22 सितंबर 2018

..... माँ की जलती हथेलियाँ :)

                                                                   ( चित्र गूगल से साभार  )


वर्षो से जलती रही हथेलियाँ
माँ की 
सेंकते- सेंकते रोटियां 
मेरे पहले स्कूल से लेकर आखरी कॉलेज तक  
सब याद है मुझे आज तक 
बड़ी सी नौकरी और मिल गया 
बड़ा सा घर 
जिसे पाने के लिए सारी -२ रात लिखे पन्ने 
अनजानी काली स्याही से 
पर सब कुछ होने पर 
नहीं भूलती
माँ की जलती हथेलियाँ....!!

- संजय भास्कर 




01 सितंबर 2018

..... तभी तो ख़ामोश रहता है आईना :)

आप सभी साथियों के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ अपनी एक गजलनुमा रचना खामोश रहता है आईना इसी से उपजी है ये कुछ लाइने ....उम्मीद है आपको पसंद आये.......!!

( चित्र - गूगल से साभार )
अक्सर हमेशा कुछ कहता है आईना
तभी तो हमेशा ख़ामोश रहता है आईना  !!

जो बातें छिपी है दिल के अन्दर 
उसे बाहर लाने में मददगार होता है आईना  !!

दीवानगी में दीवाने लोगो का दुःख
देखकर चुपचाप सहता है आईना  !!

जब कभी अकेले होता हूँ तन्हा
तन्हाई का सबसे बड़ा साथी है आईना !!

कहते है आईना दिखाता है जाल भ्रम का 
पर बार -बार टूट कर भी धड़कता है आईना !!

-- संजय भास्कर