26 जुलाई 2011

300 फोलोवर .....सभी ब्लोगेर साथियों का तहे दिल से शुक्रिया ......संजय भास्कर

मुझे  यह  बताते हुए बहुत ही ख़ुशी हो रही है. आज बलाग जगत में  मेरे समर्थको ( फोल्लोवेर्स ) की संख्या 300 हो गई है.....!
मैं आभार प्रकट करना चाहता हूँ ,  स्पर्श  ब्लॉग वाली लेखिका दीप्ति शर्मा  जी का , जिन्होंने  आदत...... मुस्कुराने  की ब्लॉग का तीनसौवांफोलोवर बनकर इस नाचीज़ को भी ब्लॉग जगत के विशिष्ठ ब्लोगर्स की श्रेणी में ला खड़ा कर दिया ।
इसी पर चंद लाइन पेश करता हूँ उम्मीद है आपको पसंद आएगी 
 
एक एक करके हुये आज 304
कैसे कैसे जुड गये मुझसे मेरे यार
कैसे करूँ शुक्रिया कैसे करूँ आभार
आपके साथ ने दिया है मुझे प्यार
 
अपार
स्नेह ये बनाये रखना चाहे कितनी करूँ ढिठाई
क्योंकि मै हूं तुम सबका छोटा प्यारा भाई
मै ना आ पाऊँ कभी तो मन मे भेद ना रखना
मेरे ब्लोग को फिर भी अपने स्नेह से सिंचित करना
मजबूरियों को मेरी नज़र अन्दाज़ करना
बस अपने प्रेम की धारा बहाये रखना.......!
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..........शुक्रिया.......बहुत ......शुक्रिया........
साथ ही आप सभी पेश है मेरी तीनसौंवी फ़ॉलोअर  दीप्ति शर्मा  जी की एक सुंदर कविता 
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*******     जख्मो पे मरहम लगाते रहे    *********
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अपने जख्मो पे मरहम लगाते रहे,
ढूंढ़ते रहे किसी को की कोई अपना हो,
और लोग हमें हर वक़्त आजमाते रहे,
अपनी खुशियों की परवाह नही की
लुटा दी हर ख़ुशी सब की ख़ुशी के लिए
हर रूठे को हम तो मनाते रहे ,
अपने जख्मो पे मरहम लगाते रहे|
कहा था सबने मुझे कुछ मिलेगा नही.
जानते थे फिर भी ना जाने क्यों?
हम किस्मत को खुद से छुपाते रहे ,
अपने अश्को को आँखों से बहाते रहे,
दिल मे किसी के सपने सजाते रहे,
अपने जख्मो पे मरहम लगाते रहे|
भटकते रहे जिन्दगी तलाशने को,
सोचा लम्हों का सहारा मिलेगा मुझे,
तमन्नाओ को अपना सहारा समझ ,
हम एहसासों से दामन छुडाते रहे ,
उलझी जिन्दगी को सुलझाते रहे,
अपने जख्मो पे मरहम लगाते रहे....!
 
....एक बार फिर से सभी ब्लोगेर साथियों  का तहे दिल से शुक्रिया........
--  संजय भास्कर --







 

19 जुलाई 2011

' नीम ' पेड़ एक गुण अनेक..........>>> संजय भास्कर


नीम के बारे बचपन से सुना था यह कई प्रकार के रोगों में काम आता है पर कुछ दिनों पहले जब मैं अस्वस्थ था तो नीम के बारे में बहुत सी जानकारियां मिली नीम के पत्तो का काफी उपयोग भी किया गया मेरे लिए | नीम हमारे भारतीय मूल कि प्रजाति है जो सबसे अधिक मूल्यवान है लेकिन आज कल कि पीढ़ी को इसके बारे में बहुत ही कम जानकारी  है |  नीम बहुत ही गुणकारी पेड़ है नीम की पत्तिया , छाल , नीम के फल सभी बहुत ही गुणकारी है | नीम की पत्तियों का धुँआ मच्छरों और कीड़े मकोडो को दूर भगाता है कुछ समय पहले तक इसका इस्तेमाल बड़े -बड़े गोदामो में नीम की पत्तियों का धुआं फैका जाता था जिसके कारण भंडारित अनाज में कीट पतंगे नहीं लगते थे , नीम के छाल से कई प्रकार के रसायन मिलते है जो चमड़ा रंगने  के काम आते है नीम का उपयोग तेल साबुन , दन्त मंजन बनाने में भी किया जाता  है | नीम के वृक्ष में अन्य पेड़ की अपेक्षा अधिक ओक्सिजन होती है | आदि काम में हमारे ऋषि मुनि भी कहा करते थे की नीम हवा को साफ़ करता है इसके हर भाग में औषधिक गुण  है इसी कारण हमारे बुजुर्ग सदियों से घरो के समीप नीम के पेड़ लगाते आये है |
आदि काल से इसका नाम उन देवताओ के साथ लिया जाता है जो रोगों और बीमारियों से हमारी रक्षा करते आये है सदियों से किसान अनाज को कीड़ो से बचाने  के लिए नीम का पत्तो का प्रयोग करता आया है |  गावो में चरम रोगों होने पर भी नीम की पत्तियों को उबाल कर नहाने की सलाह दी जाती है, पेट के कीड़ो और गठिया रोगों में भी नीम का तेल दवा के रूप में काम आता है | सदियों से हमारे पूर्वज नीम को घरेलु चिकित्सक के रूप में प्रयोग करते आये है  आयुर्वेद में नीम को " सर्वरोग निवारण " की संज्ञा दी गई है | और भी ऐसी बहुत सी बीमारियाँ है जिसमे नीम का उपयोग होता है  |


गाव देहात के लोगो पुराने समय से नीम के गुणों को जानते आये है परन्तु  आज नीम का उपयोग पूर्ण  रूप से नहीं हो रहा है गावो में अक्सर लोग नीम का दातुन के रूप में इस्तेमाल करता है जो मुह के कई रोगों से रक्षा करता है हम खुद भी जब भी गाव जाते है टूथब्रश का इस्तेमाल बहुत ही कम करते है दातुन का ही प्रयोग करते है
..............घर के आँगन में नीम के पेड़ को लेकर कितने ही सांस्कृतिक बिम्ब हमारे सामाजिक जीवन में उभरे है , हिंदी साहित्य तथा गीतों में भी नीम का खुलकर बखान हुआ है  साप के काटने पर भी नीम की पत्तियों खिलाने का प्रचलन भी देहातो में है नीम के अनेको गुण है  जिन लोगो ने इसे गंभीरता से जांचा परखा है उनका मानना है नीम अपने से दूसरी प्रजाति के पेड़ पौधों को भी सुरक्षा प्रदान करता है |
.........नीम में में विशेषताओं का खजाना  लबालब भरा पड़ा है जो सिर्फ अधिक फसलो से उत्पादन में हमारी मदद करता है बल्कि भयंकर बीमारियों के उपचार हेतु प्रयोग में लाया जता है |
नीम की महता को देखते हुए आज आवस्यकता इस बात की है की इस पेड़ को बहुमूल्य राष्ट्रीय  संपदा  घोषित किया जाए ............!
चित्र :- गूगल देवता से साभार 


-- संजय भास्कर

11 जुलाई 2011

अस्वस्थता के समय लिखी कुछ क्षणिकायें उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगी.. .......संजय भास्कर

आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा ........सादर नमस्कार ............अस्वस्थता के कारण  काफी दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था पर अब  आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ । अस्वस्थता के कारण आराम करते समय हमेशा ही कुछ लाइन दिमाग में आती थी जिन्हें क्षणिका के रूप में पढवाता हूँ उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगी.........!



(1.)  गजब


अनपढ़ विधायक
के साथ
गजब हो गया
पता चला वह एजुकेशन 
मिनिस्टर हो गया !


( 2.)  सफ़र


दोस्ती का सफ़र लम्बा हुआ
 तो क्या हुआ  ?
थोडा तुम चलो
थोडा हम चलेंगे
और फिर रिक्शा कर लेंगे !


( 3.)  कमाल


 21 वी सदी में देखो
लोकतंत्र का कमाल अब पढ़े लिखे भी
वोटिंग मशीन पर
लगाते है अंगूठे से निशान !


(4.)  अवार्ड 


आज कुछ अध्यापक
न स्कूल जाते है
और न कभी पढ़ते है
करके चापलूसी अधिकारियो कि
बेस्ट टीचर अवार्ड पाते है !


( 5.)  फिल्मे 


आजकल चल रही फिल्मे
कर रही है कमाल
जिन्हें देख शर्म भी खुद
शर्म से हो रही है लाल ..........!





-- संजय भास्कर




21 जून 2011

शहीद स्मारक ही दिलाते है शहीदों की याद..........संजय भास्कर

  आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा ..........सादर नमस्कार .........कई दिनों से कविताये लिखने के बाद सोचा आलेख लिखा जाये  लगभग कई  दिन के अवकाश के बाद  पुन: उपस्थित हूँ । आज सभी शहीद  की कुर्बानियों को भूलते जा रहे है लेकिन जब कभी भी किसी शहीद स्मारक को देखते है तो उसकी याद आती है इसी पर यह आलेख लिखा है आशा करता हूँ आप सभी को पसंद आएगा  ...! 
 शहीद स्मारक  ही दिलाते है शहीदों की याद

आज हम जिस आजाद भारत में सांस ले रहे हैं, वह शहीदों की कुर्बानियों का ही फल है। जिन स्थानों पर



देशभक्तों ने अपना लहू बहाया वहा पर अभी तक स्मारक नहीं बने। जो बने भी हैं, वे लुप्त होने के कगार पर हैं। 1857 के गदर से लेकर अगस्त क्रांति तक लगातार आंदोलन हुए। सभी आंदोलनों में आगरा जनपद के कई देशभक्तों ने जोरदारी से भाग लिया। इन रणबाकुरों ने जिन स्थानों को क्रांति का केंद्र बनाया, युवा पीढ़ी उनसे अनजान है।
वह नहीं जानती कि उनके आसपास में भी ऐसे स्थल हैं, जहा से आजादी की लड़ाई लड़ी गयी। नूरी दरवाजा, हींग की मंडी और मोती कटरा में सन् 1926 से 29 तक सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त, राजगुरु, सुखदेव आदि ने फैक्ट्री का संचसलन किया। जहा बम बनाए जाते थे। नूरी दरवाजे वाले कमरे जरूर सभी की निगाह में हैं। लेकिन अन्य कमरे कहां हैं, इसकी जानकारी लोगों को नहीं।
   सन् 1942 तो स्वाधीनता आंदोलन की अंतिम क्रांति थी। चमरौला रेलवे स्टेशन पर एक आंदोलन किसानों ने किया। जिसमें अंग्रेजों की गोलियों से उल्फत सिंह, साहब सिंह, खजान सिंह, सोरन सिंह आदि शहीद हो गए। 125 नागरिक घायल हुए थे। यहा एक स्मारक बना हुआ है, जो धीरे-धीरे ध्वस्त होता जा रहा है।
इस घटना के बारे में स्थानीय लोग भी अनजान बने हुए हैं। लेकिन शहीद स्मारक अवश्य सभी शहीदों की याद दिलाता है। जिसे विकसित और सुरक्षित रखने की जरूरत है।
चित्र :- गूगल से साभार


-- संजय भास्कर