10 अप्रैल 2010

ज़माना कहेगा क्या बात है

दोस्त को भुलाना गलत बात है ,
दोस्ती न निभाना भी गलत बात है ,
दोस्ती में दिल दुखाना भी गलत बात है ,
दोस्ती का तो जिंदगी भर साथ है 
अगर भूल गए तो सिर्फ खली है 
अगर साथ रहे तो ज़माना कहेगा क्या बात है |


09 अप्रैल 2010

मुझको मेरी तन्हाईयाँ अक्सर बुलाती हैं


 मुझको मेरी तन्हाईयाँ अक्सर बुलाती हैं,
और फिर मुझे तेरी यादों से नहलाती हैं।
वो जो खुशबु का झोंका गुज़रा मेरे पास से ,
तेरी जुल्फों की कैद से छूटी हवा कहलाती हैं।
आँखें खुली रहती हैं तो दिखता नहीं कुछ भी ,
बंद आँखें ही तो मुझे सबकुछ अब दिखलाती हैं।
चीड़ों की चोटी पर बरसे चन्दन जैसी जो चांदनी,
एक आशिक के चेहरे पर माशूक का नूर कहलाती हैं।
जो भी जख्म मिले हैं मुझको तेरे सजदे में जानम,
तुझको छूकर आती हवा उन जख्मों को सहलाती हैं।
भटक रहा हूँ नील गगन में आवारा बादल सा मैं,
तेरी यादें टकरा कर उनको सावन सा बरसाती हैं।

 मित्र निहार खान के ब्लॉग से ये पंक्तिया आप

एक सवाल..........

एक सवाल बाप ने अपनी बेटी को गिफ्ट देकर बोला ,

भूख लगे तो खा लेना ,

प्यास लगे तो पी लेना   ,

और सर्दी लगे तो जला लेना ,

बताओ क्या था गिफ्ट ,
एक दोस्त ने मुझसे पुछा है , मै तो नहीं बता पाया 
सोचा अपने ब्लोगेर्स मित्रो से ही क्या न पूंछ लू  |
आदरणीय मित्रो जरूर बताये...........
 
 

08 अप्रैल 2010

यौन शोषण के खिलाफ आचार संहिता शुरू


भारत की सांस्कृतिक पहचान को सेक्स पर्यटन के कलंक से बचाए रखने के लिए सरकार ने आचार संहिता तय कर ली है, जिसके तहत होटलों से लेकर टूर आपरेटरों और एयरलाइनों के निदेशकों से लेकर कर्मचारियों तक पर जिम्मेदारी होगी। राज्यों से मशविरे के बाद इसे अंतिम रूप दे दिया गया है।
माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन, यानी आठ मार्च से शुरू  हो चुकी है  
गोवा, उड़ीसा व आंध्र प्रदेश समेत दूसरे भारतीय पर्यटन स्थलों पर सेक्स पर्यटन व बाल यौन शोषण के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब हो रही देश की छवि से परेशान सरकार ने जिम्मेदारी तय करने का प्रारूप तैयार किया है।
अंतराराष्ट्रीय संस्थाओं के अलावा राष्ट्रीय महिला आयोग से विचार-विमर्श के बाद 'सेफ एंड आनरेबल टूरिज्म' के लिए आचार संहिता बना ली है। राज्यों के साथ साथ पर्यटन से जुड़े सभी क्षेत्रों से भी मशविरा किया जा चुका है।
  बड़ी संख्या में पर्यटकों की यौन लोलुपता का शिकार हो रहे हैं।
गौरतलब है कि आचार संहिता के जरिए न सिर्फ इसकी रोकथाम के प्रति जागरूकता लाई जाएगी बल्कि निगरानी करने वाली स्टीयरिंग कमेटी को रिपोर्ट भी देनी होगी। यानी पर्यटन स्थलों की छवि बिगड़ी तो उनकी छवि भी नहीं बचेगी जो या तो अपने फायदे के लिए इसे बढ़ावा दे रहे या नजरअंदाज कर रहे हैं।

06 अप्रैल 2010

हकदार नहीं इस सम्मान का

हकदार नहीं इस सम्मान का

दे दिया जितना तूने

पत्थर को जिंदा बतलाकर

बड़ा अहसान किया तूने

दोस्तों से सिर्फ पहचान मेरी

नहीं मुझे कोई आसमां छूने


---मलखान सिंह आमीन




(संजय जी द्वारा अपने ब्लॉग पर मेरा परिचय करवाने पर कुछ पंक्तियाँ मेरी तरफ से)