शब्दों की मुस्कुराहट :)
जिन्दगी के कुछ रंगों को समेटकर शब्दों से मुस्कुराहट बाँटने की कोशिश :)
21 अप्रैल 2014
अब आंगन में फुदकती गौरैया नजर नहीं आती -- संजय भास्कर
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अब आंगन में फुदकती गौरैया नजर नहीं आती। शहर में आजकल वो बात ही नहीं पर पर अभी कुछ साल पहले तक जब भी जब गाँव जाता था देखा करता था...
51 टिप्पणियां:
02 अप्रैल 2014
.............कल्पना नहीं कर्म :))
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कल शाम जब मैं अपने ऑफिस से घर के लिए निकला तो देखा एक कॉफी शॉप पर कुछ युवा मदहोश होकर धूम्रपान कर रहे है व नशे में डूबे हुए है तथा थो...
44 टिप्पणियां:
15 मार्च 2014
........ धूम मची है चारो ओर:))
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धूम मची है चारो ओर इस जग में क्योंकि आज होरी है होरी है जी होरी है रंग बिरंगी होरी है रंग बिरंगे सजे है सभी प्यार के रंगों में सभी...
30 टिप्पणियां:
25 फ़रवरी 2014
खुशकिस्मत हूँ मैं एक मुलाकात मृदुला प्रधान जी से - चलो कुछ बात करें :))
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आकाशवाणी पर कुछ साल पहले कवितायेँ सुनने का बहुत शौक हुआ करता था उन्ही दिनों मृदुला जी की रचनाओ का प्रसारण सुना फिर कुछ समय बाद मृदुला जी क...
36 टिप्पणियां:
03 फ़रवरी 2014
दिल को छूते शब्द छाप छोड़ती गजलें ऐसी ही एक शख्सियत है - दिगंबर नासवा जी :)
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अक्सर जब भी कभी किसी को रोते देखता हूँ .....तो हमेशा ही नासवा जी कलम से निकली लाइने याद आ जाती है.....रोने से कुछ दिल का बोझ उतर जाता है .....
56 टिप्पणियां:
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