04 अप्रैल 2013
17 मार्च 2013
अक्सर मैं -- संजय भास्कर
आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा सादर
नमस्कार काफी दिनों से व्यस्त होने के कारण ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा
रहा हूँ पर अब आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ अपनी नई कविता के साथ
उम्मीद है आप सभी को पसंद आयेगी.......!!
अक्सर मैं यह
नहीं समझ पाता
की लोग प्रायः
गंदे व फटे हुए हुए
कपड़ो में
मासूम बचों का
यही रूप क्यों
नहीं समझ पाता
की लोग प्रायः
गंदे व फटे हुए हुए
कपड़ो में
मासूम बचों का
यही रूप क्यों
देखते है
कि वह भिखारी है
वह उसके कपड़ो के
पीछे की जर्जर व्यवस्था
उसकी गरीबी ,लाचारी
समाज की प्रताडना
को क्यों नहीं देख पाते .............!!!
चित्र - गूगल से साभार
कि वह भिखारी है
वह उसके कपड़ो के
पीछे की जर्जर व्यवस्था
उसकी गरीबी ,लाचारी
समाज की प्रताडना
को क्यों नहीं देख पाते .............!!!
चित्र - गूगल से साभार
@ संजय भास्कर
13 फ़रवरी 2013
आने वाले दिनों में -- संजय भास्कर
आने वाले दिनों में जब हम सब |
| कविता लिखते पढ़ते बूढ़े |
| हो जायेंगे ! |
| उस समय लिखने के लिए |
| शायद जरूरत न पड़े |
| पर पढने के लिए एक मोटे चश्मे की |
| जरूरत पड़ेगी |
| जिसे आज के समय में हम |
| अपने दादा जी की आँखों पर |
| देखते है ! |
| तब पढने के लिए |
| ये मोटा चश्मा ही होगा |
| अपना सहारा |
| आने वाले दिनों में |
| देखता हूँ यह स्वप्न |
| मैं कभी - कभी |
क्या आपको भी
ऐसा ही
ख्याल आता है कभी ........:)
ख्याल आता है कभी ........:)
@ संजय भास्कर
03 फ़रवरी 2013
आकर्षण -- संजय भास्कर
कॉलेज को छोड़े करीब
सात साल बीत गये !
मगर आज उसे जब 7 साल बाद
देखा तो
देखता ही रह गया !
वो आकर्षण जिसे देख मैं
हमेशा उसकी और
खिचा चला जाता था !
आज वो पहले से भी ज्यादा
खूबसूरत लग रही थी
पर मुझे विश्वास नहीं
हो रहा था !
की वो मुझे देखते ही
पहचान लेगी !
पर आज कई सालो बाद
उसे देखना
बेहद आत्मीय और आकर्षण लगा
मेरी आत्मा के सबसे करीब ..............!!
चित्र - गूगल से साभार
@ संजय भास्कर
16 जनवरी 2013
ऐसी खुशी नहीं चाहता -- -- संजय भास्कर
ऐसी खुशी नहीं चाहता
जो किसी का दिल दुखाने से मिले,
हंसी ऐसी नहीं चाहता जो किसी को रुलाने से मिले
उस दौलत का क्या करना जो अपनों से कर दे दूर,
जो जाने-अंजाने पैदा कर देती दिल में गुरूर |
सर ढकने को छत हो
खाने को रोटी हो भूखे पेट कोई सोये ना ,
नहीं चाहिए वो राम जो इंसानों में फर्क करे
आपस में बैर व धरती को नरक करे
कब आएगा वो दिन
जब उंच- नीच ख़तम होगा मानव सभी की जात होगी,
मानवता ही धरम होगा रोते हुये को हँसाना सबसे बड़ा करम होगा
मिलेगी ख़ुशी इस मन को तभी जब सारी दुनिया एक समान होगी..............!!!!
चित्र - गूगल से साभार
@ संजय भास्कर
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