03 मार्च 2010

मुझे फिर भी तुम्हारा इंतजार रहता है |



दूर जा चुके हो बहुत तुम हमसे ,
न जाने क्यों ये अहसास रहता है ,
हकीकत मे नहीं हो तुम यहाँ पर ,
पर सपनो में तेरा साया मेरे साथ रहता है ,
बहुत कोशिश की तुम्हे भूल जाने की ,
पर फिर  भी तेरे चेहरा सामने रहता है ,

 न ख़त आया है तुम्हारा ,
कहीं भूल तो नहीं गए ये अहसास रहता है ,
लोग कहते के तुम नहीं आओगे ,
न जाने क्यों मुझे फिर भी तुम्हारा इंतजार रहता है |

01 मार्च 2010

1411 बाघ बचाओ आन्दोलन

 

कैसी बिडंबना है कि पहले लोग बाघों से डरा करते थे और जंगलों में जाने से बचते थे कि कहीं से कोई बाघ न आ जाए॥! और अब आलम यह है कि लोग बन्दूक इत्यादि हथियार लेकर जंगलों का रुख करते हैं..। वो भी बाघों का शिकार करने! वही डर जो पहले इंसानों में बाघों के प्रति हुआ करता था, अब बाघों के जेहन में बैठ गया है। उन्हें लगता है कि क्या जाने कहीं से कोई इंसान आ जाए और अपनी बन्दूक का निशाना बना ले।
एक ज़माना था जब लोग बाघ से बचते थे, और आज का ज़माना है जब लोग बाघ को बचाते हैं।
देश के बाघ संरक्षित क्षेत्रों में इस वर्ष अब तक पांच बाघों की प्राकृतिक या अन्य कारणों के चलते मौत हुई है।
पर्यावरण और वन राज्य मंत्री जयराम रमेश ने लोकसभा में बताया है कि वर्ष 2008 में देश भर में अत्याधुनिक प्रणाली का इस्तेमाल कर हुई बाघों की अनुमानित गणना के मुताबिक भारत में।,411 बाघ [मध्य संख्या] हैं। इस बारे में न्यूनतम संख्या।,165 और अधिकतम संख्या।,657 है।  इसी तरह गणना में है।
  देश के विभिन्न बाघ संरक्षित क्षेत्रों में इस वर्ष कुल पांच बाघों की मौत प्राकृतिक या किन्हीं अन्य कारणों के चलते हुई है। इनमें दो बाघों की मौत उत्तराखंड के कारबेट में, दो की मौत असम के काजीरंगा में और एक मौत मध्य प्रदेश के पेंच राष्ट्रीय उद्यान में हुई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से अब तक काजीरंगा बाघ संरक्षित क्षेत्र में 16, कारबेट में 15 और मध्यप्रदेश के कान्हा में आठ बाघों की मौत हो चुकी है।
बाघ बचाओ,  बाघ बचाओ,  बाघ बचाओ,  बाघ बचाओ .......................... 

26 फ़रवरी 2010

सफर



सफर

मीलों दूर तक जाना है,

एक नया जहाँ बनाना है,

झुकना मना है, थकना मना है,

मंजिल से पहले रुकना मना है !

पता है मुश्किलें तो आयेंगी,

मुझको, मेरे हौसले को आज़मायेंगी,

पर मैं न डरूंगी, मैं न मरूंगी,

सीने में सैलाब लिए,

मुश्किलों पर ही टूट पडूँगी !

इन मुश्किल हालातों में,

अचानक मेरे ख्यालों में,

किसीकी मुस्कान याद आती है,

उसकी प्यारी बातें दिल के तार छेड़ जाती है,

कोई था, जो मुझे अकेला छोड़ गया,

सारे रिश्ते, सारे बंधन,

एक पल में ही तोड़ गया !

जब आँखें भर आती है,

और यादें तडपाती है,

उसकी आवाज़ कहीं से आती है,

हौसला ना हार,

कर सामना तूफ़ान का,

तू ही तो रंग बदलेगा आसमान का !

करता जा अपनी मंजिल की तलाश;

तेरे साथ चलेंगे ये दिन ये रात;

चलेगी ये धरती, ये सकल आकाश !

काटों को फूल समझता चल;

बाधा को धूल समझता चल;

पर्वत हिल जाए, ऐसा चल;

धरती फट जाए ऐसा चल;

चल ऐसे की, तूफ़ान भी शरमाये

तेज़ तेरा देखकर,

ज्वालामुखी भी ठण्ड पर जाए !


Babli ji, aapne bahut khoobsoorat likha
mujhe itna pasand aaya ki apne blog par bhi post kar diya.

http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com