19 जुलाई 2011

' नीम ' पेड़ एक गुण अनेक..........>>> संजय भास्कर


नीम के बारे बचपन से सुना था यह कई प्रकार के रोगों में काम आता है पर कुछ दिनों पहले जब मैं अस्वस्थ था तो नीम के बारे में बहुत सी जानकारियां मिली नीम के पत्तो का काफी उपयोग भी किया गया मेरे लिए | नीम हमारे भारतीय मूल कि प्रजाति है जो सबसे अधिक मूल्यवान है लेकिन आज कल कि पीढ़ी को इसके बारे में बहुत ही कम जानकारी  है |  नीम बहुत ही गुणकारी पेड़ है नीम की पत्तिया , छाल , नीम के फल सभी बहुत ही गुणकारी है | नीम की पत्तियों का धुँआ मच्छरों और कीड़े मकोडो को दूर भगाता है कुछ समय पहले तक इसका इस्तेमाल बड़े -बड़े गोदामो में नीम की पत्तियों का धुआं फैका जाता था जिसके कारण भंडारित अनाज में कीट पतंगे नहीं लगते थे , नीम के छाल से कई प्रकार के रसायन मिलते है जो चमड़ा रंगने  के काम आते है नीम का उपयोग तेल साबुन , दन्त मंजन बनाने में भी किया जाता  है | नीम के वृक्ष में अन्य पेड़ की अपेक्षा अधिक ओक्सिजन होती है | आदि काम में हमारे ऋषि मुनि भी कहा करते थे की नीम हवा को साफ़ करता है इसके हर भाग में औषधिक गुण  है इसी कारण हमारे बुजुर्ग सदियों से घरो के समीप नीम के पेड़ लगाते आये है |
आदि काल से इसका नाम उन देवताओ के साथ लिया जाता है जो रोगों और बीमारियों से हमारी रक्षा करते आये है सदियों से किसान अनाज को कीड़ो से बचाने  के लिए नीम का पत्तो का प्रयोग करता आया है |  गावो में चरम रोगों होने पर भी नीम की पत्तियों को उबाल कर नहाने की सलाह दी जाती है, पेट के कीड़ो और गठिया रोगों में भी नीम का तेल दवा के रूप में काम आता है | सदियों से हमारे पूर्वज नीम को घरेलु चिकित्सक के रूप में प्रयोग करते आये है  आयुर्वेद में नीम को " सर्वरोग निवारण " की संज्ञा दी गई है | और भी ऐसी बहुत सी बीमारियाँ है जिसमे नीम का उपयोग होता है  |


गाव देहात के लोगो पुराने समय से नीम के गुणों को जानते आये है परन्तु  आज नीम का उपयोग पूर्ण  रूप से नहीं हो रहा है गावो में अक्सर लोग नीम का दातुन के रूप में इस्तेमाल करता है जो मुह के कई रोगों से रक्षा करता है हम खुद भी जब भी गाव जाते है टूथब्रश का इस्तेमाल बहुत ही कम करते है दातुन का ही प्रयोग करते है
..............घर के आँगन में नीम के पेड़ को लेकर कितने ही सांस्कृतिक बिम्ब हमारे सामाजिक जीवन में उभरे है , हिंदी साहित्य तथा गीतों में भी नीम का खुलकर बखान हुआ है  साप के काटने पर भी नीम की पत्तियों खिलाने का प्रचलन भी देहातो में है नीम के अनेको गुण है  जिन लोगो ने इसे गंभीरता से जांचा परखा है उनका मानना है नीम अपने से दूसरी प्रजाति के पेड़ पौधों को भी सुरक्षा प्रदान करता है |
.........नीम में में विशेषताओं का खजाना  लबालब भरा पड़ा है जो सिर्फ अधिक फसलो से उत्पादन में हमारी मदद करता है बल्कि भयंकर बीमारियों के उपचार हेतु प्रयोग में लाया जता है |
नीम की महता को देखते हुए आज आवस्यकता इस बात की है की इस पेड़ को बहुमूल्य राष्ट्रीय  संपदा  घोषित किया जाए ............!
चित्र :- गूगल देवता से साभार 


-- संजय भास्कर

11 जुलाई 2011

अस्वस्थता के समय लिखी कुछ क्षणिकायें उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगी.. .......संजय भास्कर

आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा ........सादर नमस्कार ............अस्वस्थता के कारण  काफी दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था पर अब  आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ । अस्वस्थता के कारण आराम करते समय हमेशा ही कुछ लाइन दिमाग में आती थी जिन्हें क्षणिका के रूप में पढवाता हूँ उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगी.........!



(1.)  गजब


अनपढ़ विधायक
के साथ
गजब हो गया
पता चला वह एजुकेशन 
मिनिस्टर हो गया !


( 2.)  सफ़र


दोस्ती का सफ़र लम्बा हुआ
 तो क्या हुआ  ?
थोडा तुम चलो
थोडा हम चलेंगे
और फिर रिक्शा कर लेंगे !


( 3.)  कमाल


 21 वी सदी में देखो
लोकतंत्र का कमाल अब पढ़े लिखे भी
वोटिंग मशीन पर
लगाते है अंगूठे से निशान !


(4.)  अवार्ड 


आज कुछ अध्यापक
न स्कूल जाते है
और न कभी पढ़ते है
करके चापलूसी अधिकारियो कि
बेस्ट टीचर अवार्ड पाते है !


( 5.)  फिल्मे 


आजकल चल रही फिल्मे
कर रही है कमाल
जिन्हें देख शर्म भी खुद
शर्म से हो रही है लाल ..........!





-- संजय भास्कर




21 जून 2011

शहीद स्मारक ही दिलाते है शहीदों की याद..........संजय भास्कर

  आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा ..........सादर नमस्कार .........कई दिनों से कविताये लिखने के बाद सोचा आलेख लिखा जाये  लगभग कई  दिन के अवकाश के बाद  पुन: उपस्थित हूँ । आज सभी शहीद  की कुर्बानियों को भूलते जा रहे है लेकिन जब कभी भी किसी शहीद स्मारक को देखते है तो उसकी याद आती है इसी पर यह आलेख लिखा है आशा करता हूँ आप सभी को पसंद आएगा  ...! 
 शहीद स्मारक  ही दिलाते है शहीदों की याद

आज हम जिस आजाद भारत में सांस ले रहे हैं, वह शहीदों की कुर्बानियों का ही फल है। जिन स्थानों पर



देशभक्तों ने अपना लहू बहाया वहा पर अभी तक स्मारक नहीं बने। जो बने भी हैं, वे लुप्त होने के कगार पर हैं। 1857 के गदर से लेकर अगस्त क्रांति तक लगातार आंदोलन हुए। सभी आंदोलनों में आगरा जनपद के कई देशभक्तों ने जोरदारी से भाग लिया। इन रणबाकुरों ने जिन स्थानों को क्रांति का केंद्र बनाया, युवा पीढ़ी उनसे अनजान है।
वह नहीं जानती कि उनके आसपास में भी ऐसे स्थल हैं, जहा से आजादी की लड़ाई लड़ी गयी। नूरी दरवाजा, हींग की मंडी और मोती कटरा में सन् 1926 से 29 तक सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त, राजगुरु, सुखदेव आदि ने फैक्ट्री का संचसलन किया। जहा बम बनाए जाते थे। नूरी दरवाजे वाले कमरे जरूर सभी की निगाह में हैं। लेकिन अन्य कमरे कहां हैं, इसकी जानकारी लोगों को नहीं।
   सन् 1942 तो स्वाधीनता आंदोलन की अंतिम क्रांति थी। चमरौला रेलवे स्टेशन पर एक आंदोलन किसानों ने किया। जिसमें अंग्रेजों की गोलियों से उल्फत सिंह, साहब सिंह, खजान सिंह, सोरन सिंह आदि शहीद हो गए। 125 नागरिक घायल हुए थे। यहा एक स्मारक बना हुआ है, जो धीरे-धीरे ध्वस्त होता जा रहा है।
इस घटना के बारे में स्थानीय लोग भी अनजान बने हुए हैं। लेकिन शहीद स्मारक अवश्य सभी शहीदों की याद दिलाता है। जिसे विकसित और सुरक्षित रखने की जरूरत है।
चित्र :- गूगल से साभार


-- संजय भास्कर

10 जून 2011

हम भारतीय है भारतीय कहलायेगे ........ संजय भास्कर

 आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा ............सादर नमस्कार ............लगभग पंद्रह  दिन के अवकाश के बाद मैं आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ । और अपनी नई कविता पढवाता हूँ उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगी ...! 




हम अपने देश में नई क्रांति लायेगे ,
हम भारतीय है भारतीय कहलायेंगे   |
हम भारत के चमन में
महक सदा खिलायेगे  |
देश सेवा कर देश को बड़ा बनायेगे 
भाई चारे की भावना पैदा कर 
हम सभी एक हो जायेगे |
अपने देश की सभ्यता है 
सबसे महान 
हम अपने देश पर तन मन धन लुटाएंगे 
अपने देश के लिए 
न्योछावर हो जायेंगे |
हम अपने देश में  नई क्रांति लायेगे ,
हम भारतीय है भारतीय कहलायेंगे  |
हम भारत देश के बच्चे है 
भारत की संतान कहलायेगे 
भारत देश की अखंडता के लिए 
अपना सर्वस्त्र लुटायेगे
हम अपने देश में  नई क्रांति लायेगे ,
 हम भारतीय है भारतीय कहलायेंगे...........!


 -- संजय भास्कर 

25 मई 2011

..........बदलते हालात........संजय भास्कर


कपडे हो गए छोटे 
     शर्म कहाँ रह गई आज !
गर्भ में कर देते है भ्रूण हत्या 
     ममता कहाँ रह गई आज  !
अनाज हो गया मिलावटी 
     तो स्वाद कहा रह गया आज !
फूल हो गए प्लास्टिक के 
      खुशबू कहाँ रह गई आज !
छात्रों के हाथ में हो गए मोबाइल 
      शिक्षा कहाँ रह गई आज !
इंसान हो गया लालची धन का 
      दया भावना कहाँ रह गई आज !
युवा वर्ग हो रहा है अशलीलता का शिकार 
     देश भक्ति भक्ति कहाँ गई आज  !

-- संजय भास्कर