13 नवंबर 2013

............ दृष्टिकोण :))




जीवन में सबसे दुर्भाग्यशाली 
वह है,
जिसके पास दृष्टि तो है
 पर दृष्टिकोण नहीं
 पर सच तो ये है,
क्योंकि दृष्टिकोण के लिए
 अपने भीतर की दुनिआ से
जुड़ना पड़ता है !
आंकना पड़ता है आकारों के पार
निरंकार मन में
क्योंकि कहता तो
अध्यात्म भी यही  है!
आओ अकार से ऊपर उठने के लिए
निरंकार कि और चले ...............!!


-- संजय भास्कर 




26 अक्तूबर 2013

Be Lated........जन्मदिन मुबारक अर्चना मासी :))

......जन्मदिन मुबारक अर्चना मासी जी (25 Oct.)......
इस अवसर पर एक छोटी सी भेंट -------


ममतामयी मूरत हो तुम 

करुणामयी सूरत हो तुम 
आंचल में लिये 
हम सबके लिए असीम प्यार 
मुख पर रहती  है 
सदा मुस्कराहट 
दुःख की हमारे जीवन में 
नहीं आने देती आहट !


दिल से बरसते हैं ढेरो आशीर्वाद 
जो करते हमारा जीवन आबाद 
ना छ्ल कपट है मन में 
बस प्यार ही प्यार है जीवन में .! 
ना तुम करती हो भेदभाव  
हर किसी से है एक सा लगाब 
उज्ज्वल हसमुख हो तुम 
आपका स्नेह पाकर धन्य हुआ जीवन !! 




                              जन्मदिन मुबारक
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मेरी ओर से मासी जी आपको जन्मदिन की और दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं ! ये रोशनी का त्यौहार आप सब के लिये, इस बार एक फिर से नयी रोशनी लेकर आये, 
ब्लागजगत के सभी मित्रो को दीवाली की ढेरो शुभकामनायें !
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-- संजय भास्कर



14 अक्तूबर 2013

......पुतले जलाने से नहीं मरते रावण :))


जलाते हैं हम  हर साल
बड़ी धूमधाम से
हजारों पुतले
 रावण के
पर हमारा ध्यान कभी नहीं जाता
अपने अंदर बैठे
रावण और उसकी समस्त राक्षसी सेना की ओर |

जलाते रहेंगे हम जब तक पुतले
जीतते रहेंगे रावण
हारते रहेंगे राम !

यदि  चाहते हैं  हम
कि जीत हो राम की
तो हमें उठाने होंगे हथियार
और खत्म करने होंगे
अपने अंदर छिपे रावणों को !

पुतले जलाने से नहीं मरते रावण
बल्कि और बड़ा रूप धारण करके
आ खड़े होते हैं
हम सबके सामने.........!!

 मित्र प्रेम लोधी जी की एक बेहतरीन रचना !!

आप सभी साथियों को दशहरा पर्व पर ढेर सारी  शुभकामनायें और बधाइयाँ !!
 
@ संजय भास्कर




04 अक्तूबर 2013

......... क्योंकि हम भी डरते है :))


  ( चित्र - गूगल से साभार )

उस चौराहे पर
पड़ी वह स्त्री रो रही
है बुरी तरह से
उसका बलात्कार हुआ है
कुछ देर पहले
वह सह रही है असहनीय
पीड़ा कुछ
दरिंदो की दरिंदगी का
भीड़ में खड़े है
लाखो लोग पर मदद का हाथ
कोई नहीं बढाता
इंसानियत नहीं बची
......ज़माने में
क्योंकि हम भी डरते है.........!!!


--  संजय भास्कर