05 जनवरी 2010

पंत की रचनाओं में समाया है एक पूरा युग



मौजूदा उत्तराखंड के अल्मोडा जिले की खूबसूरत वादियों में पैदा हुए सुमित्रानंदन पंत के दिलो-दिमाग में प्रकृति की सुंदरता कुछ इस कदर समाई कि ताउम्र उनकी संगिनी बन कर रह गई। हिंदी साहित्य के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाने वाले सुमित्रानंदन पंत प्रकृति प्रेमी थे।
20 मई 1900 को पैदा हुए पंत की ज्यादातर रचनाएं प्राकृतिक सौंदर्य की छटा बिखेरती नजर आती हैं। मशहूर साहित्यकार जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और रामकुमार वर्मा के समकालीन पंत ऐसे साहित्यकारों में गिने जाते हैं जिनका प्रकृति चित्रण इन सबमें सबसे बेहतरीन था।
आकर्षक व्यक्तित्व के धनी सुमित्रानंदन पंत की रचना और उनके व्यक्तित्व के बारे में जानेमाने साहित्यकार और हंस पत्रिका के संपादक राजेन्द्र यादव कहते हैं कि पंत अंग्रेजी के रूमानी कवियों जैसी वेशभूषा में रह कर प्रकृति केन्द्रित साहित्य लिखते थे। जन्म के महज छह घंटे के भीतर अपनी मां को खो देने वाले पंत के बारे में यादव ने बताया कि पंत लोगों से बहुत जल्द प्रभावित हो जाते थे। उन्होंने बताया कि पंत ने महात्मा गांधी और कार्ल मा‌र्क्स से प्रभावित होकर उन पर रचनाएं लिख डालीं।
हिंदी साहित्य के विलियम वर्डस्वर्थ कहे जाने वाले सुमित्रानंदन पंत के बारे में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय [जेएनयू] में हिंदी साहित्य के प्रोफेसर देवेन्द्र चौबे ने बताया कि उन्हें प्रकृति के सुकुमार कवि के तौर पर जाना जाता है। महानायक अमिताभ बच्चन को अमिताभ नाम देने वाले सुमित्रानंदन पंत के बारे में चौबे ने बताया कि पद्मभूषण, ज्ञानपीठ और साहित्य अकादमी पुरस्कारों से नवाजे जा चुके पंत की रचनाओं में समाज के यथार्थ के साथ-साथ प्रकृति और मनुष्य की सत्ता के बीच टकराव भी होता था।
संस्कृतनिष्ठ हिंदी लिखने के लिए मशहूर सुमित्रानंदन पंत की प्रमुख रचनाएं वीणा, लोकायतन, चिदंबरा और बूढा चांद आदि थीं लेकिन उनकी सबसे कलात्मक कविताएं पल्लव में संकलित हैं। यह 32 कविताओं का संग्रह है। जन्म के कुछ ही घंटों बाद अपनी मां को खो चुके पंत को उनकी दादी ने पाला पोसा और उनका नाम गुसाई दत्त रखा।
हरिवंश राय बच्चन और श्री अरविंदो के साथ जिंदगी के अच्छे खासे दिन बिता चुके पंत के बारे में चौबे ने बताया कि आधी सदी से भी ज्यादा लंबे उनके रचनाकर्म में आधुनिक हिंदी कविता का एक पूरा युग समाया हुआ है। 
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10 टिप्‍पणियां:

Suman ने कहा…

nice

NARENDRASINGH ने कहा…

अद्वितीय जानकारी

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

अच्छी लगी यह जानकारी .पन्त जी के बारे में जितना कहा जाए उतना कम है ..शुक्रिया

रश्मि प्रभा... ने कहा…

बहुत ही अच्छी शुरुआत है हिंदी के महान कवियों को लेकर........
पन्त की रचनाओं ने हमें प्रकृति के सौन्दर्य से जोड़कर रखा.....
समकालीन हर कवियों की बात निराली है

ज्योति सिंह ने कहा…

aapki ye charcha sarahniye rahi ,pant ji ki baat hi alag rahi ,sundar

दिगम्बर नासवा ने कहा…

प्रेम और सोन्दर्य की रचनाओं में पंत जी का कोई सानी नही है ......... बहुत अच्छा लिखा है ......

आमीन ने कहा…

अच्छा लिखा है ......

आमीन ने कहा…

बहुत अच्छा लिखा है

Raj Kumar Chauhan ने कहा…

अच्छा लिखा है ......

ajeet ने कहा…

समकालीन हर कवियों की बात निराली है