13 मार्च 2010

तुम हो वो चिड़िया .....





कब से उड़ रही है
थकती नहीं
शाम ढले भी चहचहाती है  
घोंसले को बनाती है ,सजाती है
खुद को सवारने से पहिले
बच्चो को खिलाती है ,उड़ना सिखाती है
फिर अपने साजन का करती है इंतिज़ार
करके श्रींगार ,घोंसले को रखती है
ज्यों हो मंदिर प्यार का
जिसमे आते ही साजन
बजती है प्यार की घंटियाँ
जिसकी मधुर आवाजें 
दिलों की धडकने बन 
संसार में फैलाती है प्यार ,प्यार ,प्यार 
तुम हो वो चिड़िया ..........


राकेश मुथा जी आपने बहुत ही खूबसूरत लिखा .....
मुझे इतना पसंद आया की मैं अपने ब्लॉग पर भी पोस्ट कर दिया ...

http://seepkasapna-rakesh.blogspot.com

                              


 

12 मार्च 2010

तेरे लायक नहीं,जानता हूँ

 तेरे लायक नहीं, जानता हूँ

जो कभी नही हुआ
वो आज हो गया
जो मेरे पास था
वो दिल खो गया
तुम जानते हो या न नही, पता नहीं
पर जो खोया है मैंने
वो है तेरे पास कहीं
मिल जाये तो लौटा देना
तेरे लायक नहीं वो
 
जानता  हूँ
ले लूँगा, समझाकर रख लूँगा पास अपने ही 
जानता 


08 मार्च 2010

ख्वाहिशे..........



ख्वाहिशे....

ख़वाहिशो के मोती
इकट्ठा कर
एक ख्वाबो का घर
बना तो दिया था..
मासूम दिल नहीं जानता था
इसकी तासीर रेत के
घरोंदे की तरह है..
जो कुंठाओ के थपेडो से
ढह जायेगा..!
मैं फिर भी
उस मकडी की तरह
अथक प्रयास करती हु
की शायद कभी
इस खवाहिशो के घर को
यथार्थ की धरती
पर टिका पाऊ..
पर ना जाने क्या है..
या तो मेरी चाहत में कमी है
या मेरे सब्र का इम्तिहान...
की हर बार
मायुसिया सर उठा
मुझे और निराशाओ के
गलियारों में खीचती चली जाती है..!!
क्या ये मुनासिब नहीं..,
या फिर मैं झूठी
आशाओ में जीती हु..??
की ये खावाहिशो का घर
यथार्थ का सामना
कर पायेगा..
क्या सच में कभी
ये अपना वजूद
कायम कर पायेगा???

Anamika  ji, aapne bahut khoobsoorat likha
mujhe itna pasand aaya ki apne blog par bhi post kar diya.



 

06 मार्च 2010

हालात बदल जाते है '


वक्त के साथ हालात बदल जाते है '
अपनों तक के ख्यालात  बदल  जाते है|
जब बुरा वक्त आता है ' संजय '
खुद अपने ही जज्बात बदल जाते है'
अपनों तक के ख्यालात बदल जाते है |

03 मार्च 2010

मुझे फिर भी तुम्हारा इंतजार रहता है |



दूर जा चुके हो बहुत तुम हमसे ,
न जाने क्यों ये अहसास रहता है ,
हकीकत मे नहीं हो तुम यहाँ पर ,
पर सपनो में तेरा साया मेरे साथ रहता है ,
बहुत कोशिश की तुम्हे भूल जाने की ,
पर फिर  भी तेरे चेहरा सामने रहता है ,

 न ख़त आया है तुम्हारा ,
कहीं भूल तो नहीं गए ये अहसास रहता है ,
लोग कहते के तुम नहीं आओगे ,
न जाने क्यों मुझे फिर भी तुम्हारा इंतजार रहता है |