11 फ़रवरी 2010

आज फ़िर एक बार








आज एक बार फ़िर सूरज को उगता देखो |
और चाँद को चान्दनी रात मे जागता देखो |
क्या पता कल ये धरती चाँद और सूरज हो ना हो
आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो
बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो
क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना
और दिमाग को पुराने पल याद हो ना हो
आज एक बार फ़िर पुरानी बातो मे खो जाओ
आज एक बार फ़िर पुरानी यादो मे डूब जाओ
क्या पता कल ये बाते और ये यादें हो ना हो

संजय भास्कर