शब्दों की मुस्कुराहट :)
जिन्दगी के कुछ रंगों को समेटकर शब्दों से मुस्कुराहट बाँटने की कोशिश :)
31 मार्च 2010
इसलिए हम आंसू बहाते रहे
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वह नदी नहीं थी आंसू थे मेरे जिस पर मेरे दोस्त कश्ती चलाते रहे मंजिल मिले उन्हें यही चाहत थी मेरी चाहत इसलिए हम आंसू बहाते रहे | .......
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29 मार्च 2010
दोस्त तो सारे आजमाए हुए है
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यु ही मुस्कुराने की आदत बना राखी है हमने लाखो गम जी सीने में छुपाये हुए है अब खुद पे ऐतबार करके देखेंगे ,हम दोस्त तो सारे आजमाए हुए है ...
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27 मार्च 2010
यादें बचपन की
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अक्सर आ जाती है याद मुझे बचपन की बातें | कितने सुहाने दिन थे वो कितनी मीठी बातें | ना घर की चिंता थी न खाने पिने की फिकर , कूदते थे ...
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25 मार्च 2010
वादा करो छोडोगी नहीं तुम मेरा साथ.......महफूज़ अली जी की कलम से
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तन्हाई में जब मैं अकेला होता हूँ, तुम पास आकर दबे पाँव चूम कर मेरे गालों को, मुझे चौंका देती हो, मैं ठगा सा, तुम्हें निहारता हूँ, तुम्हार...
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24 मार्च 2010
आजादी के महानायक
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मेरा रंग दे बसंती चोला, माहे रंग दे। इन लाइनों को सुनने के बाद देश पर जान कुर्बान करने वाले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू की यादें ताजा हो...
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