05 नवंबर 2010

................. दीपावली की हार्दिक शुभकामाएं !



आदत......मुस्कुराने की
की तरफ से सभी मित्रो और पाठको को दीपोत्सव की की बहुत बहुत शुभकामनाये !

.............संजय कुमार भास्कर 

02 नवंबर 2010

................सिन्दूर बनके सजता हूँ |



खुशी या गम हो तेरे आंसुओं में ढलता हूँ
तुझे ख़बर है तेरी चश्मे-नम में रहता हूँ
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क्या हुवा जो तेरा हाथ भी न छू सका
तेरे माथे की सुर्ख चांदनी में जलता हूँ
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है और बात तेरे दिल से हूँ मैं दूर बहुत
तुम्हारी मांग में सिन्दूर बनके सजता हूँ
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मैंने माना तेरी खुशियों पर इख्तियार नही
तेरे हिस्से का गम खुशी खुशी सहता हूँ
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तेरा ख्याल मेरे दिल से क्यों नही जाता
जब कभी सामने आती हो कह नही पाता
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तमाम बातें यूँ तो दिल में मेरे रहती हैं
तुम्हारे सामने कुछ याद ही नही आता |
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चित्र :- ( गूगल से साभार  )

नासवा जी ने इतनी सुन्दरता से लिखा कि मैं अपने ब्लॉग पर ही ले आया 

नासवा जी कि कलम से निकली एक बेहतरीन रचना 
दिगम्बर नासवा जी के ब्लॉग से ये कविता आप तक  पहुंचा रहे है संजय भास्कर 


30 अक्टूबर 2010

..........क्या चीज है यह जिंदगी ?

 जिस राह से भी गुजरे 
एक नाम सुना जिंदगी |
हमने भी चाहा कोई हमको बता दे 
क्या चीज है यह जिंदगी |
थके हुए राही ने कहा 
रुकना ही है जिंदगी 
अपाहिज ने कहा 
चलना ही है जिंदगी |
गरीबी में तड़पते हुए ने कहा 
पैसा ही है जिंदगी  |
खुशियों में डूबे किसी ने कहा 
प्यार ही प्यार है जिंदगी  |
मगर कोई हमसे भी तो पूछे 
क्या चीज है जिंदगी 
........पर मैं समझता हूँ 
ठोकर खाकर संभल जाने का नाम ही  है 
..................शायद जिंदगी | 
चित्र :- ( गूगल देवता से साभार  )

...............संजय कुमार भास्कर

25 अक्टूबर 2010

.............मेरी प्यारी बहना ?


 मेरी प्यारी बहना 
आज मन कर रहा है कि मैं दू तुम्हे कुछ न कुछ 
पर क्या दू है ही क्या पास मेरे 
हूँ तो एक छोटा सा कवि
कविता ही है मेरे पास 
दुआए ही दे सकता हूँ खुदा कि इच्छा से 
जो रक्खे सदा तुम्हे खुश 
तुम्हारे नए जीवन में ,
मेरी दुआ है तू भारती भारतीयता का सदा पालन करें | 
तू जिस आँगन में जाये वहाँ सदा रौशनी फैलाये 
धर्म करम मान मर्यादा से घर को सजाये ,
तेरे आँगन  में सदा गुलाब खुशियों के  महके 
तू सबको अपनाये प्यार सभी बड़े बुजुर्गो का पाए |
येही दुआ है तेरे लिए  मेरी तरफ से 
निवेदन है तेरे चरणों में 
बहना तू सदा मुस्कुराती रहे 
खुदा से गुजारिश है 
तेरे हिस्से के सारे गम मुझे मिले 
हो मेरे हिस्से कि सारी खुशिया तेरी ,
तेरे हाथो में है अब लाज तेरे माता पिता भाइयो की |
बहना अपने नए घर जा कर हमे कभी न भुलाना ,
तेरे भाई की दुआ है तेरे लिए तेरी हर खुशी के लिए 
अपनी जान भी न्योछावर कर देंगे |
............एक भाई का वादा है अपनी बहन से !
चित्र :- ( गूगल से साभार  )

..........संजय कुमार भास्कर 


20 अक्टूबर 2010

ऐसी खुशी नहीं चाहता .............!!!!!

ऐसी खुशी नहीं चाहता
जो किसी का दिल दुखाने से मिले,
हंसी ऐसी नहीं चाहता जो किसी को रुलाने से मिले
उस दौलत का क्या करे जो अपनों से दूर है |
जो पैदा करती दिल में गुरूर है
सर ढकने को छत हो
खाने को रोटी हो भूंखे पेट कोई सोये ना ,
नहीं चाहिए वो राम जो इंसानों में फर्क करे
आपस में बैर व धरती को नरक करे
कब आएगा वो दिन
जब उंच नीच ख़तम होगा
मानव सभी की जात होगी मानवता ही धरम होगा
तभी मिलेगी ख़ुशी जब मन को
जब सारी दुनिया समान होगी .........

.......संजय कुमार भास्कर