24 नवंबर 2009

जीना है तो तेरी मरजी, नही तो मरजा....

बामुलाज़ा होशियार खबरदारमहंगाई हो चुकी है
असरदारआटा होगा बीस का किल्लोसोच-सोच
घबराए बिल्लोचावल कौन-सा कम
हैमिसेज शर्मा को तो यही गम हैदाल
तो पहले ही खा चुकी है
भावफ्राई, मखनी खाने के धरे रह गए चावहोने वाली है
चीनी चालीस पारक्या पकाओगे और फ़िर क्या खाओगे
बरखुरदारपीएम साब बोले,
तैयार रहना मेरी प्रजासब्जी के लिए लेना पड़ सकता है
कर्जा जीना है तो तेरी मरजी,
नही तो मरजा....
हमारे मित्र आमीन के ब्लॉग से ये कुछ पंक्तियाँ....