27 दिसंबर 2013

............. वह सफर ही क्या -- संजय भास्कर

( चित्र - गूगल से साभार )
वह सफर ही क्या
जिसमे उत्साह न हो
वह सफर ही क्या
जिसमे शामिल कुछ दिल
दिलचस्प यादें न हो
आगे बढ़ चल देने
और मंजिल तक पहुँच जाने को
सफ़र नहीं कहते !
सफ़र में अक्सर
जरूरी नहीं एक जगह
से दूसरी जगह का हो
कई बार सफ़र होता है
मन से मन का
प्रेम से प्रेमी का
और न जाने कही का और
कैसा भी हो सकता है !
सफ़र में जो हमारा साथ देते है
वो होते है , कुछ मोड़
कुछ रास्ते
कुछ सुस्त कदम
और लम्बी राहें
ये सब मिलकर निकल पड़ते है
एक तन्हा सफ़र पर..............!!!!


@ संजय भास्कर

06 दिसंबर 2013

......... बहुत परेशान है मेरी कविता -- संजय भास्कर

( चित्र - गूगल से साभार )

बहुत परेशान है मेरी कविता
कुछ सच्ची कुछ झूठी है मेरी कविता !!

कोशिश करता हूँ लिखू कठिन शब्दों में
पर बहुत ही सरल शब्दों में है मेरी कविता  !!

लिखना चाहता हूँ हमेशा बड़ी कविता
पर अक्सर छोटी ही रह जाती है मेरी कविता !!

जो शब्द,लफ्ज विचार आते है मन में लिख देता हूँ 
इन सब को मिला कर तैयार हुई है मेरी कविता  !!

दर्द के लम्हो को लिख दिया कागज पर
तभी तो बहुत परेशान है मेरी कविता  !!

सभी साथियों को मेरा नमस्कार काफी दिनों से व्यस्त होने के कारण ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा रहा हूँ  पर अब आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ अपनी नई रचना के साथ उम्मीद है आपको पसंद आये.........!!!



--  संजय भास्कर 




13 नवंबर 2013

............ दृष्टिकोण :))




जीवन में सबसे दुर्भाग्यशाली 
वह है,
जिसके पास दृष्टि तो है
 पर दृष्टिकोण नहीं
 पर सच तो ये है,
क्योंकि दृष्टिकोण के लिए
 अपने भीतर की दुनिआ से
जुड़ना पड़ता है !
आंकना पड़ता है आकारों के पार
निरंकार मन में
क्योंकि कहता तो
अध्यात्म भी यही  है!
आओ अकार से ऊपर उठने के लिए
निरंकार कि और चले ...............!!


-- संजय भास्कर