना लगा ही रहता है । यहाँ का मुख्य आकर्षण मंदिर में टीले पर बनी 90 फुट ऊँची हनुमान जी की प्रतिमा  है जो राष्ट्रीय
 राजमार्ग से गुजरने वालो के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है !

 हनुमान जी की 90 फीट ऊँची प्रतिमा

यह प्रतिमा इसलिए आकर्षण का केंद्र हुई है इसकी उचाई बहुत ज्यादा है जो यहाँ से गुजरने वाले यात्रियों का ध्यान अनायास ही इस और चला जाता है ।

मंदिर के दाहिनी और बनी सुंदर प्रतिमा

मंदिर के पिछले भाग में बनी मुर्तिया जो समुद्र मंथन का दर्शया दिखा रही है


आइये आपको कुछ और जानकारी देते है जो मंदिर के पुजारी द्वारा हमे पता चली ,
 इस मूर्ति को बनाने के पीछे एक चमत्कारिक घटना बताई जाती है । जो सन 1997 की है बताया जाता है
 इस मंदिर में नोकायण स्थल के लिए जब खुदाई की जा राही थी , तो अचानक खुदाई के समय जमीन के गर्भ से बजरंग बली की पाषण मूर्ति मिली ।
जो करीब २ फीट ऊँची थी ............बताया जाता है जब यह खबर लोगो के कानो में पहुची तो आस पास के
शहरो से काफी लोग इकट्ठे हो गए ........सारा दिन कीर्तन चलता रहा उसके बाद इस बड़ी मूर्ति का निर्माण करवाया गया ।
जिसे बनाने में पूरे दो वर्ष लगे । जिसे कोलकाता के किसी मूर्तिकार ने बनाया है !
......और एक खास बात जो हमे बाद में किसी शिक्षक से पता चली इस .....इस प्रतिमा में 50 करोड़ बार  ' श्री राम ' नाम लिख कर डाले गए है जो देश के विभिन्न कोनो से हनुमान जी व राम भगत लोगो द्वारा लिखवाए गए है ।
इस प्रकार इस प्रतिमा का महत्व बहुत ज्यादा है हर वर्ष हनुमान जयंती पर यहाँ भव्य मेले का आयोजन किया जाता है जिसमे दूर दराज से श्रदालु यहाँ आते है  मान्यता  है की यहाँ आने पर श्रदालुओ की मनोकामनाएं पूर्ण होती है !
 एक और खास बात मंदिर के विषय में  
इस मंदिर की नीचे के भाग में एक गर्भ गुफा भी है जिसके अन्दर कई स्थानों पर मुर्तिया है जिसे वैष्णो देवी गुफा की तरह बनाया गया है ! गुफा के अन्दर सभी देवियों की मुर्तिया स्थापित है गुफा की यात्रा करने में करीं अध घंटे का समय लगता है सभी मनोरंजन हेतु सभी साधन है .....बाहर से आने वालो के लिए ठहरने की सुविधा भी है  इसी के साथ संस्मरण समाप्त होता है ।


 आशा है आप मित्रो का जब भी कभी इस तरफ आना हो आप भी अग्रोहा धाम के दर्शन जरूर करें उम्मीद है सभी को पसंद आएगा !

................. धन्यवाद !!!!!!


-- संजय भास्कर 


 

06 फ़रवरी 2012

......अनाम रिश्ते.....संजय भास्कर

आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा सादर नमस्कार काफी दिनों से व्यस्त होने के कारण ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा रहा हूँ  पर अब आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ अपनी नई कविता के साथ उम्मीद है आप सभी को पसंद आयेगी..!!




कुछ रिश्ते अनाम होते है 
पर वो रिश्ते दिल के करीब होते है 
अनाम होने पर भी रिश्ते 
........... कायम रहते है !
पर जब भी उन्हें नाम देने की कोशिश 
.............की जाती है !
तो जाने क्‍यूँ
वो रिश्ते लड़खड़ाने लगते है 
नाम से रिश्ते तो बन्ध जाते है !
पर बेनाम आगे बढते जाते है 
न कोई बंधन और न ही कोई सहारा 
सच्ची मुस्कान लिए होते है 
..............अनाम रिश्ते !
सभी बन्धनों से मुक्त ,
बिना किसी सहारे के लम्बी दूरी तक 
साथ निभाते है अनाम रिश्ते ! 
हमेशा दिल के पास होते है 
ये अनाम रिश्‍ते
अपनेपन का नाम साथ लेकर ही
.............बस खास होते है !


-- संजय भास्कर

23 जनवरी 2012

सभी के दिलों में हमेशा अमर रहेंगे महानायक - नेताजी सुभाषचन्द्र बोस

जिन लोगों ने देश की स्वतन्त्रता के लिए अपना सर्वस्व यहाँ तक कि प्राण तक न्यौछावर कर दिया,नेताजी सुभाषचन्द्र बोस भी उन महान सच्चे स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों में से एक हैं जिनके बलिदान का इस देश में सही आकलन नहीं हुआ  देश को स्वतन्त्रता सिर्फ गांधी जी और नेहरू जी के कारण ही मिली। हमारे भीतर की इस भावना ने अन्य सच्चे स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों को उनकी अपेक्षा गौण बना कर रख दिया। हमारे समय में तो स्कूल की पाठ्य-पुस्तकों में यदा-कदा “खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी…”, “अमर शहीद भगत सिंह” जैसे पाठ होते भी थे किन्तु आज वह भी लुप्त हो गया है

सुभाष चंद्र बोस
Subhash-Chandra-Bose-2.jpg
     पूरा नाम           सुभाष चंद्र बोस
    प्रचलित नाम           नेताजी
    जन्म           23 जनवरी, 1897
    जन्म भूमि           कटक, उड़ीसा, भारत
    अविभावक          जानकीनाथ बोस, प्रभावती
    धर्म          हिन्दू
   आंदोलन          भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
   विद्यालय         प्रेज़िडेंसी कॉलेज, स्कॉटिश चर्च कॉलेज, केंब्रिज विश्वविद्यालय
   शिक्षा         स्नातक
  प्रमुख संगठन         आज़ाद हिन्द फ़ौज़
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का      जन्म 23 जनवरी 1897 में उड़ीसा में कटक शहर में हुआ था सुभाष ने 7 जनवरी 1942 को बर्लिन में आजाद हिंद फौज की स्थापना की| उस समय इस फौज में लगभग 4000 जवान थे| इस फौज का उद्देश्य भारत को अंग्रेजी सरकार से आजाद कराना था| धीरे धीरे आजाद हिंद फौज में सैनिकों की संख्यां बढती गयी और लगभग तीस हजार तक सैनिकों की संख्या पहुँच गयी| जापान के प्रधानमन्त्री ने सुभाष को भारत कि आजादी में सहायता देने का वचन दिया था| 5 जुलाई वर्ष 1943 को नेताजी ने सिंगापुर टाउन हाल के पास एक भारी जनसभा में घोषणा करी की हम भारत को आजाद कराके रहेंगे| उन्होंने लोगो से यह भी कहा कि 'तुम मुझे खून दो में तुम्हे आजादी दूंगा'| आजाद हिंद फौज के सैनिकों ने 18 मार्च 1944 को असम कि धरती पर प्रवेश किया| लेकिन अमेरिका ने जब हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम डाले तब जापान सरकार ने अपने हथियार डाल दिए| हजारों भारतीय सैनिकों को भी बंदी बना लिया गया था| सुभाष चन्द्र बोस अपने दुश्मनों के हाथों नहीं मरना चाहते थे इसलिए जंग को जारी रखने के लिए उन्होंने 17 अगस्त 1945 को सिंगापुर से टोकियो कि और उड़ान भरी| लेकिन दुर्भाग्यवश उनके विमान किसी तरह कि खराबी हो गयी और उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया|

भारत सरकार ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को 1992 में 'भारत रतन' से सम्मानित किया| आजादी के लिए उन्होंने जितने भी कार्य और प्रयास किये उन्हें भुलाया नहीं जा सकता| वे हम सभी कि दिलों में हमेशा अमर रहेंगे
सुभाष चंद्र बोस, प्यार नेताजी के रूप में कहा जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक था भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सफल परिणति में सुभाष चन्द्र बोस का योगदान कम नहीं है. उन्होंने भारतीय इतिहास के इतिहास में अपनी सही जगह का खंडन किया है उन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी ( आजाद हिंद फ़ौज ) की स्थापना के लिए भारत से ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने और भारतीय जनता के बीच पौराणिक दर्जा हासिल किया !

 सुभाष भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय देश भर में घूमें और निष्कर्ष निकाला-
हमारी सामाजिक स्थिति बद्तर है, जाति-पाति तो है ही, ग़रीब और अमीर की खाई भी समाज को बाँटे हुए है। निरक्षरता देश के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है। इसके लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है। सुभाष चंद्र बोस
कांग्रेस के अधिवेशन में सुभाष चंद्र बोस ने कहा-
मैं अंग्रेज़ों को देश से निकालना चाहता हूँ। मैं अहिंसा में विश्वास रखता हूँ किन्तु इस रास्ते पर चलकर स्वतंत्रता काफ़ी देर से मिलने की आशा है।
क्रान्तिकारियों को बोस ने सशक्त बनने को कहा। वे चाहते थे कि अंग्रेज़ भयभीत होकर भाग खड़े हों। वे देश सेवा के काम पर लग गए। दिन देखा ना रात। उनकी सफलता देख देशबन्धु ने कहा था-
मैं एक बात समझ गया हूँ कि तुम देश के लिए रत्न सिद्ध होगे।
सुभाषचन्द्र बोस उन महान सच्चे स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों में से एक हैं जिन्होंने देश की स्वतन्त्रता के लिए अपना सर्वस्व यहाँ तक कि प्राण तक न्यौछावर कर दिया !

नेताजी ने हमें -"जय हिन्द," और " तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूँगा" का महामन्त्र दिया ।
स्वदेशाभिमान के बारे में नेताजी न कहा था.....

यदि
स्वदेशाभिमान सीखना है,

तो
मछली से सीखो ...

जो
स्वदेश (पानी ) के लिए
तड़प - तड़प कर
अपनी जान दे देती है।



मेरी पसंद और नेता जी को समर्पित यह कविता आपको समर्पित कर रहा हूँ ....!


है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं।
है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल पर्वत झुक जाया करते हैं ।।
अक्सर दुनियाँ के लोग समय में चक्कर खाया करते हैं।
लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, इतिहास बनाया करते हैं ।।

यह उसी वीर इतिहास-पुरुष की अनुपम अमर कहानी है।
जो रक्त कणों से लिखी गई,जिसकी जयहिन्द निशानी है।।
प्यारा सुभाष, नेता सुभाष, भारत भू का उजियारा था । 
पैदा होते ही गणिकों ने जिसका भविष्य लिख डाला था।।

यह वीर चक्रवर्ती होगा , या त्यागी होगा सन्यासी।
जिसके गौरव को याद रखेंगे, युग-युग तक भारतवासी।।
सो वही वीर नौकरशाही ने,पकड़ जेल में डाला था ।
पर क्रुद्ध केहरी कभी नहीं फंदे में टिकने वाला था।।

बाँधे जाते इंसान,कभी तूफ़ान न बाँधे जाते हैं।
काया ज़रूर बाँधी जाती,बाँधे न इरादे जाते हैं।।
वह दृढ़-प्रतिज्ञ सेनानी था,जो मौका पाकर निकल गया।
वह पारा था अंग्रेज़ों की मुट्ठी में आकर फिसल गया।।

जिस तरह धूर्त दुर्योधन से,बचकर यदुनन्दन आए थे।
जिस तरह शिवाजी ने मुग़लों के,पहरेदार छकाए थे ।।
बस उसी तरह यह तोड़ पींजरा , तोते-सा बेदाग़ गया।
जनवरी माह सन् इकतालिस,मच गया शोर वह भाग गया।।

वे कहाँ गए, वे कहाँ रहे,ये धूमिल अभी कहानी है।
हमने तो उसकी नयी कथा,आज़ाद फ़ौज से जानी है।।


सुभाष चन्द्र बॉस जी पर लिखी ये कविता अवनीश आनंद जी के ब्लॉग से मिली

छवि और जानकारी गूगल से साभार 

भारत माता से महान सपूत को मेरा सलाम 

-- संजय भास्कर 

27 दिसंबर 2011

सांपला ब्लोगर मिलन ना भूलने वाले पल......संजय भास्कर

सांपला ब्लोगर मिलन ना भूलने वाले पल
साँपला ब्लोगेर मिलन के कुछ पल ऐसे थे जिन्हें शायद सभी कभी नहीं भूल पाएंगे
पूरे उत्साह के साथ  आखिर ढूंढते -ढूंढते हम भी पहुच ही गए साँपला आखिर ब्लॉगर मिलन में जाना था !

मुख्य द्वार
तारीख...24 दिसंबर 2011
स्थान...रेलवे रोड धर्मशाला, सांपला, हरियाणा
वक्त...दोपहर 12 से शाम 5 बजे
मेज़बान...राज भाटिया जी, अंतर सोहेल, सांपला सांस्कृतिक मंच के सदस्य


सभी खड़े होकर फोटो खिचवाते हुए
उपस्थिति...


राज भाटिया (पराया देश, छोटी छोटी बातें)
इंदु पुरी (उद्धवजी)
अंजु चौधरी (अपनों का साथ)
वंदना गुप्ता (जख्म…जो फूलों ने दिये, एक प्रयास)
खुशदीप सहगल (देशनामा, स्लॉग ओवर)
महफूज अली (लेखनी…, Glimpse of Soul)
यौगेन्द्र मौदगिल (हरियाणा एक्सप्रैस)
अलबेला खत्री (हास्य व्यंग्य, भजन वन्दन, मुक्तक दोहे)
संजय अनेजा (मो सम कौन कुटिल खल…?)
राजीव तनेजा (हँसते रहो, जरा हट के-लाफ्टर के फटके)
संजू तनेजा
जाट देवता (संदीप पवाँर) (जाट देवता का सफर)
संजय भास्कर (आदत…मुस्कुराने की)
कौशल मिश्रा (जय बाबा बनारस)
दीपक डुडेजा (दीपक बाबा की बक बक, मेरी नजर से…)
आशुतोष तिवारी (आशुतोष की कलम से)
मुकेश कुमार सिन्हा (मेरी कविताओं का संग्रह, जिन्दगी की राहें)
पद्मसिंह (पद्मावली)
सुशील गुप्ता (मेरे विचार मेरे ख्याल)
राकेश कुमार (मनसा वाचा कर्मणा)
सर्जना शर्मा (रसबतिया)
शाहनवाज़ (प्रेम रस)
अजय कुमार झा (झा जी कहिन)
कनिष्क कश्यप (ब्लॉग प्रहरी)
केवल राम (चलते-चलते, धर्म और दर्शन)




अंतर सोहेल, मैं ,केवल राम ,जाट देवता राजेश सहरावत जी गन्ने का आनद उठाते हुए


अंतर सोहेल ( मुझे शिकायत है, सांपला सांस्कृतिक मंच )
( जिन सज्जनों के नाम मुझसे छूट गए हो तो माफ़ी  )


  श्रीमती राकेश , सर्जना शर्मा ,केवल राम जी , श्री एवं श्रीमती राज़ भाटिया ,पीछे संजय भास्कर यानी मैं , वंदना गुप्ता जी एवं संजू तनेजा जी 

हिंदी ब्लॉगिंग का सबसे यादगार दिन

 पदम सिंह जी राज भाटिया जी के गले लगते हुए और इंदु बुआ जी

सर्जना शर्मा, वंदना गुप्ता,अलबेला खत्री, कुश्दीप जी 

सांपला ब्लोगर मीट ना भूलने वाले पल 

और सबसे अंत में अगले दिन का सभी का ग्रुप फोटो 


ज्यादा समय न होने कारन ज्यादा नहीं लिख पाया पर आप तस्वीरों को देखर ही अंदाजा लगा ले !
 विस्तृत सपला रिपोर्ट आप सभी जाट देवता ,खुशदीप सहगल जी, अजय झा जी के ब्लॉग पर पढ़ ही चुके है

ब्लॉगर स्नेह मिलन की :-
कुछ फोटोग्राफ्स  जाट देवता (संदीप पवाँर) कुछ अजय कुमार झा जी से साभार 


-- संजय भास्कर