18 दिसंबर 2014

पुरानी डायरी के पन्ने : )

                                                 चित्र - ( गूगल से साभार )
अक्सर जब कभी मिल जाती है
पुरानी डायरी
तब लगभग हर उस शख्स के चेहरे पर
मुस्कराहट आ जाती है
जिसने कभी इस डायरी में
कुछ सपने संजोये होंगे !                          
डायरी में कैद होते है चंद खुबसूरत लब्ज,
कुछ बीती हुई यादें
कुछ ऐसी पंक्तियाँ
जिनमे में जिक्र होता है
कुछ पुरानी यादों का
हर उन खुबसूरत लम्हों का
तुम्हारी हँसी का
जो कैद होता है
डायरी के उन पन्नो में
ऐसा हर याद का जिक्र जो
समय के साथ धुँधली याद बन गई है !!
और आज नजर गई जब
उस डायरी पर
तब एक लम्हे में जिंदगी जी
लेने का अहसास
मुस्कुराहटें कुछ तस्वीरें
और कुछ अधूरी सी कवितायेँ
और बहुत कुछ बीते कल के बारे में
 पुरानी यादों को ताजा कर गया ...... !!

( C ) संजय भास्कर  



20 नवंबर 2014

दूर दूर तक अपनी दृष्टि दौड़ाती सुनहरी धुप -- आशालता सक्सेना :)

सुनहरी धुप आशा जी का पाँचवा काव्य संग्रह है इस संग्रह में विभिन्न विषयों पर आशा जी के मन के भावो से जुडी अनेको कवितायेँ है श्री मति आशा जी को मैं चार वर्षों से जानता हूँ और अंतरजाल पर लगातार चार वर्षो से जुड़ा हुआ हूँ............!
आशा जी कि लेखन शैली वर्णात्मक है भाषा पर अधिकार उन्हें अपनी माता जी प्रसिद्ध कवित्री ( श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना ) जी से विरासत में मिला है | इसीलिए आशा जी के शब्द चयन बहुत ही सरल और सुंदर है !

.......इसी के साथ बहुत सी यादें भी जुडी हुई है !
आशा जी कि कलम से :--
कुछ तो ऐसा है तुम में
य़ुम्हारी हर बात निराली है
कोई भावना जाग्रत होती है
एक कविता बन जाती है !
लिखते लिखते कलम नहीं थकती
हर रचना कुछ कहती है
इसीलिए तुम्हारी याद मिटने न दूंगा
हर किताब को सहेज कर रखूँगा !!

....आशा जी कि भाषा शैली सरल होते हुए भी पाठक को गहराई तक ले जाती है मुझे ये कहते हुए बिलकुल भी संकोच नहीं है क्योंकि आशा जी मानसिक चेतना और अभिव्यक्ति को प्रस्तुत करने में हमेशा सफल रही है
प्रस्तुत कविता संग्रह में 132 कवितायेँ है कुछ कवितायेँ ऐसी है जो आम कविताओं से अलग है जो पाठको को अपनी और खींचती है सच पूछा जाए तो कवि कि यही मानसिकता ,क्षमता ,पाठक के लिए बहुत बड़ी सम्पति है और मैं ये आशा करता हूँ कि काव्य जगत में पाठक आशा सक्सेना जी कि अभियक्ति को समझेंगे और लेखक कि चेतना और अभिव्यक्ति के साथ जुड़े रहेंगे !
हिंदी के आधुनिक कविता संग्रह में इस संग्रह का अपना ही स्थान होगा ! .....मैं एक बार फिर आशा जी कि तारीफ करता हूँ क्योंकि मैं आशाजी के चारों काव्य संकलनो को देख व पढ़ चुका हूँ और अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली मानता हूँ जो आशाजी के पांचवे  संग्रह में अपने विचार दे पाया हूँ ! मेरा ये विश्वास है कि ये संग्रह काव्य प्रेमियों के बीच अपनी अलग कि पहचान बनाएगा !
मेरी और से एक बार पुन: काव्य संग्रह " सुनहरी धुप " के लिए श्रीमती आशा लाता सक्सेना जी को बधाई व शुभकामनाएँ उनकी ये चमक दूर -दूर तक पहुचे इसके लिए आशा जी को ढेरों शुभ कामनाये ........!!!


पता - श्रीमती आशालता सक्सेना सी-47, एल.आई.जी, ऋषिनगर, उज्जैन-456010  पुस्तक प्राप्ति हेतु कवयित्री (आशा सक्सेना जी) से दूरभाष- 0734 - 2521377 से भी सीधा सम्पर्क किया जा सकता है।
आशा जी की सभी पुस्तको की समीक्षा आप यहाँ भी पढ़ सकते है
बहुमुखी प्रतिभा - आशालता सक्सेना :)

 ( C ) संजय भास्कर 

28 अक्तूबर 2014

..... कुछ रिश्ते अनाम होते है :)


कुछ रिश्ते अनाम होते है 
पर वो रिश्ते
दिल के करीब होते है 
अनाम होने पर भी रिश्ते 
कायम रहते है !
पर जब भी उन्हें नाम देने 
की कोशिश की जाती है !
तो जाने क्‍यूँ 
वो रिश्ते लड़खड़ाने लगते है 
नाम से रिश्ते तो बन्ध जाते है !
पर बेनाम आगे बढ़ते जाते है 
न कोई बंधन और न ही कोई सहारा 
सच्ची मुस्कान लिए होते है 
अनाम रिश्ते !
सभी बन्धनों से मुक्त ,
बिना किसी सहारे के लम्बी दूरी तक 
साथ निभाते है अनाम रिश्ते ! 
हमेशा दिल के पास होते है 
ये अनाम रिश्‍ते 
अपनेपन का नाम साथ लेकर ही
बस खास होते है !

 ( C ) संजय भास्कर