12 नवंबर 2010

.............अपनी तो आदत है मुस्कुराने की !



आदत मुस्कुराने की 
कहाँ थे कहाँ पहुँच गए हम 
ये जिंदगी की दास्तान बड़ी अजीब है ,
इस प्यार भरी जिंदगी में हंस कर जियेंगे ,
कभी किसी से कोई शिकायत नहीं करेंगे ,
सभी को प्यार मिले यही दुआ करेंगे |
जियेंगे हंस कर मरेंगे  हंस कर ,
गम में भी मुस्कुराने  की आदत है अपनी ,
सभी को खुशिया दे रब से दुआ यही करेंगे |
क्योकि हमे आदत है गम छुपाने की 
गम में भी है आदत है मुस्कुराने की !
चित्र :- ( गूगल देवता से साभार )

................संजय कुमार भास्कर 

08 नवंबर 2010

.........परिंदों को भी उड़ा देते हैं लोग



खुल के दिल से मिलो तो सजा देते हैं लोग
सच्चे जज़्बात भी ठुकरा देते हैं लोग
क्या देखेंगे दो लोगों का मिलना
बैठे हुए दो परिंदों को भी उड़ा देते हैं लोग !

...ये पंक्तियाँ मझे SMS में मिली, अच्छी लगी तो ब्लॉग पर आपसे साझा कर लीं !

05 नवंबर 2010

................. दीपावली की हार्दिक शुभकामाएं !



आदत......मुस्कुराने की
की तरफ से सभी मित्रो और पाठको को दीपोत्सव की की बहुत बहुत शुभकामनाये !

.............संजय कुमार भास्कर 

02 नवंबर 2010

................सिन्दूर बनके सजता हूँ |



खुशी या गम हो तेरे आंसुओं में ढलता हूँ
तुझे ख़बर है तेरी चश्मे-नम में रहता हूँ
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क्या हुवा जो तेरा हाथ भी न छू सका
तेरे माथे की सुर्ख चांदनी में जलता हूँ
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है और बात तेरे दिल से हूँ मैं दूर बहुत
तुम्हारी मांग में सिन्दूर बनके सजता हूँ
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मैंने माना तेरी खुशियों पर इख्तियार नही
तेरे हिस्से का गम खुशी खुशी सहता हूँ
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तेरा ख्याल मेरे दिल से क्यों नही जाता
जब कभी सामने आती हो कह नही पाता
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तमाम बातें यूँ तो दिल में मेरे रहती हैं
तुम्हारे सामने कुछ याद ही नही आता |
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चित्र :- ( गूगल से साभार  )

नासवा जी ने इतनी सुन्दरता से लिखा कि मैं अपने ब्लॉग पर ही ले आया 

नासवा जी कि कलम से निकली एक बेहतरीन रचना 
दिगम्बर नासवा जी के ब्लॉग से ये कविता आप तक  पहुंचा रहे है संजय भास्कर 


30 अक्टूबर 2010

..........क्या चीज है यह जिंदगी ?

 जिस राह से भी गुजरे 
एक नाम सुना जिंदगी |
हमने भी चाहा कोई हमको बता दे 
क्या चीज है यह जिंदगी |
थके हुए राही ने कहा 
रुकना ही है जिंदगी 
अपाहिज ने कहा 
चलना ही है जिंदगी |
गरीबी में तड़पते हुए ने कहा 
पैसा ही है जिंदगी  |
खुशियों में डूबे किसी ने कहा 
प्यार ही प्यार है जिंदगी  |
मगर कोई हमसे भी तो पूछे 
क्या चीज है जिंदगी 
........पर मैं समझता हूँ 
ठोकर खाकर संभल जाने का नाम ही  है 
..................शायद जिंदगी | 
चित्र :- ( गूगल देवता से साभार  )

...............संजय कुमार भास्कर