05 दिसंबर 2009

बोल कर भी उससे कुछ ना बोल पाया

बोल कर भी उससे कुछ ना बोल पाया बता कर भी उसे कुछ ना बता पाया जान कर भी उसे ना जान पाया छु कर भी उसे छु ना पाया ना जाने कहाँ से आई थी वो और ना जाने कहाँ चली गयी और मैं बस सोचता ही रह गया
ये खूबसूरत पंक्तियाँ मेरे अजीज दोस्त आमीन के ब्लॉग से