21 फ़रवरी 2011

लड़की की दास्तान............संजय भास्कर


लड़की होने पर दुनिया वाले क्यों मनाते है शोक
लड़की को बोझ क्यों समझते है लोग
हर काम में ये आगे है ये मर्दों से
कभी पीछे नहीं हटती अपने फर्जो से
इसके जन्म पर क्यों नहीं बांटता कोई भोग |
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एक पडोसी थे मेरे, न थी उनके कोई औलाद
हाथ जोड़कर ईश्वर से करते थे वो फ़रियाद
कर्म खुदा का उनके आँगन में खिली एक कली
मायूस होकर बोले कि हुई है एक लड़की
मैंने कहा अंकल कुछ खिला पिला तो जाते
कहने लगे लड़का होता तो जरूर खिलाते  |
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सुनते ही दिल मेरा तड़प उठा
ये क्या उल्टा रिवाज़ है दुनिया का
कभी देते है देवी या कन्या का नाम इसे
कभी पैदा होते ही करते है बदनाम इसे
चाहते हुए भी कुछ न कर सकी
दुखी ह्रदय  से कविता लिख डाली |
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मैं न किसी पर बोझ बनूंगी , जग में ऊँचा नाम करूंगी
फिर देखूँगी कौन करेगा लड़की होने पर मातम |
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अरे नादान लोगो , जरा समझ लो
न होगी लड़की तो समाप्त हो जायेगा जीवन
इसके जज्बात को न कोई समझा है
न कोई समझ सकेगा ..............!
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-- संजय कुमार भास्कर



14 फ़रवरी 2011

वेलेन्टाइन डे विशेष-वेलेंटाइन डे युवा वर्ग के लिए खास......संजय भास्कर



वेलेंटाइन डे पर युवा दिल अपने मन की बात एक-दूसरे को बताने के लिए बेकरार हो रहे हैं। 14 फरवरी को कोई गुलाब के फूल के साथ प्यार की पेशकश करेगा तो फिर कोई किसी अन्य बहाने से।
अगर पूछा जाए तो प्रेम पाश में फंसने की चाहत रखने वाले युवक युवतियों को शायद फरवरी ही सबसे अच्छा महीना लगता होगा। हो भी क्यों न, आखिर यह महीना सिर्फ वेलेंटाइन ही नहीं, बल्कि ऐसे ही कई दिवसों को अपने में समेटे हुए है जो युवा वर्ग के लिए खास हो सकते हैं।
फरवरी में दिवस मनाने की शुरूआत सात तारीख से ही हो जाती है जब 'रोज डे' [गुलाब दिवस] पड़ता है। इससे आगे 20 फरवरी तक दिवस आयोजन की भरमार होती है।
किसी को प्रपोज करने के लिए आठ फरवरी को 'प्रपोज डे' पड़ता है तो नौ फरवरी को चॉकलेट डे पड़ता है। 10 फरवरी जहां 'टेडी डे' कहलाती है, वहीं 11 फरवरी का दिन किसी से वायदा करने या किसी से वायदा कराने का दिन यानी कि 'प्रॉमिस डे' कहलाता है। दिवसों की यह सूची यहीं समाप्त नहीं हो जाती। अगर गूगल पर सर्च मार दें तो लिस्ट और भी लंबी होती चली जाती है।

वैलेंटाईन डे की हार्दिक शुभकामनायें


-- संजय कुमार भास्कर 

07 फ़रवरी 2011

वह मजदूर........संजय भास्कर !

वह मजदूर
जिसमे उत्त्साह था अदम
सह चूका था जो हर सितम
रक्त नलिकाए भी दौड़ रही थी उसकी
पूरी चुस्ती फुर्ती के साथ
जो इस खोखले समाज की राजनीति से
बहुत दूर |
कंधे पर फावड़ा लिए चला जा रहा था
अनजान  डगर पर निश्चित बेपनाह
चला जा रहा था इस समाज समुदाय की
गन्दी राजनीति से
बहुत दूर - वह मजदूर
राजनीति सीमित थी उसके लिए यही पर
नसीब था मात्र उसका - दो वक्त की रोटी
मिल जाये सुख चैन से ,
और चलता रहे किसी तरह से
परिवार का गुजर - बसर
ऐसा था ............ वह मजदूर !
चित्र :- ( गूगल से साभार  )
 

-- संजय कुमार भास्कर

31 जनवरी 2011

ऐसा हो जन्मदिन तुम्हारा......संजय भास्कर



मेरी प्यारी बहना 
आज मन कर रहा है कि
मैं दू तुम्हे कुछ न कुछ 
पर क्या दू है ही क्या पास मेरे 
हूँ तो एक छोटा सा कवि
कविता ही है मेरे पास 
दुआए ही दे सकता हूँ
खुदा की इच्छा से 
जो रक्खे सदा  खुश तुम्हें 
तुम्हारे इस  जीवन में ,

यही  दुआ है तेरे लिए  मेरी तरफ से 
निवेदन है तेरे चरणों में 
बहना तू सदा मुस्कुराती रहे 
खुदा से गुजारिश है 
तेरे हिस्से के सारे गम मुझे मिले 
हो मेरे हिस्से कि सारी खुशिया तेरी ,
तेरे नाम से हो रोशन जहाँ सारा
तू बने गिरते का सहारा
खुशियाँ इतनी मिले तुझे
हो यह उन्मुक्त आकाश तुम्हारा
हो ऐसा जन्मदिन तुम्हारा ...


यही तेरे जन्मदिन पर ....
तेरे भाई की दुआ है तेरे लिए
तेरी हर खुशी के लिए 
अपनी जान भी न्योछावर कर देंगे |
तू जो भी चाहे उसे तेरे क़दमों में रख देंगे...

तू नाम से ही "पूजा" है
नहीं कोई तुझसा दूजा है
तू मान रखना दुनिया में मेरा
ताकि नाम "पूजा" जाये हर जगह तेरा
तू बने सबके लिए सूरज सा सवेरा
यही है विशवास मेरा
यादगार हो यह जन्मदिन तेरा  
 
आज मेरी बहन पूजा का जन्मदिन है और दिल में ना जाने कितनी बाते हैं मगर शब्द कम पड़ रहे हैं 
बहन को जन्म दिन की ढेर सारी शुभकामनाएं अल्लाह उसे बहुत लम्बी उम्र और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करे ,वो हमेशा ख़ुश रहे 
ईश्वर उसे  जीवन की हर राह पर खुशियाँ,उत्साह और उल्लास प्रदान करे......मेरी यही कामना है.
पूजा को जन्मदिन की बधाई उसे ब्लॉग   Desires  पर भी दे सकते है 


- संजय कुमार भास्कर  

24 जनवरी 2011

टीवी पर ठगी का धंधा जोरों पर ........!

 
 
सिनेमा पर तो थोड़ी बहुत लगाम है पर विज्ञापनों के मामले में टीवी बेलगाम है। टीवी को विज्ञापन चाहिएं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि विज्ञापन कैसे हैं। अच्छे या बुरे। समाज के हित में या अहित में। टीवी के मामले में कोई ठोस पॉलिसी नहीं होने की वजह से ही जागो ग्राहक जागो जैसे अभियान के दर्शन आजकल दूरदर्शन पर हो रहे हैं।कभी कभी  टीवी पर समाचार सुनने या फिर नए-पुराने गीत सुनने के लिए आध घंटे का समय मिलता है तो  इस बीच कई चैनल बदलने पड़ते हैं। ज्यादातर चैनलों पर नजर सुरक्षा कवच, कुबेर कुंजी पैक, श्री धन लक्ष्मी यंत्र आदि के बारे में बताया जा रहा होता है। इनके कथित अनेकों लाभ गिनाए जा रहे होते हैं।पढ़ाई में जीरो एक लड़का इनका यंत्र पहनकर अचानक विश्वनाथन आंदन के समान बुद्धि पा जाता है। वह क्लास में प्रथम आता है।बिजनेस में घाटा रूक जाता है और अचानक करोड़ों का फायदा होने लगता है।एक खूबसूरत-सी लड़की की शादी नहीं हो रही होती तो यंत्र पहनकर अचानक उसकी शादी पक्की हो जाती है।बच्चों के चारों तरफ नजर सुरक्षा कवच बन जाता है, जैसा कि अर्जुन के चारों तरफ भगवान श्री कृष्ण जी ने बना दिया था।अचानक तरक्की मिलने लगती है। यंत्र पहनकर बेरोजगारों को रोजगार मिल जाता है। हा-हा।
इन कथित यंत्रों की कीमत सुनकर तो और भी अचंभा होता है। क्योंकि दस से तीस हजार तक इन्हें बेचा जा रहा है। कोई तो खरीदता ही होगा। यदि बिक नहीं रहे होते तो इतने लैंथी विज्ञापन नहीं बनाए जाते और ये कथित चमत्कारी यंत्र औने-पौने दामों में बिक रहे होते। एक बात यह है कि इनमें एक्टर्स को लिया जाता है और अभिनय कराया जाता है। वे बताते हैं कि उन्हें क्या-क्या लाभ हुए। इनके विज्ञानपों में कहानियां भी ऐसी गढ़ी जाती हैं, यदि कोई एक मिनट के लिए भी सुन ले तो पूरा सुनने को मजबूर हो जाता है। कुल मिलाकर लोगों को भ्रमित करके ठगने का धंधा शबाब पर है। यह तो शुक्र है कि मेरे देश की बहुत सी जनसंख्या इस वक्त टीवी के सामने नहीं होती। हालांकि ये विज्ञापन एकाध बार दिन भी दिखाई दे जाते हैं।सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को इस विषय में कुछ सोचना चाहिए और टीवी पर लगाम लगानी चाहिए।