25 फ़रवरी 2015

किस बात का गुनाहगार हूँ मैं -- संजय भास्कर

पुरानी डायरी से कुछ पंक्तियाँ

चित्र - ( गूगल से साभार )
किस बात का
गुनाहगार हूँ मैं,
खुशियाँ भरता हूँ
सबकी जिंदगी में
टूटे दिलों को दुआ देता हूँ
दुश्मन का भी भला करता हूँ,
क्या इसी बात का
गुनाहगार हूँ ,
मेरी जिंदगी में कांटे
डाले सबने
मैंने फूलों की बहार दे डाली
बचाता हूँ दोस्तों को
हर इलज़ाम से
कहीं दोस्त बदनाम
न हो जाये
मेरे लिए यही है
जिंदगी का दस्तूर
क्या इसलिए गुनाहगार हूँ मैं
साथ निभाता हूँ
सभी अपनों का
जिंदगी की हर राह पर
क्या यही है कसूर मेरा
हाँ हाँ शायद ... यही है कसूर मेरा
जो अपने दिल के ग़मों को
छुपाता रहा हूँ मैं
ज़माने को हँसाता रहा हूँ मैं,
और तन्हाई में
आंसू बहाता रहा हूँ मैं
भास्कर पूछता है
क्या यही जिंदगी का दस्तूर है
कोई बता दे कसूर मेरा
आखिर
किस बात का ... गुनाहगार हूँ  मैं  !!

( C )  संजय भास्कर

06 फ़रवरी 2015

मेरी नजर से चला बिहारी ब्लॉगर बनने - संजय भास्कर

सलिल वर्मा जी नाम तो आप सभी जानते ही हो अरे भईया वही चला बिहारी ब्लॉगर बनने (  दोस्त लोग के जिद में आकर हमको ई ब्लॉग फ्लॉग के चक्कर में पड़ना पड़ा.बाकी अब जब ओखली में माथा ढुकाइए दिए हैं, त देखेंगे कि केतना मूसर पड़ता है हमरा मूड़ी पर  ) उनके मूड़ी का कोई पता नहीं कब बन जाये लिखने का सलिल वर्मा जी के लेखन की जितनी भी तारीफ की जाए कम है ....वह चाहे साँप और सीढ़ी पर लिखे या एकलव्य पर हमेशा ही उनका लिखा एक छाप छोड़ जाता है और मुझे तो हमेशा ही उनकी हर पोस्ट में कुछ अलग ही पढ़ने को मिलता है .......!!!
सलिल वर्मा जी का ब्लॉग करीब चार वर्षो से एक लम्बे समय से पढ़ रह हूँ उनके दिए कमेंट से तो हर कोई प्रभावित है सलिल वर्मा जी लिखने का अंदाज ही ऐसा है कि चाहे महीने बाद भी पोस्ट आती है पाठक को बेसब्री से इंतज़ार रहता है और पाठक खुद ही खिंचा चला आता है उनकी कलम शब्दों में जान दाल देती है और उनके जैसा कोई कलाकार ह्रदय ही उसमे जान डालकर जानदार शानदार बनाता है ऐसा शानदार लेखन है सलिल जी का उनके अपार स्नेह के कारण ही आज ये पोस्ट लिख पाया हूँ...!!
सलिल जी की लेखनी से मैं बहुत प्रभावित होता हूँ वो बहुत ही जिम्मेदारी से हर ब्लॉग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते है उनके बारे में लिखना शायद मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है....!!
और अंत में सलिल जी के ब्लॉग से पढ़िए गुलज़ार साहब की कुछ लाइनें दर्द के बारे में: -

 दर्द कुछ देर ही रहता है बहुत देर नहीं
जिस तरह शाख से तोड़े हुए इक पत्ते का रंग
माँद पड़ जाता है कुछ रोज़ अलग शाख़ से रहकर
शाख़ से टूट के ये दर्द जियेगा कब तक?
ख़त्म हो जाएगी जब इसकी रसद
टिमटिमाएगा ज़रा देर को बुझते बुझते
और फिर लम्बी सी इक साँस धुँए की लेकर
ख़त्म हो जाएगा, ये दर्द भी बुझ जाएगा
दर्द कुछ देर ही रहता है, बहुत देर नहीं !!

( C ) संजय भास्कर


15 जनवरी 2015

लेखन तो जिन्हे विरासत में मिला है ऐसी बहुमुखी प्रतिभा की धनी है - साधना वैध

साधना वैद ब्लॉगजगत में एक जाना हुआ नाम है और आशालता सक्सेना मासी और माँ खुशकिस्मत हूँ
दोनों का आशीर्वाद मुझ पर बना हुआ है दोनों ही हमेशा मुझे प्रोत्साहित करती है अच्छा लिखने के लिए
 ( सुधिनामा ब्लॉग की मालकिन ) सुप्रसिद्ध कवियित्री स्व. डॉ. (श्रीमती ) ज्ञानवती सक्सेना जी की पुत्री और श्रीमती आशा लाता सक्सेना जी (आकांशा ब्लॉग ) की छोटी बहन
भाषा पर अधिकार उन्हें अपनी माता जी प्रसिद्ध कवित्री (श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना )जी से विरासत में मिला है ! इसीलिए साधना जी के शब्द चयन बहुत ही सरल और सुंदर है !
करीब दो साल पहले साधना जी की लिखी कुछ लाइन पढ़ी थी जो अचानक आज दोबारा याद आ गई
हर जीत तुम्हारी हो ज़रूरी तो नहीं ...........साधना जी  के लेखन की जितनी भी तारीफ की जाए कम है हमेशा ही संवेदन शील विषय पर लिखी हर रचना एक अलग ही छाप छोड़ती है साधना जी का लेखन हमेशा ही दिल को छूकर गुजरता है विषय चाहे कोई भी हो
साधना वैद जी रची हुई कुछ पंक्तियाँ उम्मीद है आपको भी पसंद आये .............!!!

हर जीत तुम्हारी हो ज़रूरी तो नहीं ,
हर हार हमारी हो ज़रूरी तो नहीं !

सच है तुम्हें सब मानते हैं रौनके महफ़िल ,
हर बात तुम्हारी हो ज़रूरी तो नहीं !

जो रात की तारीकियाँ लिख दीं हमारे नाम ,
हर सुबह पे भारी हों ज़रूरी तो नहीं !

बाँधो न कायदों की बंदिशों में तुम हमें ,
हर साँस तुम्हारी हो ज़रूरी तो नहीं !

तुम ख़्वाब में यूँ तो बसे ही रहते हो ,
नींदें भी तुम्हारी हों ज़रूरी तो नहीं !

जज़्बात ओ खयालात पर तो हावी हो ,
गज़लें भी तुम्हारी हों ज़रूरी तो नहीं !

दिल की ज़मीं पे गूँजते अल्फाजों की ,
तहरीर तुम्हारी हों ज़रूरी तो नहीं !

माना की हर एक खेल में माहिर बहुत हो तुम ,
हर मात हमारी हो ज़रूरी तो नहीं !

लम्बे समय से मैं साधना जी का ब्लॉग पढ़ रह हूँ पर उनसे मिलने का सौभाग्य अभी तक नहीं  प्राप्त हुआ मैं अक्सर साधना जी के बारे में कुछ लिखना चाहता था और क्यों न लिखे आखिर उनके लिखने का अंदाज ही ऐसा है कि पाठक अपने आप ही उनके ब्लॉग पर खिंचा चला आता है उनका यही प्रेरणादायक लेखन ने हमेशा ही ब्लॉगजगत को प्रभावित किया है निरंतर लेखन के लिए साधना जी को ढेरों शुभ कामनायें........!!

( C ) संजय भास्कर