20 अक्टूबर 2010

ऐसी खुशी नहीं चाहता .............!!!!!

ऐसी खुशी नहीं चाहता
जो किसी का दिल दुखाने से मिले,
हंसी ऐसी नहीं चाहता जो किसी को रुलाने से मिले
उस दौलत का क्या करे जो अपनों से दूर है |
जो पैदा करती दिल में गुरूर है
सर ढकने को छत हो
खाने को रोटी हो भूंखे पेट कोई सोये ना ,
नहीं चाहिए वो राम जो इंसानों में फर्क करे
आपस में बैर व धरती को नरक करे
कब आएगा वो दिन
जब उंच नीच ख़तम होगा
मानव सभी की जात होगी मानवता ही धरम होगा
तभी मिलेगी ख़ुशी जब मन को
जब सारी दुनिया समान होगी .........

.......संजय कुमार भास्कर

17 अक्टूबर 2010

अजब--गजब...........वह व्यक्ति कौन था ?

एक व्यक्ति  था जो............

31   वर्ष की आयु में व्यवसाय में हरा |
32   वर्ष की आयु में विधान सभा में हरा |
34  वर्ष की आयु में दोबारा व्यवसाय में हरा |
35   वर्ष की आयु में प्रेमिका से छला गया  |
36  वर्ष की आयु में तंत्रिकातंत्र में कमजोरी पैदा होने के कारण परेशान रहा | 
38   वर्ष की आयु में दोबारा चुनाव में हरा |
43  वर्ष की आयु में उम्र में कांग्रेस के चुनाव  में पराजित हुआ |
46   वर्ष की आयु में दोबारा कांग्रेस के चुनाव  में पराजित हुआ |
49   वर्ष की आयु में तीसरी बार पराजित हुआ |
56   वर्ष की आयु में दोबारा उप - राष्ट्रपति के चुनाव में हरा |


वह व्यक्ति कौन था______________








13 अक्टूबर 2010

.................क्या यही है मेरे देश का हाल ?

 क्या यही है मेरे देश का हाल |
धार्मिक कट्टरवाद अपना कर ,  नौजवानों  को मरवा दो 
भाई को भाई से लड़वाकर खून की नदियाँ बहा दो |
कुछ को मंदिर के नाम, कुछ को मस्जिद के नाम पर
अलग थलग कर दो |
लगता हा नेताओ ने बेरोजगारी दूर करने का 
यही उपाय सुझा है |
वे जनता से चाहते करवानी पूजा है 
लगता है वे बेरोजगारी जरूर हटायेंगे |
नौजवानों की शक्ति को भड़काकर महाभारत फिर दोहरायेंगे |
( चित्र - गूगल से साभार )

..........संजय कुमार भास्कर

10 अक्टूबर 2010

.................अपना घर

 जवान बेटी को बाप ने कहा 
जाना होगा अब तुम्हे अपने घर ,
बी. ए  की करनी वही पढाई 
ढूंढ़ लिया तेरे लायक वर ,
अब तक तुम हमारी थी 
पर अब यहाँ से जाना होगा 
जुदा होकर हमसे 
नया घर बसाना होगा ,
बेटी ने बहु बनकर बी. वाली बात दोहरायी
सुनकर उसकी बातें सास गुर्राई 
अगर आगे ही पढना था 
तो पढ़ती ' अपने घर '
बहु है हमारी अब सेवा कर ,
बेटी ने सोचा और समझा 
कौन सा है मेरा घर 
या फिर बेटिया दुनिया में 
होती है ........बे घर  | 

........संजय


06 अक्टूबर 2010

................कुछ फ़र्ज़ भी निभाना है


कुछ काम भी करना है कुछ फ़र्ज़ भी निभाना है ,
खुद को मिटा कर भी ये देश बचाना है |
 जो दुश्मन सीमा पर है उसे मिटा देंगे 
गद्दार जो अन्दर है उनको भी मिटाना है |
कोई धर्म या मजहब हो सब भाई भाई हैं
रूठे हुए भाइयो को सीने से लगाना है |
ये देश सलामत है तो हम भी सलामत है ,
हर देश के वासी को यह याद दिलाना है |
भूंखा न रहे कोई न कोई नंगा हो
ये काम मुश्किल
है  पर करके दिखाना है |
खेतो में हमारे भी सोने के खजाने है ,
इक फसल
मोहब्बत की दिल में भी उगाना है |
ये गर्व हो हर इक को भारत का मै वासी हूँ
इस शान से जीने का अंदाज सिखाना है |



...........संजय भास्कर