11 जनवरी 2014

......... खामोश रही तू :))

                    ( चित्र - गूगल से साभार )

खामोश रही तू,
न तूने कुछ कहा 
न मैंने कुछ कहा,
जो दिल में था हमारे,
दिल में ही रह गया
न तूने कुछ कहा
न मैंने कुछ कहा
धड़कनों ने आवाज दी,
निगाहें फिर भी खामोश रही,
ग़म दोनों को होता था जुदाई का,
जिसे हमने खामोशी से सहा
न तूने कुछ कहा
न मैंने कुछ कहा
सोचता हू 
मैं अब,
मौका इज़हार का कब आएगा,
जब दिल में छुपे जज़्बात
लबो पे अल्फाज़ बन सज जाएगा
सोचते ही रह गए हम
...न तूने कुछ कहा
.....न मैंने कुछ कहा !!

@ संजय भास्कर 


27 दिसंबर 2013

............. वह सफर ही क्या -- संजय भास्कर

( चित्र - गूगल से साभार )
वह सफर ही क्या
जिसमे उत्साह न हो
वह सफर ही क्या
जिसमे शामिल कुछ दिल
दिलचस्प यादें न हो
आगे बढ़ चल देने
और मंजिल तक पहुँच जाने को
सफ़र नहीं कहते !
सफ़र में अक्सर
जरूरी नहीं एक जगह
से दूसरी जगह का हो
कई बार सफ़र होता है
मन से मन का
प्रेम से प्रेमी का
और न जाने कही का और
कैसा भी हो सकता है !
सफ़र में जो हमारा साथ देते है
वो होते है , कुछ मोड़
कुछ रास्ते
कुछ सुस्त कदम
और लम्बी राहें
ये सब मिलकर निकल पड़ते है
एक तन्हा सफ़र पर..............!!!!


@ संजय भास्कर

06 दिसंबर 2013

......... बहुत परेशान है मेरी कविता -- संजय भास्कर

( चित्र - गूगल से साभार )

बहुत परेशान है मेरी कविता
कुछ सच्ची कुछ झूठी है मेरी कविता !!

कोशिश करता हूँ लिखू कठिन शब्दों में
पर बहुत ही सरल शब्दों में है मेरी कविता  !!

लिखना चाहता हूँ हमेशा बड़ी कविता
पर अक्सर छोटी ही रह जाती है मेरी कविता !!

जो शब्द,लफ्ज विचार आते है मन में लिख देता हूँ 
इन सब को मिला कर तैयार हुई है मेरी कविता  !!

दर्द के लम्हो को लिख दिया कागज पर
तभी तो बहुत परेशान है मेरी कविता  !!

सभी साथियों को मेरा नमस्कार काफी दिनों से व्यस्त होने के कारण ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा रहा हूँ  पर अब आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ अपनी नई रचना के साथ उम्मीद है आपको पसंद आये.........!!!



--  संजय भास्कर 




13 नवंबर 2013

............ दृष्टिकोण :))




जीवन में सबसे दुर्भाग्यशाली 
वह है,
जिसके पास दृष्टि तो है
 पर दृष्टिकोण नहीं
 पर सच तो ये है,
क्योंकि दृष्टिकोण के लिए
 अपने भीतर की दुनिआ से
जुड़ना पड़ता है !
आंकना पड़ता है आकारों के पार
निरंकार मन में
क्योंकि कहता तो
अध्यात्म भी यही  है!
आओ अकार से ऊपर उठने के लिए
निरंकार कि और चले ...............!!


-- संजय भास्कर 




26 अक्टूबर 2013

Be Lated........जन्मदिन मुबारक अर्चना मासी :))

......जन्मदिन मुबारक अर्चना मासी जी (25 Oct.)......
इस अवसर पर एक छोटी सी भेंट -------


ममतामयी मूरत हो तुम 

करुणामयी सूरत हो तुम 
आंचल में लिये 
हम सबके लिए असीम प्यार 
मुख पर रहती  है 
सदा मुस्कराहट 
दुःख की हमारे जीवन में 
नहीं आने देती आहट !


दिल से बरसते हैं ढेरो आशीर्वाद 
जो करते हमारा जीवन आबाद 
ना छ्ल कपट है मन में 
बस प्यार ही प्यार है जीवन में .! 
ना तुम करती हो भेदभाव  
हर किसी से है एक सा लगाब 
उज्ज्वल हसमुख हो तुम 
आपका स्नेह पाकर धन्य हुआ जीवन !! 




                              जन्मदिन मुबारक
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मेरी ओर से मासी जी आपको जन्मदिन की और दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं ! ये रोशनी का त्यौहार आप सब के लिये, इस बार एक फिर से नयी रोशनी लेकर आये, 
ब्लागजगत के सभी मित्रो को दीवाली की ढेरो शुभकामनायें !
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-- संजय भास्कर