19 मई 2010

शुक्रिया ऐ ब्लॉगस्पॉट तेरा बहुत शुक्रिया

मुझे  यह  बताते हुए बहुत ही ख़ुशी हो रही है. आज बलाग जगत में  मेरे  समर्थको (Followers) की संख्या १०० हो गई है 
इसी पर एक छोटी सी कविता  पेश करता हूँ आपके सामने

शुक्रिया ब्लॉगस्पॉट
तेरा बहुत शुक्रिया
मेरे जीवन में एक तरंग लाए हो तुम
लगता खुशियां अपने संग लाए हो तुम
मुझे साथ खड़े हैं सौ दिमाग
दो सौ आंखे, दो सौ हाथ
जारी है गिनती, मेरी बढ़ती खुशियों की
बढ़ाने को मेरा हौसला हर कदम पर
शुक्रिया ब्लॉगस्पॉट!
बनी रहेगी आदत... मुस्कुराने की मेरी
तेरे संग ब्लॉगस्पॉट
शुक्रिया,
..बहुत शुक्रिया..

.......आमीन.......
 




17 मई 2010

खुद की तलाश में


खुद की तलाश में
क्यूं भटक रहे हैं।
मैं नाम हूं
मैं ज़िस्म हूं
मैं जान हूं
मैं रूह हूं
हम किस गली
से गुजर रहे हैं।
अपना कोई
ठिकाना नहीं।
अपना कोई
फसाना नहीं।
अपनी कोई
मंजिल नहीं।
भटक रहें हैं
मायावी जंगल में।
सब है पर
कुछ भी नहीं।
फिर भी तलाश है
फिर भी प्यास है ।
क्यूं भटक रहे हैं हम
खुद की तलाश में ।
  
पहुंचा रहे है 
 संजय भास्कर

14 मई 2010

कन्फर्म है.......... इश्क अंधा ही होता है .........



पिछले दिनों एक लड़के से मिला। वह इंडिया में ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है। उनका परिवार करीब सात साल पहले पाकिस्तान से यहां आया था। अब वे वापस पाकिस्तान नहीं जाना चाहते। वजह? उनका कहना है कि पाकिस्तान में उनके साथ जो बरताव किया जाता है, वह तो नरक में भी न होता होगा। वे करीब 7 हिन्दू परिवार हैं।
एेसे हालातों की जानकारी भला किसे नहीं है। फिर भी सानिया मिर्जा ने पाकिस्तान खिलाड़ी से निकाह कर लिया  है। भारत में भी कई मुस्लिम परिवार हैं जिनके पास बेशुमार धन है। उनमें से भी कोई चुना जा सकता था। खैर, उनकी निजी जिंदगी में कोई भी इंटरफेयर नहीं कर सकता। यह सानिया का हक है।
एक अखबार में पढ़ा कि अभिनेत्री रीना राय ने भी एक पाकिस्तानी से शादी की थी। इसके बाद उनका जो हाल हुआ था, पूरी दुनिया जानती है। उन्हें इतना प्रताडि़त किया गया कि वे आज भी उस लम्हों को याद करके सिहर उठती हैं। सानिया को भी रीना के बारे में जानकारी तो होगी ही।
दूसरी बात यह कि शोएब मलिक पहले ही सानिया की सहेली आएशा को छोड़ चुका है और तलाक तक नहीं दिया। सानिया को भला इस बात का पता कैसे नहीं होगा। इतने सब के बाद भी सानिया का यह फैसला इस बात को कन्फर्म करता है कि इश्क अंधा होता है। पूरी तरह अंधा।

12 मई 2010

सांभा के रूप में वह हमेशा याद किए जाएंगे।.......... मैक मोहन

फिल्म शोले में डाकू सांभा का किरदार निभाने वाले अभिनेता मैक मोहन का सोमवार को निधन हो गया। 71 वर्षीय मैक मोहन ने मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में आखिरी सांस ली। वह कैंसर से पीड़ित थे।
मैक मोहन ने अपना फिल्मी करियर 1964 में आई हकीकत से शुरू किया था। करीब पांच दशक के अपने करियर में उन्होंने 175 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। उन्हें सबसे ज्यादा प्रसिद्धि मिली 1975 में रिलीज हुई शोले से। शोले में उन्होंने गब्बर सिंह की गैंग के डाकू सांभा का किरदार निभाया था। फिल्म के एक दृश्य में गब्बर कहता है, 'अरे ओ सांभा, कितना इनाम रखे है सरकार हम पर'। इसके जवाब में सांभा कहता है - 'पूरे पचास हजार।' यह डायलाग भारतीय सिनेमा के इतिहास के कुछ सबसे मशहूर डायलाग्स में एक है।
मैक मोहन ने कई अन्य हिट फिल्मों जैसे डान, द बर्निग ट्रेन और सत्ते पे सत्ता में भी काम किया। शोले के निर्देशक रमेश सिप्पी ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा, सांभा की भूमिका मैक मोहन के अलावा कोई दूसरा इतनी अच्छी तरह नहीं कर सकता था। सांभा के रूप में वह हमेशा याद किए जाएंगे।

मैकमोहन जी को हम सब की ओर से भावभीनी और विनम्र श्रद्धांजलि |