04 नवंबर 2016

एक ऐसा खलनायक जो फिल्म इंडस्ट्री में हमेशा याद रखे जाएंगे अमरीश पुरी

भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर खलनायकों में से एक स्व अमरीश पुरी
हिन्दी सिनेमा में हर खलनायक की अपनी स्टाइल रही है और वह उसी स्टाइल की बदौलत दर्शकों के दिलो-दिमाग पर तब तक राज करता रहा, जब तक कि नए विलेन ने आकर अपनी लम्बी लकीर नहीं खींच दी। बॉलीवुड फिल्मों में कुछ ही ऐसे खलनायक हुए हैं जो फिल्म इंडस्ट्री में हमेशा याद रखे जाएंगे। भले ही कुछ अभिनेता आज हमारे बीच में नहीं हैं लेकिन उनकी फिल्में और फेमस हुए डॉयलाग हमेशा उनकी याद ताजा करते है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जब भी किसी खलनायक का नाम लिया जाएगा तो के.एन.सिंह, प्रेमनाथ, प्राण, अमजद खान और अमरीश पुरी जैसे अभिनेता हमेशा याद आएंगे। आज इन खलनायक में से लंबा चौड़ा कद, रौबदार आवाज, डरावने गेटअप और दमदार शख्सियत के जरिए सालों तक फ़िल्म प्रेमियों के दिल डर पैदा करने वाले अभिनेता अमरीश पुरी है
के.एन.सिंह, प्रेमनाथ, प्राण, अमजद खान से शुरू होकर यह सिलसिला अमरीश पुरी पर आकर ठहर गया। भारतीय सिनेमा में चोटी के खलनायकों की लिस्ट में सबसे ऊपर रहे मशहूर अभिनेता अमरीश पुरी का फेमस डायलॉग ‘मोगैंबो खुश हुआ’ आज भी लोगों की जुबान पर है. अमूमन दर्शक खलनायक से नफरत करता है लेकिन अमरीश पुरी एक ऐसे खलनायक थे जिन्हें दर्शकों ने अपने दिल में बसाया... अमरीश ने एक से बढ़कर एक निगेटिव रोल किए लेकिन दर्शकों ने कभी उनसे नफरत नहीं की
अमरीश पुरी अपनी ऊंची-पूरी कद-काठी और बुलंद आवाज के बल पर सबसे आगे निकल गए। उनकी गोल-गोल घूमती हुई आंखें सामने खड़े व्यक्ति के भीतर दहशत पैदा कर देती थी।
'मिस्टर इंडिया' का 'मोगैम्बो' हो या ग़दर का 'अशरफ़ अली', अमरीश पुरी ने पर्दे पर खलनायकों की जो पहचान छोड़ी है, उसकी बराबरी शायद कभी कोई नायक न कर पाये. अमरीश पुरी एक ऐसे अभिनेता थे, जो अपने रोल में पूरी तरह डूब कर एक्टिंग किया करते थे. चाहे वो समानांतर सिनेमा का दौर रहा हो या सिनेमा के वैश्वीकरण का, अमरीश पुरी की एक्टिंग हर दौर और किरदार के हिसाब से बदलती रही.
एक खलनायक के रूप में अमरीश की हमेशा प्रशंसा हुई. अमरीश ने अपने फिल्मी सफर में करीब 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. अमरीश ने बॉलीवुड और हॉलीवुड इंडस्ट्री में अपनी नकारात्मक भूमिका से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई
निसंदेह अमरीश पूरी जी हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता थे आज भी फिल्मों मे उनकी कमी खलती है |
ऐसे महान अभिनेता तो मेरा सलाम

-- संजय भास्कर

01 अक्तूबर 2016

मैं और मृदुला प्रधान जी कुछ बातें और धड़कनों की तर्जुमानी :)

ये सौभाग्य की बात है कि आकाशवाणी पर कुछ साल पहले कवितायेँ सुना करता था उन्ही दिनों मृदुला जी की रचनाओँ का प्रसारण सुना पर अनसुना कर देता था साहित्य का शौक ही नहीं था पर जब ब्लॉगिंग से जुड़ा और कुछ समय बाद मृदुला जी के ब्लॉग से परिचय हुआ उनकी कविताये पढ़ने को मिली और बहुत कुछ सीखने को मिला और मुझे .... बड़ी माँ के रूप में उनका आशीर्वाद भी मिला अब तक तीन बार मृदुला जी मिला बेहद अपने अपने पन का अहसास .... कभी लगा ही नहीं कि किसी बड़े रचनाकार से मिल रहा हूँ हमेशा ऐसा लगा अपने घर ही जा रहा हूँ इस बार फिर 17 सितंबर 100 कदम का विमोचन और फिर से मुलाकात का एक मौका !


मृदुला जी जब 2014 में पहली बार मिला मिलने पर कुछ पंक्तियों ने मन में ऐसे जन्म लिया  :-

उनकी ममता बहुत प्यारी थी
उनका आँचल बहुत सुंदर था

मैं एक छोटे शहर से आया था
उनकी ऊँगली थामे मैं पहुच गया

उनके घर तक था  !!

रिश्तो से विश्वास
निकल जब
दूर चला जाता है
समय सिमट कर छोटे से
बिंदु में रह जाता है
हलकी सी कोई टीस आँखों में
कुछ खारा सा
अक्सर सीने में कोई मोम पिघल जाता है
जरा जरा सी याद दर्द सा
कहीं सुनी कोई बात
जख्म सा
दबे पाँव कोने में छुपकर
आ जाता है
रिश्तो से विश्वास
निकल जब
दूर चला जाता है !

मृदुला प्रधान जी का कविता संग्रह " धड़कनों की तर्जुमानी " पिछले कुछ वर्षो में लिखी कविताओं का संकलन है प्रकृति प्रेमी और रिश्तों के विश्वास का संग्रह  जिसमे कवयित्री अपनी हर बात को विश्वास और रिश्तों के माध्यम से कहने की कोशिश की है... खेत खलिहान, बरगद का पेड़ ,महानगर की धुप,  जाने कितनी ही कवितायेँ और हैं जहाँ प्रकृति के रंगों की छटा के साथ दिल के रंग भी उकेरे हैं कवयित्री ने अपने आप में कुछ अलग सा प्रकृति को देखने और समझने के नज़रिये को भी प्रस्तुत करता है ज़िन्दगी सबका अपना एक परिवेश है  जिनका सीधा सा सम्बन्ध मानव जीवन से है !
मृदुला जी का लेखन बहुत ही कमाल का है मेरी और से मृदुला जी को काव्य संकलन धड़कनों की तजुर्मानी के लिए ढेरों शुभकामनाएं !

-- संजय भास्कर

03 सितंबर 2016

शब्दों से मुस्कुराहट बाँटने की कोशिश जन्मदिन पर विशेष :)



सभी मित्रो को मेरा प्यार भरा नमस्कार शब्दों से यूँ ही मुस्कुराहट बाँटने की कोशिश आज जन्मदिन पर और हमेशा ही आप सभी ने इस दिन को बहुत ही स्नेह के साथ आशीर्वाद प्रदान कर ख़ास बनाते रहे आज फिर इस अवसर पर फिर आप सभी अपना प्रेम और आशीर्वाद चाहिए !!


इस अवसर पर एक छोटी सी कविता बहन पूजा की ओर से  !!
जन्मदिन की बधाईयाँ ढेर सारी हार्दिक बधाईयाँ
 देना चाहती हूँ !
 जो
जो कुछ अलग हो 
  कुछ खास हो
  कुछ जुदा हो
 और हमेशा आपके साथ हो
पर क्या 
 जो एक छोटी बहन 
अपने बड़े भाई को दे सके 
 कुछ मिलता ही नहीं 
 कोई नज्म नहीं
  कोई कविता नहीं
 कोई गिफ्ट नहीं
इसलिए
 सिर्फ और सिर्फ
बधाईयाँ
 ढेर सारी बधाईयाँ..........!!!

पूजा बहुत बहुत आभार !!

-- संजय  भास्कर