20 जून 2010

अर्थी...........!

 मोड़ के उधर से 
मेरी दनदनाती हुई 
साइकिल जा रही थी
उधर से 
 ' राम नाम सत्य है  '
एक अर्थी आ रही थी |
भीषण भिडंत हुई 
भयानक हड़बड़ी 
अर्थी बेचारी  निचे गिर पड़ी |
दिखाई नहीं देता 
उल्लू की दुम ,
कैसे चलते हो तुम ?
दूसरा अर्थी ढोऊ बोला -------नालायक 
तीसरा  बोला -------पाजी 
चौथा बोला ------बदतमीज़  
मैंने कहा ---
एक्सक्यूज़ मी प्लीज़ !
आप लोग धीरज क्यों खो रहे है ?
जो गिर पड़ा 
वह तो कुछ कह नहीं रहा  ,
आप लोग 
खामखाँ नाराज  हो रहे हो   |