19 सितंबर 2010

इश्क क्या होता है ............!

 इश्क क्या होता  है ,
समझते है हम चोट  खाने के बाद ,
वो हंस कर सितम करती रही 
हम हंस कर सितम सहते रहे 
मेरी आँखों में झलकती है मेरी कहानी 
जो छुपाये नहीं छुपती |
मौत आये तो गले लगा ले हम 
जी कर क्या करे इश्क में चोट खाने के बाद 
दर्द गमो का इलाज़ मिल भी जाये तो क्या 
मरना चाहता है ' भास्कर ' अब लाइलाज |

संजय कुमार भास्कर

17 सितंबर 2010

उदासी छाई है मन में कारण मैं खुद नहीं जानता..........!!!!!


 उदासी छाई  है मन में 
कारण मै खुद नहीं जानता
जो रूठा है अपना वो मनाने  पर भी नहीं मानता
दर्द मिले है हमें  जो ,
उनका घाव भरना भी नहीं जानता |
दुखाया है शायद दिल किसी का मैंने
मुझे शायद वो भी नहीं जानता |
प्यार तो कर सकता हूँ मैं भी ,
पर कोई है जो प्यार निभाना नहीं जानता |
जिस प्यार की होती है पूजा
वो पूजा शायद करना ही नहीं जानता
उदासी  छाई है मन में
कारण मैं खुद  नहीं जानता |


.....संजय कुमार भास्कर

14 सितंबर 2010

क्यूँ बुझ रहा है... ये मन..........!!!!!

 क्यूँ बुझ रहा है
मन
क्यों उड़ रहा है
मन
चैन भी नहीं है
उमंग भी नहीं
दूर भी नहीं है
संग भी नहीं
ये मन
आज क्यूँ बुझ रहा है
मन
ना अपना सा लगता है
ना पराया सा
शांत भी नहीं
ना घबराया सा
ये मन
क्यों बुझ सा रहा है...
अजीब से सवाल हैं
इनके जवाब नहीं
क्या खोया क्या पाया
कुछ तो हिसाब नहीं
ये मन
पंछी उदासा सा
बादल प्यासा सा
रोशनी को मोहताज
बेचारा तमाशा सा
ये मन
मेरा मन......

-मलखान सिंह आमीन

12 सितंबर 2010

मौत तू एक कविता है...............!!!

प्रिय ब्लॉगर मित्रो 
प्रणाम !
कैसे है आप सब ? लीजिये एक बार फिर हाज़िर हूँ
काफी अंतराल के बाद आज फिर आपकी ख़िदमत में उपस्थित हूं |
दोस्तों,
आप सभी के लिए १९७० की मशहूर फिल्म आनंद की ये दिल को छू लेनेवाली कविता पेश करता हूँ। 

मौत तू एक कविता है,
मुझसे एक कविता का वादा है, मिलेगी मुझको।
डूबती नफ्जों में, जब नींद आने लगे।
ज़र्द सा चेहरा लिए, चाँद उफ़क तक पहुंचे।
दिन अभी पाने में हो, रात किनारे के क़रीब.
ना अँधेरा ना उजाला हो, ना आधी रात ना दिन।
जिस्म जब ख़त्म हो, और रूह को जब साँस आये।
मुझसे एक कविता का वादा है, मिलेगी मुझको।