17 नवंबर 2009

खूब हंसो हँसना ही जिंदगी है !

हंसें और खूब हंसें। अगर आप ध्यान लगाना चाहते हैं तब तो और भी हंसें, क्योंकि यह ध्यान की पहली सीढ़ी है। हो सकता है कि आपको यह पढ़कर कुछ ताज्जुब हो, लेकिन विशेषज्ञों का यही मानना है। यदि आप ध्यान का अभ्यास करना शुरू करते हैं, तो सबसे पहले इधर-उधर भटक रहे मन को एकाग्रचित करना होता है। जब हम हंसते हैं, तब भी सब कुछ भूल कर एकाग्रचित हो जाते हैं। बीते दिनों की पीड़ा पीछे छूट जाती है। हंसते समय हमारा दिमाग तनावमुक्त होकर सिर्फ वर्तमान पर केंद्रित हो जाता है। हमारा शरीर, संवेदना और आत्मा भी इस क्रिया में सम्मिलित हो जाती है। यदि कोई व्यक्ति सुबह के समय हास्य ध्यान योग का अभ्यास करता है, तो वह दिन भर प्रसन्न रह सकता है। यदि शाम को इसका अभ्यास किया जाए, तो न केवल रात को अच्छी नींद आती है, बल्कि सुखद सपने भी आते हैं। मन की शक्ति का प्रयोग हास्य योग गुरु जितेन कोही कहते हैं कि हंसना भी योग है। जहां हास्य का अर्थ है मन की ऊर्जा को बढ़ाना, वहीं योग का मतलब होता है जोड़ना। इसलिए ये दोनों एक दूसरे के पर्यायवाची हैं।
हंसने के कई फायदे हैं। इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। हमारे मस्तिष्क को बहुत अधिक मात्रा में ऑक्सीजन की जरूरत होती है। हंसने से बड़ी मात्रा में हवा शरीर के अंदर चली जाती है। इस क्रम में फे फड़ों का भी व्यायाम हो जाता है