30 नवंबर 2009

इक अपने ने  भुला दिया  तो क्या गुनाह किया !

एक अपने ने रुलाया दिया तो क्या गुनाह किया , अरसा हुआ किस मुस्कराहट की झलक देखे , सदिया बीत गई चिडियो की चहक देखे , हमारे अपनों ने रुलाया है हमे , एक अपने ने मुह फेर लिया तो क्या गुनाह किया जिंदगी ने किया है हँसी मजाक हमसे , एक अपने ने कर लिया तो क्या गुनाह किया , ज़माने ने रुलाया है हमको , एक अपने ने रुलाया दिया तो क्या गुनाह किया तन्हाई में कोई नही है हमसफ़र मेरा , ज़माने ने जुदा किया है हमको इक अपने ने भुला दिया तो क्या गुनाह किया