04 नवंबर 2009

वह सूखा पेड़ हरा भरा हो गया है

जब वह पेड़ सूखा, और कमज़ोर था तब कोई नही आता था बैठने उसकी ठंडी छाँव में नही बनाते थे पक्षी घोंसला उसकी टहनियों पे भिगो जाती थी बारिश भी उसके कमज़ोर तन को लेकिन अब वह पेड़ फिर से हरा भरा हो गया है तो पक्षी उसकी टहनियों पर रोज़ नए नए गीत गुनगुनाते हैं अब बारिश भी नही भिगोती उसके तन को वह पेड़ भूल गया गया है पिछली सारी बातें मुझे ऐसा लगता है कि कहीं वो पेड़ मैं तो नही?
हमारे मित्र महफूज़ अली के ब्लॉग से ये कुछ पंक्तियाँ....